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कर विभाग के पांच अफसरों का वेतन रोका
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कर विभाग के पांच अफसरों का वेतन रोका
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका का कर विभाग पालिका को ही चपत लगा रहा है। चार साल से शहर के छह हजार घरों पर टैक्स का निर्धारण ही नहीं किया गया। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कर निर्धारण अधिकारी, कर एवं राजस्व अधीक्षक और राजस्व निरीक्षक का सितंबर माह का वेतन रोक दिया है। पांचों से जवाब-तलब किया गया है।
नगर पालिका इस समय शहर में 76205 लोगों से ही हाउस टैक्स वसूल रही है। पालिका ने वर्ष 2016 में सहारनपुर की रिलायंस इंजीनियर्स कंपनी से सर्वे कराया था। इस सर्वे में सामने आया था कि शहर में 82 हजार मकान है। इन मकानों की सूची भी सर्वे में जारी की गई थी। चार साल पहले सर्वे की रिपोर्ट जारी होने के बाद भी शहर के बाकी छह हजार लोगों को हाउस टैक्स जारी नहीं किया गया। चार साल से ये लोग बिना हाउस टैक्स के ही रह रहे हैं। हाउस टैक्स की समीक्षा के दौरान चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने कर विभाग के अधिकारियों से पूछा कि उन्होंने शहर के हाउस टैक्स देने वालों की कितनी संख्या बढ़ाई। पता चला कि जो संख्या चार साल पहले थी अभी भी लगभग वही चल रही है। जो छह हजार लोग सर्वे में बढे़ थे उन्हें भी हाउस टैक्स की रसीद जारी नहीं की गई। प्रत्येक वर्ष पालिका को सीधे लाखों का नुकसान किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने पालिका के कर निर्धारण अधिकारी अरुण कुमार, कर एवं राजस्व अधीक्षक आरडी पोरवाल, राजस्व निरीक्षण अमित कुमार, अमरजीत सिंह, विजय कुमार का सितंबर माह का वेतन रोक दिया है। सभी पांचों से जवाब तलब किया गया है। 19 अक्तूबर को इस संबंध में लिखित में आदेश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने आदेशों का पालन ही नहीं किया। पांचों से स्पष्टीकरण मांगते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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मुजफ्फरनगर। नगर पालिका का कर विभाग पालिका को ही चपत लगा रहा है। चार साल से शहर के छह हजार घरों पर टैक्स का निर्धारण ही नहीं किया गया। चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कर निर्धारण अधिकारी, कर एवं राजस्व अधीक्षक और राजस्व निरीक्षक का सितंबर माह का वेतन रोक दिया है। पांचों से जवाब-तलब किया गया है।
नगर पालिका इस समय शहर में 76205 लोगों से ही हाउस टैक्स वसूल रही है। पालिका ने वर्ष 2016 में सहारनपुर की रिलायंस इंजीनियर्स कंपनी से सर्वे कराया था। इस सर्वे में सामने आया था कि शहर में 82 हजार मकान है। इन मकानों की सूची भी सर्वे में जारी की गई थी। चार साल पहले सर्वे की रिपोर्ट जारी होने के बाद भी शहर के बाकी छह हजार लोगों को हाउस टैक्स जारी नहीं किया गया। चार साल से ये लोग बिना हाउस टैक्स के ही रह रहे हैं। हाउस टैक्स की समीक्षा के दौरान चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने कर विभाग के अधिकारियों से पूछा कि उन्होंने शहर के हाउस टैक्स देने वालों की कितनी संख्या बढ़ाई। पता चला कि जो संख्या चार साल पहले थी अभी भी लगभग वही चल रही है। जो छह हजार लोग सर्वे में बढे़ थे उन्हें भी हाउस टैक्स की रसीद जारी नहीं की गई। प्रत्येक वर्ष पालिका को सीधे लाखों का नुकसान किया जा रहा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल ने पालिका के कर निर्धारण अधिकारी अरुण कुमार, कर एवं राजस्व अधीक्षक आरडी पोरवाल, राजस्व निरीक्षण अमित कुमार, अमरजीत सिंह, विजय कुमार का सितंबर माह का वेतन रोक दिया है। सभी पांचों से जवाब तलब किया गया है। 19 अक्तूबर को इस संबंध में लिखित में आदेश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने आदेशों का पालन ही नहीं किया। पांचों से स्पष्टीकरण मांगते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
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