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दहशत के साये में कैद रही चार घंटे जिंदगी, कोच्चिवेली जा रही ट्रेन में बिलबिलाए यात्री 

Tue, 03 Apr 2018 01:01 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर Updated Tue, 03 Apr 2018 01:01 AM IST
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Stop the train going to Kochi
मुजफ्फरनगर में ट्रेन को रोकते उपद्रवी। - फोटो : अमर उजाला
चारों ओर शोरशराबा, जय भीम के साथ दलित एकता के गूंजते नारे और हाथों में लट्ठ लिए युवक स्टेशन पर आ धमके। जलपान के लिए ट्रेन से कुछ यात्री उतरे ही थे, तभी भगदड़ मच गई। देखते ही देखते पूरी ट्रेन आंदोलनकारियों के कब्जे में हो गई। रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ कर डिजिटल टिकट मशीन, गेट तोड़ दिए गए। स्टेशन का जलाने का प्रयास किया गया। यह सब देख रहे दहशत में आए देहरादून-कोच्चिवेली  ट्रेन के यात्री चार घंटे खौफ के साये में कैद रहे। 
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देहरादून से चले यात्रियों को यह आभास तनिक भी नहीं था, कि उनका सफर मुजफ्फरनगर में आने पर अधिक लंबा हो जाएगा। रेलवे स्टेशन पर घूमने वाली भीड़ ने ट्रेन के कोचों में चढ़ने का प्रयास किया। इस पर जीआरपी, आरपीएफ ने मोर्चा तो संभाल लिया, लेकिन स्थिति को काबू करने में विफल रही।
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इसके बाद ट्रेन के पूरी तरह से पहिये थम गए। करीब चार घंटे तक यात्रियों की जिंदगी खौफ के साये में कैद हो गई। कोच की खिड़की, दरवाजे तक बंद कर दिए गए। इससे बच्चों, महिलाओं में दहशत बैठ गई। कुशलक्षेम जानने और बताने के लिए यात्रियों के फोन घनघना गए। देहरादून से परिवार के साथ दिल्ली अपने घर लौट रहे अनीस ने कहा कि मालूम नहीं था, सोमवार को सफर इतना कठिन होगा।
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स्टेशन पर पानी लेने जाना था, मगर युवकों के हाथों में डंडे देखकर लौट आया। देहरादून से ही दिल्ली जा रहे आर्मी के जवान रविंद्र ने कहा कि दो घंटे से अधिक समय हो गया, ट्रेन हिली तक नहीं है। खाने-पीने के लिए भी कुछ साथ नहीं रखा था, जिसके चलते स्थिति खराब हो गई है। ट्रेन के कई कोच खंगाले गए तो यात्रियों के चेहरों पर खौफ साफ दिखाई दिया। एसी कोच के यात्रियों की आंखों में आंसू रहे। कई यात्रियों ने रोते हुए कहा कि इसका अंदाजा नहीं था, आज ऐसा भी देखने को मिलेगा।

नेहा, दीपाली और अक्षत दिल्ली में मल्टीनेशनल कंपनी में कार्य करते हैं। चार दिन बैंकों की छुट्टी होने के कारण देहरादून घर आए थे, सोमवार को सभी परिवार के साथ लौट रहे थे। बच्चे भी भीड़ को देखकर दहशत में आए गए। चार घंटे तक कोच्चिवेली रेलवे स्टेशन पर ही खड़ी रही। शाम करीब तीन बजे के बाद ट्रेन को आगे के लिए रवाना किया गया। 

वेंडरों से छीनी पानी की बोतलें 
मुजफ्फरनगर। रेलवे स्टेशन पर उत्पाती युवकों ने ट्रेन में सामान बेचने वाले वेंडरों के साथ भी बदसलूकी की। इस दौरान वेंडर नसीम, अकील और नरेंद्र, अजित से उत्पाती युवक पानी के साथ अन्य सामग्री छीनकर ले गए। इससे घबराए वेंडर ट्रेन में छुपकर बैठ रहे। 

