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उद्धार के लिए गंगा को भगीरथ की तलाश, 73 सालों से कागजों में दिख रहे हैं प्रयास
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 13 Aug 2017 01:10 AM IST
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शुक्रताल का गंगा घाट।
- फोटो : अमर उजाला
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पौराणिक तीर्थ शुक्रताल में गंगा उपेक्षा का दंश झेल रही है। उत्तराखंड की मुख्य गंगा से निरंतर गंगा जल का प्रवाह नहीं है। औद्योगिक फैक्ट्रियों से प्रदूषित पानी छोड़ने पर अंकुश नहीं लग पाया है। श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा भक्ति की वजह से हर साल कार्तिक पूर्णिमा, गंगा दशहरा आदि मुख्य स्नान पर मुख्य धारा से गंगाजल छोड़कर धार्मिक नगरी के अस्तित्व को बचाने की कोशिश की जा रही है।
शुकतीर्थ श्रीमद्भागवत की जन्म स्थली है। पौराणिक मान्यता है कि व्यास नंदन श्री शुकदेव मुनि के श्रीमुख से भागवत कथा की अमृतवाणी सुनकर हस्तिनापुर नरेश राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। देशभर से प्रतिवर्ष भागवत भक्त कथा प्रवास के लिए धार्मिक नजरी पहुंचते हैं। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा सहित पांच गंगा स्नान मेले लगते हैं। उत्तराखंड पृथक राज्य बनने के बाद शुक्रताल यूपी का पश्चिम में पहला तीर्थ स्थान है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना में शुकतीर्थ को जोड़ा गया है।
वर्ष 1944 में वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने शुकतीर्थ का जीर्णोद्धार प्रारंभ किया था। महान संत ने शुक्रताल की आध्यात्मिक तपोभूमि को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। कथा मर्मज्ञ, कथा व्यास भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम स्थित वटवृक्ष की छांव में श्रीमद्भागवत कथा पाठ कर आत्मिक शांति पाते हैं। गंगा तट पर निर्मल और स्वच्छ गंगाजल की कमी श्रद्धालुओं को खलती है। बीते कई साल से उत्तराखंड की औद्योगिक फैक्ट्रियों से कैमिकल युक्त जल गंगा में छोड़ा जा रहा है, जिससे मछली और अन्य जीव-जंतु मर रहे हैं। साधु-संत विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। जुलाई माह में दोषी फैक्ट्रियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
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उत्तराखंड की एक फैक्ट्री भी सील की गई है। कारगिल शहीद स्मारक और मुरारी बापू की श्रीराम कुटी से नक्षत्र वाटिका तक गंगा घाट को संवारने की जरुरत है। श्री शुकदेव सेतू से जुडे गंगा किनारे पर कूड़े-कचरे के ढेर पड़े हैं। हालांकि एमडीए ने घाट पर सौंदर्यीकरण के लिए विकास कार्य कराए मगर सरकार का तीर्थ के विकास के लिए कोई विशेष बजट नहीं है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दो करोड़ का बजट आवंटित कर गंगा धारा की खुदाई के निर्देश दिए थे। सिंचाई विभाग ने काम प्रारंभ किया। उत्तराखंड की सीमा में बसे गांवों के लोगों ने बाढ़ के समय जलमग्न होने की आशंका में जेसीबी मशीनें तोड़ दी। नमामि गंगे योजना शुकतीर्थ की तस्वीर बदल सकती है। गंगा की धारा का प्रवाह मिलने के बाद श्रद्धालुओं में तीर्थ का आकर्षण बढ़ेगा।
जागृति यात्रा से आएगी चेतना: ओमानंद
शुक्रताल। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि नमामि गंगे जागृति यात्रा से जनमानस में चेतना आएगी। ऐतिहासिक महाभारतकालीन शुकतीर्थ के विकास के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को प्रस्तावों का प्रारूप दिया गया है, जिसमें सीएम ने रुचि दिखाई है। धर्मार्थ मंत्रालय और पर्यटन विभाग को शुक्रताल में विकास योजना की जिम्मेदारी दी गई है। गंगा में शुद्ध जल की कमी से धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं की भावना आहत होती हैं। ऐसे में गंगा का निर्बाद्ध प्रवाह होना चाहिए।
आज गन्ना मंत्री करेंगे यात्रा का शुभारंभ
