मंदिरों के मर्म को समझे समाज : डॉ. मोहन भागवत
खतौली (मुजफ्फरनगर)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि विदेशी आक्रांताओं ने जब हमें गुलाम करना चाहा तो मंदिरों को तोड़कर मनोबल पहले तोड़ा। हमें मंदिर के मर्म को समझना चाहिए। सारा समाज एक साथ रहे, उन्नति के पथ पर बढ़े यह जरूरी है।
जानसठ रोड स्थित श्रीकृष्ण मंदिर के 65वें वार्षिक महोत्सव में पहुंचे आरएसएस प्रमुख ने कहा कि मंदिर धर्म का केंद्र है। देश में अनादि काल से कई भाषाओं के बोलने वाले, अनेक उपासनाओं के मानने वाले लोग रहते चले आ रहे हैं। यही हमारा स्वभाव है। एक समय में सभी पंथ संप्रदाय के मंदिरों में उपासना के साथ मंदिरों में रोजगारों को आश्रय मिलता था। कृषि, मल्लशाला और कलाशाला होती थी। आज वह स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि सब मिलकर अपने देश को बड़ा बनाओ। देश विश्व गुरु बनेगा तो दुनिया की सारी अशांति नष्ट हो जाएगी। दुनिया सुख और शांति से जीना सीखेगी। सत्य, शांति, अहिंसा और करुणा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।