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राजकीय महाविद्यालय में प्राइवेट शिक्षक से उर्दू विषय पढ़ते हैं छात्र

Thu, 07 Jul 2022 12:30 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 07 Jul 2022 12:30 AM IST
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Students study Urdu from private teacher in government college
राजकीय महाविद्यालय में प्राइवेट शिक्षक से उर्दू पढ़ते हैं छात्र
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सहारनपुर, देवबंद। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में स्नातक कक्षाओं में उर्दू, संस्कृत और राजनीतिशास्त्र विषयों के प्रवक्ताओं के पद लंबे समय से खाली पड़े हुए हैं। आलम यह है कि संस्कृत के छात्रों को हिंदी के प्रवक्ता पढ़ाते हैं तो उर्दू की पढ़ाई प्राइवेट प्रवक्ता के माध्यम से कराने को महाविद्यालय मजबूर हैं। जबकि राजनीतिशास्त्र के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है।
यूं तो देवबंद के कई प्राइवेट महाविद्यालयों में स्नातक कक्षाओं में हिंदी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, समाजशास्त्र के साथ ही उर्दू व संस्कृत विषयों की पढ़ाई हो रही है। लेकिन एकमात्र राजकीय डिग्री कॉलेज में उर्दू और संस्कृत विषय में छात्र प्रवेश तो लेते हैं लेकिन प्रवक्ताओं के पद लंबे समय से खाली होने के चलते उन्हें उक्त विषयों की पढ़ाई करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है। स्थिति यह है कि उर्दू विषय के प्रवक्ता का पद तीन साल से तो संस्कृत विषय के प्रवक्ता का पद छह साल से रिक्त पड़ा हुआ है। राजनीतिशास्त्र के प्रवक्ता के पद पर तो आठ साल से कोई तैनाती ही नहीं है।
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इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने के बाद अधिकतर छात्र राजकीय महाविद्यालय में ही प्रवेश लेने के इच्छुक होते हैं। राजकीय महाविद्यालयों में पढ़ाई का खर्च प्राइवेट कॉलेजों की अपेक्षा कम होता है।
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- कई बार निदेशक को लिखा पत्र
महाविद्यालय में हॉल ही में अंग्रेजी विषय के रिक्त पड़े पद पर प्रवक्ता रूबी की तैनाती हुई है। लेकिन उर्दू, संस्कृत एवं राजनीतिशास्त्र के प्रवक्ताओं के पद अभी खाली हैं। जिन पर लंबे समय से किसी प्रवक्ता की तैनाती नहीं हुई है। जबकि उर्दू में 10, संस्कृत में 72 और राजनीतिशास्त्र में 80 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संस्कृत को तो हिंदी के प्रवक्ता पढ़ाते हैं। उर्दू विषय की पढ़ाई प्राइवेट प्रवक्ता से करानी पड़ती है। जबकि राजनीतिशास्त्र की ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। रिक्त पदों के संबंध में कई बार निदेशक को पत्र लिखा गया है। - डा. मोनिका सिंह, प्राचार्य
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