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चेयरपर्सन और सभासदों की अदावत में फंस न जाएं प्रस्ताव
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पालिका की बैठक पर पड़ा विवादों की साया
मुजफ्फरनगर। विवादों में घिरी नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर में एक और नया विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड बैठक में चेयरपर्सन का आना, कार्रवाई रजिस्टर में उनके द्वारा बैठक स्थगित करने का उल्लेख और फिर उन्हें अनुपस्थित दर्शाकर बोर्ड बैठक संपन्न करना विवाद को बढ़ावा दे रहा है। चेयरपर्सन और सभासदों की इस अदावत का शिकार बोर्ड बैठक में हुए निर्णय बन सकते हैं, जिसका नुकसान शहर के लोगों को होगा। माना जा रहा है कि अब यह मामला मंडलायुक्त तक जाएगा और वही बैठक के संबंध में अंतिम निर्णय लेंगे।
सत्ता और विपक्ष की उठापटक में नगर पालिका विवादों का केंद्र बन गई है। शनिवार को चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल की गैर मौजूदगी में सभासदों ने बैठक कर प्रस्ताव पास किए गए। जानकारों का कहना है कि चेयरपर्सन की गैर मौजूदगी में सभासद अस्थायी अध्यक्ष चुनकर बैठक की कार्रवाई पूरी कर सकते हैं। सवाल यह है कि चेयरपर्सन तो बैठक में आईं थीं। उन्होंने बैठक के स्थगित होने की घोषणा भी की, जिसका उल्लेख कार्रवाई रजिस्टर में भी है। इसके बाद चेयरपर्सन को अनुपस्थित दर्शाकर बैठक की गई है। ईओ का कहना है कि चेयरपर्सन के सभागार से जाने से पूर्व बैठक शुरू हो चुकी थी। सभासदों ने उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर दिए थे और कोरम पूरा था। यदि चेयरपर्सन बैठक शुरू होने से पूर्व नोटिस जारी कर बैठक स्थगित करने की घोषणा करतीं, तो बैठक नहीं हो सकती थी। चेयरपर्सन ने उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर भी नहीं किए। बोर्ड बैठक नियमानुसार संपन्न हुई है। उधर, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने भी मंडलायुक्त सहारनपुर के समक्ष यह मामला रखने की बात कही है।
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मुजफ्फरनगर। विवादों में घिरी नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर में एक और नया विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड बैठक में चेयरपर्सन का आना, कार्रवाई रजिस्टर में उनके द्वारा बैठक स्थगित करने का उल्लेख और फिर उन्हें अनुपस्थित दर्शाकर बोर्ड बैठक संपन्न करना विवाद को बढ़ावा दे रहा है। चेयरपर्सन और सभासदों की इस अदावत का शिकार बोर्ड बैठक में हुए निर्णय बन सकते हैं, जिसका नुकसान शहर के लोगों को होगा। माना जा रहा है कि अब यह मामला मंडलायुक्त तक जाएगा और वही बैठक के संबंध में अंतिम निर्णय लेंगे।
सत्ता और विपक्ष की उठापटक में नगर पालिका विवादों का केंद्र बन गई है। शनिवार को चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल की गैर मौजूदगी में सभासदों ने बैठक कर प्रस्ताव पास किए गए। जानकारों का कहना है कि चेयरपर्सन की गैर मौजूदगी में सभासद अस्थायी अध्यक्ष चुनकर बैठक की कार्रवाई पूरी कर सकते हैं। सवाल यह है कि चेयरपर्सन तो बैठक में आईं थीं। उन्होंने बैठक के स्थगित होने की घोषणा भी की, जिसका उल्लेख कार्रवाई रजिस्टर में भी है। इसके बाद चेयरपर्सन को अनुपस्थित दर्शाकर बैठक की गई है। ईओ का कहना है कि चेयरपर्सन के सभागार से जाने से पूर्व बैठक शुरू हो चुकी थी। सभासदों ने उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर कर दिए थे और कोरम पूरा था। यदि चेयरपर्सन बैठक शुरू होने से पूर्व नोटिस जारी कर बैठक स्थगित करने की घोषणा करतीं, तो बैठक नहीं हो सकती थी। चेयरपर्सन ने उपस्थिति रजिस्टर में हस्ताक्षर भी नहीं किए। बोर्ड बैठक नियमानुसार संपन्न हुई है। उधर, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने भी मंडलायुक्त सहारनपुर के समक्ष यह मामला रखने की बात कही है।
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