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Muzaffarnagar News: किसान सालिम की अपहरण के बाद हत्या में शाहनवाज को मृत्युदंड

Thu, 13 Aug 2026 01:23 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 01:23 AM IST
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Shahnawaz sentenced to death for kidnapping and murder of farmer Salim
मुजफ्फरनगर। छपार थाना क्षेत्र के तेजलहेड़ा गांव से 26 साल पहले पांच लाख रुपये की फिरौती के लिए किसान सालिम (53) की छुरी से गर्दन काटकर हत्या के मामले में दोषी शाहनवाज को मृत्युदंड की सजा सुनाई गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाया। मुजफ्फरनगर और रुड़की के जंगल में 48 दिन अपहरण, फिरौती और हत्या का घटनाक्रम चला था। पिछले 17 साल से जेल में बंद शाहनवाज को हत्या, अपहरण और गैंगस्टर के तीन मामलों में पहले सजा हो चुकी है।
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वारदात नौ दिसंबर 1999 की रात आठ बजे हुई थी। ट्रैक्टर चालक हारुण अपने साथी आबाद और मुकर्रम के साथ ट्रॉली में पॉपलर की लकड़ियां लादकर हरियाणा के यमुनानगर बेचने के लिए निकले थे। रजबहा पटरी पर पहुंचते ही तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। आबाद किसी तरह बचकर भाग निकला लेकिन हारुण और मुकर्रम का अपहरण कर लिया गया था।
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दो दिन बाद किसी तरह मुकर्रम भी बदमाशों के चंगुल से भाग आया था। हारुण के पिता किसान सालिम को पांच लाख रुपये की फिरौती के लिए चिट्ठी भेजी गई। आबाद ने छपार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई।
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मामले में नया मोड़ 19 जनवरी 2000 को आया। सालिम अपने परिवार के इलियास के साथ लक्सर क्षेत्र के सुल्तानपुर गांव के जंगल में पहुंच गया। यहां बदमाशों ने उसकी मुलाकात बेटे हारुण से कराई। बातचीत के बाद फिरौती का इंतजाम करने के लिए हारुण को छोड़ दिया और सालिम एवं इलियास को अपहरण कर बैठा लिया।
समय पर रुपयों का इंतजाम नहीं हुआ। इसके अलावा 24 जनवरी को तेजलहेड़ा के ग्रामीणों ने सुल्तानपुर का जंगल घेरकर खुद तलाश शुरू की। 25 जनवरी 2000 को सालिम की छुरी से गर्दन काटकर हत्या कर शव को जंगल में फेंक दिया गया था।
करीब 25 दिन बाद 50 हजार रुपये की फिरौती वसूलकर इलियास को छोड़ा गया था। पुलिस जांच में बरला गांव के सगे भाई शाहनवाज व शौकीन के अलावा कस्बा भोकरहेड़ी के अहसान का नाम प्रकाश में आया। गैंग का मुखिया शौकीन और अहसान पुलिस मुठभेड़ में मारे गए थे। अदालत में शाहनवाज के खिलाफ ट्रायल चला। पांच अगस्त को अभियुक्त पर दोष सिद्ध किया था।
बुधवार को अपराध को विरल से विरलतम मानते हुए हत्या में फांसी की सजा और कुल 1.10 लाख रुपये अर्थदंड लगाया गया।
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खूनी शाहनवाज : 11 साल में 26 केस, चार सजा
मुजफ्फरनगर। छपार के बरला गांव का सजायाफ्ता शाहनवाज खूंखार अपराधी है। वर्ष 1998 में डकैती की पहली प्राथमिकी दर्ज हुई। वर्ष 2009 तक 26 केस दर्ज हुए, जिनमें हत्या के पांच, लूट, डकैती, जानलेवा हमले और गैंगस्टर के मामले हैं। अपने भाई शौकीन के साथ मिलकर दहशत फैला दी थी। ब्यूरो
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किसी की सांसें कोई सौदे की वस्तु नहीं : न्यायाधीश
न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि लालच इंसान की आंखों पर पर्दा डाल देता है। वह भूल जाता है कि किसी की सांसें कोई सौदे की वस्तु नहीं है। फिरौती के लिए किया अपहरण और उसके बाद सालिम की हत्या, मानवता के विरुद्ध ऐसा अपराध है, जिसकी प्रतिध्वनि केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरे समाज को झकझोर देती है।
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आम आदमी और तारीख पे जस्टिस
अदालत ने 46 पेज के फैसले में प्रशांत रेड्डी टी. और चित्राक्षी जैन की ओर से लिखी पुस्तक तारीख पे जस्टिस का हवाला दिया। जिला अदालतों में देरी से आने वाले फैसलों पर भी चिंता जताई। लिखा कि न्यायालय में 26 साल मुकदमा चलना न्यायिक व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। कहावत भी है कि न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है। आम आदमी का संबंध जिला अदालतों से होता है।

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जेल अधीक्षक के गुलाम नहीं एडीजीसी
अदालत ने शाहनवाज का आपराधिक इतिहास सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराने पर एसओ छपार मोहित चौधरी और जेल अधीक्षक अभिषेक चौधरी को 20 अगस्त तक नोटिस जारी कर तलब किया है। जेल अधीक्षक ने मौखिक रूप से सहायक शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार से लेटर भिजवाने के लिए कहा था। अदालत ने कहा कि एडजीसी राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करते हैं, वह जेल अधीक्षक के गुलाम नहीं है। एडीजी मेरठ जोन को भी पत्र भेजा गया।
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