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अटूट श्रद्धा का केंद्र है अटाली-चरौली का सिद्धपीठ शिव मंदिर
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चिरौली गांव का शिव मंदिर
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
हमारे शिवालय
- हर साल श्रावण मास की शिवरात्रि पर लगता है विशाल मेला
- कथा है कि ऋषि जमदग्नि ने की थी एतिहासिक मंदिर की स्थापना
संवाद न्यूज एजेंसी
भौराकलां। अटाली और चरौली गांव के बीच प्राचीन शिव मंदिर अटूट श्रद्घा और विश्वास का केंद्र है। दूरदराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्घपीठ प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।
मुजफ्फरनगर-शामली मार्ग पर धौलरा बस स्टैंड से मंदिर का मुख्य मार्ग जाता है। अटाली और चरौली गांव में स्थित मंदिर की इतिहास निराला है। मंदिर कमेटी के संचालक सावटू निवासी मुकेश बंसल बताते हैं कि सिद्ध पीठ मंदिर की स्थापना पुरातन काल में भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि ने की थी। पूर्वज बताते थे कि मंदिर के स्थान पर भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए थे। वर्तमान में मंदिर प्रांगण में महावीर हनुमान, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी सहित देवी देवताओं की दिव्य मूर्ति स्थापित है। मंदिर प्रांगण में भोले के भक्तों को असीम श्रद्धा और भक्ति भाव की अनुभूति होती है।
शिवरात्रि पर लगता है शिवभक्तों का मेला
भौराकलां क्षेत्र के अटाली-चरौली में स्थित शिवालय की क्षेत्र में विशेष मान्यता है। श्रावण मास की शिवरात्रि को यहां भारी तादात में भोले के भक्तों का मेला सजता है। भगवान भोले के भक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाकर जलाभिषेक कर मंदिर में नतमस्तक होते हैं। कई दिन पहले से प्रांगण में भजन-कीर्तन और शिव के भजनों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो जाता है ।
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पूरी होती है हर मन्नत
बुजुर्ग बताते हैं कि यहां भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के साथ मांगी गई हर मन्नत भगवान भोले नाथ पूरी करते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए आते हैं।
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- हर साल श्रावण मास की शिवरात्रि पर लगता है विशाल मेला
- कथा है कि ऋषि जमदग्नि ने की थी एतिहासिक मंदिर की स्थापना
संवाद न्यूज एजेंसी
भौराकलां। अटाली और चरौली गांव के बीच प्राचीन शिव मंदिर अटूट श्रद्घा और विश्वास का केंद्र है। दूरदराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु सिद्घपीठ प्राचीन शिवलिंग पर जलाभिषेक करते हैं।
मुजफ्फरनगर-शामली मार्ग पर धौलरा बस स्टैंड से मंदिर का मुख्य मार्ग जाता है। अटाली और चरौली गांव में स्थित मंदिर की इतिहास निराला है। मंदिर कमेटी के संचालक सावटू निवासी मुकेश बंसल बताते हैं कि सिद्ध पीठ मंदिर की स्थापना पुरातन काल में भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि ने की थी। पूर्वज बताते थे कि मंदिर के स्थान पर भगवान भोलेनाथ प्रकट हुए थे। वर्तमान में मंदिर प्रांगण में महावीर हनुमान, भगवान गणेश, माता लक्ष्मी सहित देवी देवताओं की दिव्य मूर्ति स्थापित है। मंदिर प्रांगण में भोले के भक्तों को असीम श्रद्धा और भक्ति भाव की अनुभूति होती है।
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शिवरात्रि पर लगता है शिवभक्तों का मेला
भौराकलां क्षेत्र के अटाली-चरौली में स्थित शिवालय की क्षेत्र में विशेष मान्यता है। श्रावण मास की शिवरात्रि को यहां भारी तादात में भोले के भक्तों का मेला सजता है। भगवान भोले के भक्त हरिद्वार से पवित्र गंगाजल लाकर जलाभिषेक कर मंदिर में नतमस्तक होते हैं। कई दिन पहले से प्रांगण में भजन-कीर्तन और शिव के भजनों से पूरा क्षेत्र शिवमय हो जाता है ।
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पूरी होती है हर मन्नत
बुजुर्ग बताते हैं कि यहां भक्ति, श्रद्धा और विश्वास के साथ मांगी गई हर मन्नत भगवान भोले नाथ पूरी करते हैं। प्रत्येक सोमवार को यहां श्रद्धालु शिवलिंग पर जलाभिषेक के लिए आते हैं।