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Muzaffarnagar News: निरक्षर रेखा ने धीराहेड़ी में जलाई साक्षरता की ज्योति
Fri, 08 Sep 2023 01:20 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 08 Sep 2023 01:20 AM IST
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रेखा देवी धाीराहेड़ी
- कड़े संकल्प से पहले खुद को किया साक्षर, फिर महिलाओं को पढ़ाया
- अब अंगूठा नहीं लगातीं, हस्ताक्षर करती हैं गांव की महिलाएं
साक्षरता दिवस पर विशेष-- -- --
फोटो समाचार
प्रेम सागर
भोपा। दृढ़ इच्छा शक्ति और कुछ कर गुजरने की चाह कामयाबी की इबारत लिखती है। धीराहेड़ी की रेखा देवा भी साक्षरता का उजाला करने की मिसाल बन गई हैं। पहले खुद की जिंदगी को शिक्षा से रोशन किया और फिर निरक्षर महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला दिया, उन्हें पढ़ाया और निरक्षरता का लेख मिटा दिया।
गांव धीराहेड़ी निवासी रेखा देवी पहले निरक्षर थीं। उसके मन में हमेशा कुछ कर गुजरने की चाह रही। किताबें देखतीं तो हमेशा पढ़ने का मन होता। परिवार ने साथ दिया तो उन्होंने खुद को साक्षर कर दिखाया, लेकिन रेखा यहीं पर नहीं रुकीं। उनके मन में शिक्षा की जो ज्योति जली थी, उसे मशाल बना दिया। इसके बाद अब तक वह धीराहेड़ी गांव में दो दर्जन से भी अधिक महिलाओं को अपने घरेलू कार्यों से समय निकालकर साक्षर बना चुकी हैं। गांव के लोग उनके प्रयास की सराहना करते हैं। वह कहती हैं कि लगभग दो दर्जन महिलाएं ऐसी हैं जो अपना नाम के स्थान पर अंगूठा लगाती थीं, लेकिन अब वह हस्ताक्षर करती हैं। जब रेखा इन महिलाओं को हस्ताक्षर करते हुए देखती हैं तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। (संवाद)
भोपा में लोगों को पढ़ा रहे अरविंद
भोपा निवासी अरविंद पांडेय ने भी पिछले एक साल में लगभग 30 लोगों को हस्ताक्षर करना सिखाया और अक्षर ज्ञान कराया है। उनका कहना है कि वह ऐसे लोगों के लिए आज भी कार्य करते रहते हैं, जो अपना नाम नहीं लिख सकते। उनका उद्देश्य है उनके माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग साक्षर बन सकें।
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शिक्षा का उजियारा फैलाएं युवा
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. धर्मेंद्र शर्मा कहते हैं कि युवा साक्षरता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अपने घरों या आसपास रहने वाले लोगों को समय निकालकर जरूर साक्षर करें। लगातार प्रयास करने से खुद नतीजे आएंगे। अगर एक व्यक्ति एक अनपढ़ को साक्षर बना दें तो निश्चित तौर पर यह बड़ा कदम होगा।
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- अब अंगूठा नहीं लगातीं, हस्ताक्षर करती हैं गांव की महिलाएं
साक्षरता दिवस पर विशेष
फोटो समाचार
प्रेम सागर
भोपा। दृढ़ इच्छा शक्ति और कुछ कर गुजरने की चाह कामयाबी की इबारत लिखती है। धीराहेड़ी की रेखा देवा भी साक्षरता का उजाला करने की मिसाल बन गई हैं। पहले खुद की जिंदगी को शिक्षा से रोशन किया और फिर निरक्षर महिलाओं को आगे बढ़ने का हौसला दिया, उन्हें पढ़ाया और निरक्षरता का लेख मिटा दिया।
गांव धीराहेड़ी निवासी रेखा देवी पहले निरक्षर थीं। उसके मन में हमेशा कुछ कर गुजरने की चाह रही। किताबें देखतीं तो हमेशा पढ़ने का मन होता। परिवार ने साथ दिया तो उन्होंने खुद को साक्षर कर दिखाया, लेकिन रेखा यहीं पर नहीं रुकीं। उनके मन में शिक्षा की जो ज्योति जली थी, उसे मशाल बना दिया। इसके बाद अब तक वह धीराहेड़ी गांव में दो दर्जन से भी अधिक महिलाओं को अपने घरेलू कार्यों से समय निकालकर साक्षर बना चुकी हैं। गांव के लोग उनके प्रयास की सराहना करते हैं। वह कहती हैं कि लगभग दो दर्जन महिलाएं ऐसी हैं जो अपना नाम के स्थान पर अंगूठा लगाती थीं, लेकिन अब वह हस्ताक्षर करती हैं। जब रेखा इन महिलाओं को हस्ताक्षर करते हुए देखती हैं तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता। (संवाद)
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भोपा में लोगों को पढ़ा रहे अरविंद
भोपा निवासी अरविंद पांडेय ने भी पिछले एक साल में लगभग 30 लोगों को हस्ताक्षर करना सिखाया और अक्षर ज्ञान कराया है। उनका कहना है कि वह ऐसे लोगों के लिए आज भी कार्य करते रहते हैं, जो अपना नाम नहीं लिख सकते। उनका उद्देश्य है उनके माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लोग साक्षर बन सकें।
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शिक्षा का उजियारा फैलाएं युवा
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. धर्मेंद्र शर्मा कहते हैं कि युवा साक्षरता को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। अपने घरों या आसपास रहने वाले लोगों को समय निकालकर जरूर साक्षर करें। लगातार प्रयास करने से खुद नतीजे आएंगे। अगर एक व्यक्ति एक अनपढ़ को साक्षर बना दें तो निश्चित तौर पर यह बड़ा कदम होगा।