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भगवा सरकार का किसानों से कोई लेना देना नहीं: हरेंद्र
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 12 Oct 2017 11:58 PM IST
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किसानों के धरने को संबोधित करते पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक।
- फोटो : अमर उजाला
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किसानों का बकाया गन्ना मूल्य नहीं मिलने के विरोध में कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में डीएम कार्यालय के समक्ष धरना दिया। पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक ने कहा कि पीएम मोदी और सीएम योगी किसानों के हितों के नाम पर दिखावा कर रहे हैं। मुनाफे में होने के बाद भी चीनी मिलों से भुगतान नहीं दिला पाए हैं। सरकार किसानों की समस्याओं के निराकरण को लेकर विफल रही है।
पूर्व सांसद मलिक ने कहा कि पिछले एक महीने से वो किसानों की समस्याओं और बकाया भुगतान दिए जाने की मांग को लेकर किसानों के साथ भैंसाना शुगर मिल परिसर में धरनारत हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कतई गंभीर नजर नहीं आता है। भैंसाना मिल प्रकरण में डीएम ने एडीएम वित्त को जांच सौंपी थी, लेकिन आज तक भी उनके द्वारा जांच के लिए कदम नहीं बढ़ाया गया। कोई वार्ता नहीं बुलाई गई और न ही किसानों से उनकी समस्या जानने का प्रयास हुआ।
ये प्रशासन की लापरवाही और लीपापोती की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र की सरकारें लगातार किसानों, गरीबों और व्यापारियों को आत्महत्या के लिए विवश कर रही हैं। पहले नोटबंदी और अब जीएसटी ने बेडा गर्क कर दिया है। हाल ही में कोर्ट फीस सौ गुना बढ़ाकर सस्ता न्याय पाने का हक भी जनता से छीनने का प्रयास किया गया है, जिससे समाज में रोष है। इसका खामियाजा 2019 में भाजपा को भुगतना पड़ेगा। ऋण माफी के नाम पर किसानों के साथ छलावा हो रहा है।
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सहकारी बैंकों के किसानों का ऋण माफ नहीं किया गया है। धरने के बाद कांग्रेसियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। इसमें भैंसाना शुगर मिल से बकाया भुगतान दिलाने, बागपत में सुमित गुर्जर की हत्या की जांच सीबीआई से कराने, नगरपालिका परिषद के ठेकेदारों की समस्याओं का निदान कराने, कोर्ट फीस में बढ़ोतरी का फैसला वापस कराने और बुखार एवं अन्य बीमारियों के बढ़ते प्रकोप की रोकथाम के व्यापक उपाय करने की मांग की गई है। प्रदर्शन में मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष नानू मियां, सुबोध शर्मा, अशोक वर्मा, उमादत्त शर्मा, सलीम मलिक, जुनैद रऊफ, तारिक कुरैशी, महबूब आलम, राममेहर राठी, मौलाना नजर मौहम्मद, असजद त्यागी, सुल्तान, बिलाल अंसारी, रिजवान, नूरअली सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।
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पूर्व सांसद मलिक ने कहा कि पिछले एक महीने से वो किसानों की समस्याओं और बकाया भुगतान दिए जाने की मांग को लेकर किसानों के साथ भैंसाना शुगर मिल परिसर में धरनारत हैं, लेकिन शासन-प्रशासन कतई गंभीर नजर नहीं आता है। भैंसाना मिल प्रकरण में डीएम ने एडीएम वित्त को जांच सौंपी थी, लेकिन आज तक भी उनके द्वारा जांच के लिए कदम नहीं बढ़ाया गया। कोई वार्ता नहीं बुलाई गई और न ही किसानों से उनकी समस्या जानने का प्रयास हुआ।
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ये प्रशासन की लापरवाही और लीपापोती की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि प्रदेश और केंद्र की सरकारें लगातार किसानों, गरीबों और व्यापारियों को आत्महत्या के लिए विवश कर रही हैं। पहले नोटबंदी और अब जीएसटी ने बेडा गर्क कर दिया है। हाल ही में कोर्ट फीस सौ गुना बढ़ाकर सस्ता न्याय पाने का हक भी जनता से छीनने का प्रयास किया गया है, जिससे समाज में रोष है। इसका खामियाजा 2019 में भाजपा को भुगतना पड़ेगा। ऋण माफी के नाम पर किसानों के साथ छलावा हो रहा है।
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सहकारी बैंकों के किसानों का ऋण माफ नहीं किया गया है। धरने के बाद कांग्रेसियों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन दिया। इसमें भैंसाना शुगर मिल से बकाया भुगतान दिलाने, बागपत में सुमित गुर्जर की हत्या की जांच सीबीआई से कराने, नगरपालिका परिषद के ठेकेदारों की समस्याओं का निदान कराने, कोर्ट फीस में बढ़ोतरी का फैसला वापस कराने और बुखार एवं अन्य बीमारियों के बढ़ते प्रकोप की रोकथाम के व्यापक उपाय करने की मांग की गई है। प्रदर्शन में मुख्य रूप से जिलाध्यक्ष नानू मियां, सुबोध शर्मा, अशोक वर्मा, उमादत्त शर्मा, सलीम मलिक, जुनैद रऊफ, तारिक कुरैशी, महबूब आलम, राममेहर राठी, मौलाना नजर मौहम्मद, असजद त्यागी, सुल्तान, बिलाल अंसारी, रिजवान, नूरअली सहित सैकड़ों किसान मौजूद रहे।