कालोनियों, सड़क पर लगे कैमरे बनेंगे सबूत 
गुरिल्लावार में हुए हमलों में शहर झुलस गया। उपद्रवियों पर ‘ट्रिपल पी’भारी पड़ेगा। आगजनी, तोड़फोड़ के साथ पुलिस, आम राहगीरों को चोटिल करने के मामले में पुलिस-पब्लिक और प्रशासन थानावार मुकदमे दर्ज करेगा। हालांकि खुफिया तंत्र इन भीड़ का इनपुट दिया था, जिसे पुलिस-प्रशासन नहीं भांप सका है।

कालोनियों, दुकानों के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे उपद्रवियों के खिलाफ सबूत बनेंगे। जिलेभर में सक्रिय दलित संगठनों के अलावा राजनीतिक दलों की भूमिका रडार पर रखी गई है। जिसकी जांच-पड़ताल प्रारंभ कर दी गई है। 

खुफिया तंत्र ने दलित संगठनों में उपज रहे आक्रोश को भांपने में चूक कर दी। इतना ही नहीं, जिस तरह से गुरिल्लावार में हमले किए गए है। उससे साफ है कि युवकों की भीड़ को पहले से ही इसकी ताकीद दी गई थी। जैसे-जैसे सूरज चढ़ता गया, आंदोलन तेज होता रहा। भीड़ पुलिस के सामने चौक-चौराहे जाम करने में लगी रही, लेकिन अफसर तमाशबीन बन गए।

नतीजा, आगजनी और तोड़फोड़ तक पहुंच गया। उपद्रव की आग में शहर के झुलसने के बाद अफसरों ने कसरत शुरू की, तब हालात बेकाबू हो गए। पुलिस मान रही है कि आगजनी का सामान उपद्रवी साथ लाए थे। भीड़ का अंदाजा भी प्रशासन की सोच से कई गुणा निकला। अफसरों ने स्वीकारा है कि पांच-सात हजार युवकों, महिलाओं, व्यक्तियों की भीड़ ने उत्पात मचाया है। दिलचस्प यह है कि भीड़ का कोई चेहरा सामने नहीं आया।

इससे मुश्किलें अधिक बढ़ गई। उपद्रव में युवक अधिक शामिल रहे, जिन्होंने होटल, ढाबों में तोड़फ़ोड़ करने के अलावा सड़क जाम करने में मुख्य भूमिका अदा की। डीआईजी, कमिश्नर के दौरे के बाद जागे प्रशासन ने प्रकरण में कड़ी कार्रवाई की तैयारियां प्रारंभ कर दी है। पहले पुलिस उन स्थानों को चिह्नित कर रही है. जहां भीड़ अधिक रही है तथा आसपास के दुकानदारों, कालोनियों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, ताकि उपद्रवियों की पहचान हो सके।

अफसरों ने उपद्रवियों पर शिकंजा कसने के लिए ‘ट्रिपल पी’ तैयार किया है। इसमें पुलिस-प्रशासन और पब्लिक (प्राइवेट स्तर पर नुकसान के भोगी) मिलकर उपद्रवियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराएंगे। पुलिस के साथ खुफिया तंत्र ने उपद्रव में शहीद उधम सिंह सेना, जय सिंधू संघ, भीम आर्मी एकता मिशन, भीमराव अंबेडकर बौद्ध ट्रस्ट, भारतीय बौद्ध सभा को जांच रडार पर रखा है।


इसके अलावा भी राजनीतिज्ञ दलों की भूमिका की जांच की जा रही है। क्योंकि इतने बड़े स्तर पर बिना गाइडलाइन मिले उपद्रव नहीं किया जा सकता है। एसएसपी अनंत तिवारी ने बताया कि फिलहाल शहर के सभी थानाक्षेत्रों में हुए नुकसान की जांच के अलावा कैमरों के माध्यम से पहचान करने की कोशिश की जा रही है। उसके बाद दोषियों की गिरफ्तारी होगी। भीड़ में एक-दो मुख्य चेहरे प्रकाश में आए हैं, जिनकी जांच-पड़ताल प्रारंभ कर दी गई है। 
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