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अधर में पढ़ाई, इंतजार ने छात्र-छात्राओं की चिंता बढ़ाई
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अजीम, एमबीबीएस छात्र
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
अधर में पढ़ाई, इंतजार ने छात्र-छात्राओं की चिंता बढ़ाई
खतौली/रतनपुरी। रूस के हमले के बाद यूक्रेन से लौटे एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उनकी पढ़ाई अधर में है, जिस कारण युवाओं के भविष्य का संकट गहरा गया है। कस्बे में ढाकन चौक निवासी संदीप पांचाल ने बताया कि उनका भतीजा रितिक पांचाल यूक्रेन के विनेशिया शहर की यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा था। 24 फरवरी को स्वदेश लौटा। पढ़ाई जारी रखने के लिए कई जगह बातचीत चल रही है, लेकिन समाधान नहीं निकला। वर्तमान में रितिक मोदीपुरम स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
गांव छछरपुर निवासी रतन सिंह ने बताया कि उसकी बेटी काजल व भतीजा आदित्य तीन मार्च को स्वदेश आ गए थे, फिलहाल वह बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिस के लिए जा रहे हैं। 29 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है, सबकी निगाह इसी पर टिकी है। वहीं, रतनपुरी थाना क्षेत्र के गांव बड़सू निवासी विकास यूक्रेन के ईवान शहर में एमबीबीएस के तीसरे साल में पढ़ाई करता था। वह तीन मार्च को भारत लौटा था। उसने ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद ऑनलाइन ही पेपर दिए, जिसका रिजल्ट आ गया। अब वह चौथे वर्ष में पहुंच चुका है। विकास ने बताया कि कॉलेज से उन्हें एक सितंबर से ऑफलाइन पढ़ाई करने की जानकारी दी गई है।
पहली सितंबर से शुरू होगी पढ़ाई
भोपा। मोरना चीनी मिल निवासी विश्वास चौधरी 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते एक मार्च को वह लौट आया था। पांचवें वर्ष की बची पढ़ाई को घर पर रहकर ऑनलाइन पूरा किया है। फिलहाल छुट्टी चल रही हैं और विश्वास घर पर ही है। एक सितंबर से उसकी लास्ट ईयर की पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
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युवाओं के भविष्य पर मंडराया संकट
चरथावल। कस्बा निवासी बैटरी कारोबारी मेहरबान त्यागी का बेटा अजीम आलम यूक्रेन की विन्नित्सिया नेशनल प्रीगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस चौथे साल की पढ़ाई कर रहा था। रूस के हमले के बाद उसे स्वदेश लौटना पड़ा। तीन महीने से घर रहकर चौथे वर्ष की पढ़ाई ऑनलाइन पूरी की। बकौल अजीम वहां एमडी की डिग्री का कोर्स छह वर्ष का होता है, जो भारत की एमबीबीएस के बराबर माना जाता है। फिलहाल जून में यूनिवर्सिटी की छुट्टियां हैं। दो साल की पढ़ाई कैसे पूरी होगी, इसे लेकर चिंतित है और सरकार के निर्णय पर निगाहें टिकी हैं। वहीं, यूक्रेन के उजहोरोद में चरथावल निवासी किराना व्यापारी ललित का बेटा वैभव त्यागी मेडिकल कोर्स की तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था, तीन महीने से वह भी कस्बे में है।
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खतौली/रतनपुरी। रूस के हमले के बाद यूक्रेन से लौटे एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। उनकी पढ़ाई अधर में है, जिस कारण युवाओं के भविष्य का संकट गहरा गया है। कस्बे में ढाकन चौक निवासी संदीप पांचाल ने बताया कि उनका भतीजा रितिक पांचाल यूक्रेन के विनेशिया शहर की यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस कर रहा था। 24 फरवरी को स्वदेश लौटा। पढ़ाई जारी रखने के लिए कई जगह बातचीत चल रही है, लेकिन समाधान नहीं निकला। वर्तमान में रितिक मोदीपुरम स्थित ग्लोबल हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर रहे हैं।
गांव छछरपुर निवासी रतन सिंह ने बताया कि उसकी बेटी काजल व भतीजा आदित्य तीन मार्च को स्वदेश आ गए थे, फिलहाल वह बेगराजपुर मेडिकल कॉलेज में प्रैक्टिस के लिए जा रहे हैं। 29 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है, सबकी निगाह इसी पर टिकी है। वहीं, रतनपुरी थाना क्षेत्र के गांव बड़सू निवासी विकास यूक्रेन के ईवान शहर में एमबीबीएस के तीसरे साल में पढ़ाई करता था। वह तीन मार्च को भारत लौटा था। उसने ऑनलाइन पढ़ाई करने के बाद ऑनलाइन ही पेपर दिए, जिसका रिजल्ट आ गया। अब वह चौथे वर्ष में पहुंच चुका है। विकास ने बताया कि कॉलेज से उन्हें एक सितंबर से ऑफलाइन पढ़ाई करने की जानकारी दी गई है।
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पहली सितंबर से शुरू होगी पढ़ाई
भोपा। मोरना चीनी मिल निवासी विश्वास चौधरी 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गया था। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते एक मार्च को वह लौट आया था। पांचवें वर्ष की बची पढ़ाई को घर पर रहकर ऑनलाइन पूरा किया है। फिलहाल छुट्टी चल रही हैं और विश्वास घर पर ही है। एक सितंबर से उसकी लास्ट ईयर की पढ़ाई शुरू हो जाएगी।
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युवाओं के भविष्य पर मंडराया संकट
चरथावल। कस्बा निवासी बैटरी कारोबारी मेहरबान त्यागी का बेटा अजीम आलम यूक्रेन की विन्नित्सिया नेशनल प्रीगोव मेमोरियल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस चौथे साल की पढ़ाई कर रहा था। रूस के हमले के बाद उसे स्वदेश लौटना पड़ा। तीन महीने से घर रहकर चौथे वर्ष की पढ़ाई ऑनलाइन पूरी की। बकौल अजीम वहां एमडी की डिग्री का कोर्स छह वर्ष का होता है, जो भारत की एमबीबीएस के बराबर माना जाता है। फिलहाल जून में यूनिवर्सिटी की छुट्टियां हैं। दो साल की पढ़ाई कैसे पूरी होगी, इसे लेकर चिंतित है और सरकार के निर्णय पर निगाहें टिकी हैं। वहीं, यूक्रेन के उजहोरोद में चरथावल निवासी किराना व्यापारी ललित का बेटा वैभव त्यागी मेडिकल कोर्स की तीसरे वर्ष की पढ़ाई कर रहा था, तीन महीने से वह भी कस्बे में है।