मोरना। शुकदेव आश्रम में वृंदावन से पधारे भागवत कथा व्यास स्वामी हनुमान महाराज ने कहा कि संत विषयानंद नहीं देते हैं, संत भजनानंद देते हैं। इससे पूर्व भागवत कथा के शुभारंभ पर कलश यात्रा का आयोजन किया गया।
शुकदेव आश्रम के प्रतीक्षानंद भवन में आयोजित साप्ताहिक भागवत कथा में हनुमान महाराज ने कहा कि यह शरीर जड़ है और आत्मा चेतन है। भक्ति करने से जड़-चेतन की गांठ छूट जाती है। जीवात्मा ज्ञान का अधिकारी होती है, मानव का स्वभाव है कि अपने आपको निर्दोष समझने लगता है। पाप के लिए मानव को पश्चाताप नहीं होता। पाप को कभी साधारण मत समझो, साधारण सा पाप भी मन को बहुत बिगाड़ता है। कर्मयोगी ही प्रभु प्रेमी होता है। किंतु कर्म मार्ग में भी दोष है, सतकर्म करने से अभिमान बढ़ता है। दिनभर सतकर्म करो पर ऐसा मानो कि यह सब भगवान की कृपा है। अभिमान सतकर्म का पतन करता है, प्रेम से कर्म और ज्ञान सफल होते हैं। जीव का अधिकारी जब बनता है, वह जब बार-बार भगवान को वंदन करें। कथा के शुभारंभ पर मुख्य आयोजक रिटायर्ड डीएसपी चौधरी वीरेंद्र सिंह अथाई, सुदेश, संजीव मलिक, इरा, नीरज, शिप्रा, डॉ. अजय, डॉ. श्वेता चौधरी आदि ने कथा व्यास को तिलक कर माल्यार्पण कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

शुकदेव आश्रम में भागवत कथा व्यास गददी का पूजन करते कथा आयोजक।- फोटो : KHATAULI