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कौन थे वरिष्ठ साहित्यकार सेवाराम: हमेशा रहेंगे प्रेरणा स्त्रोत, पढ़ें- शिक्षा से उपलब्धि तक के बारे में सबकुछ

Sat, 18 Nov 2023 03:35 PM IST
कपिल kapil संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Sat, 18 Nov 2023 03:35 PM IST
सार

Muzaffarnagar News : डॉ. बीके मिश्रा बताते हैं कि साहित्य जगत का सितारा चला गया। वाणी के कार्यक्रम में युवाओं को उन्हेांने नई उर्जा देने का कार्य किया था।

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Senior litterateur Sevaram Yatri passes away and read everything about him
सेवाराम यात्री - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वरिष्ठ साहित्यकार सेवाराम यात्री (91) के निधन से साहित्य जगत में शोक छा गया। उनका मूल गांव जड़ौदा है। शिक्षा खुर्जा में हुई और अंतिम दिन गाजियाबाद में गुजरे। वर्ष 1971 में कथा संग्रह दूसरे चेहरे से साहित्य यात्रा शुरू की। आधी शताब्दी तक शिक्षा और साहित्य क्षेत्र को समृद्ध करते रहे। उन्हें इसी साल दीपशिखा सम्मान दिया जाना था।

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उनके नजदीकी लोगों में शामिल रहे डॉ. बीके मिश्रा बताते हैं कि साहित्य जगत का सितारा चला गया। वाणी के कार्यक्रम में युवाओं को उन्हेांने नई उर्जा देने का कार्य किया था। साहित्यकार डॉ. पुष्पलता ने कहा कि उनकी यात्री से मुलाकात साहित्यिक संस्था वाणी के कार्यक्रम में हुई थी। वह साहित्यकारों के लिए प्रेरणा पुंज रहे। साहित्य जगत में दिया गया उनका योगदान हमेशा लोगों को याद रहेगा।

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साहित्यकार रोहित कौशिक ने बताया कि सेवाराम यात्री का जनपद से गहरा लगाव रहा। नौकरी के सिलसिले में जिले से बाहर रहने के बावजूद वह वाणी के कार्यक्रमों में कई बार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल रहे और युवाओं को बढ़ावा दिया। साहित्यकार मनु स्वामी ने कहा कि परिवार के जनपद से जुड़ा होने के कारण उनका यहां के लोगों से हमेशा विशेष स्नेह रहा। वह हमेशा प्रेरणा स्रोत रहेंगे।

इस तरह चलती रही साहित्य-शिक्षा की यात्रा
आगरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान और हिंदी साहित्य में एमए किया। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर महाविद्यालय में शिक्षक बनें। गाजियाबाद और खुर्जा के कॉलेजों में हिंदी प्रवक्ता रहे और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से राइटर-इन-रेजीडेंस के पद से सेवानिवृत हुए।

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ये रहे प्रमुख उपन्यास
दराजों में बंद दस्तावेज, लौटते हुए, कई अंधेरो के पार, अपरिचित शेष, चांदनी के आरपार, बीच की दरार, टूटते दायरे, चादर के बाहर, प्यासी नदी, भटका मेघ, आकाशचारी, आत्मदाह, बावजूद, अंतहीन, प्रथम परिचय, जली रस्सी समेत अन्य उपन्यास लिखे।

इन कहानियों की रचना की
केवल पिता, धरातल, टापू पर अकेले, दूसरे चेहरे, सिलसिला, खंडित संवाद, नया संबंध, भूख, अभयदान, पुल टूटते हुए, विरोधी स्वर।

यह मिले थे सम्मान
साहित्य श्री, साहित्य भूषण, महात्मा गांधी साहित्य सम्मान।

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कहानी, आदमी कहां है...का अंश
आप निराश न हों, ऐसी बीहड़ परिस्थितियां जीवन में अनेक बार आती हैं। आखिर हम किस दिन के लिए हैं। आप निःसंकोच हो कर बतलाइए कि आपका काम कितने में चल सकता है। खन्ना जी ने चेहरे पर बड़प्पन का भाव लाते हुए कहा, उनकी दिलासा से वह इतना कृतज्ञ हो आया कि उसके कंधे झुक गए और चेहरे की मांसपेशियां आवेश में कांपने लगीं। सांत्वना और सहानुभूति से आदमी कितना दब जाता है!

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