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‘सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकारों के समझाने पर नहीं मानना हठधर्मिता’

Fri, 21 Feb 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 11:21 PM IST
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'Supreme court interlocutors do not obey dogma'
शिक्षक नगर में सीएए के समर्थन में भजन कीर्तन करती महिलाएं - फोटो : DEVBAND
देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता कानून के समर्थन और एनआरसी, समान नागरिक संहिता और जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग को लेकर शिव पार्क में महिलाओं का भजन कीर्तन रिमझिम बारिश के बावजूद 13वें दिन भी जारी रहा।
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सामाजिक एवं साहित्यिक महिला संगठन प्रेरणा के तत्वावधान में शिक्षक नगर में चल रहे भजन कीर्तन कार्यक्रम में महिला नीलम गर्ग और इंद्रेश ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के वार्ताकारों के समझाने के बावजूद भी दिल्ली के शाहीन बाग में धरने पर बैठना प्रदर्शनकारियों की हठधर्मिता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि नागरिक संशोधन एक्ट के विरोध के नाम पर देश को तोड़ने की कोशिश की जा रही है। ओवैसी की सभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाना इनकी सोच और नीयत को दर्शाता है। देश विरोधी ताकतों और विपक्षी दलों द्वारा धरने पर बैठी महिलाओं का ब्रेनवाश कर दिया गया है। इस कारण उनको कुछ दिखाई सुनाई नहीं पड़ रहा है। डोली गोयल, शुभलेश शर्मा, उषा त्यागी, शीला सैनी, संतोष कांबोज ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह स्पष्ट कर चुके हैं कि सीएए से किसी भी भारतीय को कोई नुकसान नहीं है तो फिर विरोध प्रदर्शन का औचित्य ही नहीं रह जाता है। उन्होंने वारिश पठान के बयान की भी निंदा की। भजन कीर्तन में मंजू पंवार, उमा कश्यप, बीना सिंघल, नीलम वर्मा, आभा सिंघल, पिंकी त्यागी, शालू बागोरिया, रजनी, संगीता गोयल, सुमन गुप्ता, गीता गर्ग, राधा, कुसुम पंवार, शारदा, बबीता, सपना चौहान, गीता खुराना, कमलेश ओमबीरी कश्यप आदि रही।
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