शुक्रताल। प्रदेश में गंगा नदी के तटवर्ती 25 जिलों में नौ अगस्त को प्रारंभ हुई नमामि गंगे जागृति यात्रा रविवार को शुक्रताल पहुंचेगी। हरिद्वार और बिजनौर के बाद शुक्रताल में योगी सरकार के प्रतिनिधि गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री सुरेश राणा मुख्य अतिथि रहेंगे। जिला होमगार्ड कमांडेंट विजय कुमार ने बताया कि गंगा की निर्मलता, अविरलता और संरक्षण के लिए शुकतीर्थ में जागृति यात्रा निकलेगी। नमामि गंगे की मूल भावना से जुडे नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। जाट धर्मशाला में सभा होगी। तीर्थ के संत महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में निर्मल गंगा का संकल्प लिया जाएगा।
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शुकतीर्थ श्रीमद्भागवत की जन्म स्थली है। पौराणिक मान्यता है कि व्यास नंदन श्री शुकदेव मुनि के श्रीमुख से भागवत कथा की अमृतवाणी सुनकर हस्तिनापुर नरेश राजा परीक्षित को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। देशभर से प्रतिवर्ष भागवत भक्त कथा प्रवास के लिए धार्मिक नजरी पहुंचते हैं। हर वर्ष कार्तिक पूर्णिमा सहित पांच गंगा स्नान मेले लगते हैं। उत्तराखंड पृथक राज्य बनने के बाद शुक्रताल यूपी का पश्चिम में पहला तीर्थ स्थान है। केंद्र सरकार की नमामि गंगे योजना में शुकतीर्थ को जोड़ा गया है।
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वर्ष 1944 में वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने शुकतीर्थ का जीर्णोद्धार प्रारंभ किया था। महान संत ने शुक्रताल की आध्यात्मिक तपोभूमि को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी। कथा मर्मज्ञ, कथा व्यास भागवत पीठ श्रीशुकदेव आश्रम स्थित वटवृक्ष की छांव में श्रीमद्भागवत कथा पाठ कर आत्मिक शांति पाते हैं। गंगा तट पर निर्मल और स्वच्छ गंगाजल की कमी श्रद्धालुओं को खलती है। बीते कई साल से उत्तराखंड की औद्योगिक फैक्ट्रियों से कैमिकल युक्त जल गंगा में छोड़ा जा रहा है, जिससे मछली और अन्य जीव-जंतु मर रहे हैं। साधु-संत विरोध-प्रदर्शन कर चुके हैं। जुलाई माह में दोषी फैक्ट्रियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
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उत्तराखंड की एक फैक्ट्री भी सील की गई है। कारगिल शहीद स्मारक और मुरारी बापू की श्रीराम कुटी से नक्षत्र वाटिका तक गंगा घाट को संवारने की जरुरत है। श्री शुकदेव सेतू से जुडे गंगा किनारे पर कूड़े-कचरे के ढेर पड़े हैं। हालांकि एमडीए ने घाट पर सौंदर्यीकरण के लिए विकास कार्य कराए मगर सरकार का तीर्थ के विकास के लिए कोई विशेष बजट नहीं है।
तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने दो करोड़ का बजट आवंटित कर गंगा धारा की खुदाई के निर्देश दिए थे। सिंचाई विभाग ने काम प्रारंभ किया। उत्तराखंड की सीमा में बसे गांवों के लोगों ने बाढ़ के समय जलमग्न होने की आशंका में जेसीबी मशीनें तोड़ दी। नमामि गंगे योजना शुकतीर्थ की तस्वीर बदल सकती है। गंगा की धारा का प्रवाह मिलने के बाद श्रद्धालुओं में तीर्थ का आकर्षण बढ़ेगा।
जागृति यात्रा से आएगी चेतना: ओमानंद
शुक्रताल। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि नमामि गंगे जागृति यात्रा से जनमानस में चेतना आएगी। ऐतिहासिक महाभारतकालीन शुकतीर्थ के विकास के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ को प्रस्तावों का प्रारूप दिया गया है, जिसमें सीएम ने रुचि दिखाई है। धर्मार्थ मंत्रालय और पर्यटन विभाग को शुक्रताल में विकास योजना की जिम्मेदारी दी गई है। गंगा में शुद्ध जल की कमी से धार्मिक नगरी में आने वाले श्रद्धालुओं की भावना आहत होती हैं। ऐसे में गंगा का निर्बाद्ध प्रवाह होना चाहिए।
आज गन्ना मंत्री करेंगे यात्रा का शुभारंभ
शुक्रताल। प्रदेश में गंगा नदी के तटवर्ती 25 जिलों में नौ अगस्त को प्रारंभ हुई नमामि गंगे जागृति यात्रा रविवार को शुक्रताल पहुंचेगी। हरिद्वार और बिजनौर के बाद शुक्रताल में योगी सरकार के प्रतिनिधि गन्ना एवं चीनी मिल मंत्री सुरेश राणा मुख्य अतिथि रहेंगे। जिला होमगार्ड कमांडेंट विजय कुमार ने बताया कि गंगा की निर्मलता, अविरलता और संरक्षण के लिए शुकतीर्थ में जागृति यात्रा निकलेगी। नमामि गंगे की मूल भावना से जुडे नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किए जाएंगे। जाट धर्मशाला में सभा होगी। तीर्थ के संत महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति में निर्मल गंगा का संकल्प लिया जाएगा।