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रमजान माह की सबसे अहम इबादत है रोजा : फारुकी
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मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी
- फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। रहमत और बरकतों वाला रमजान का महीना शुरू हो चुका है। इस माह में अल्लाह का पवित्र कलाम कुरआन-ए-करीम आसमान से जमीन पर नाजिल हुआ। इस माह में अल्लाह अपने बंदों पर रहमत और बरकतों की बारिश करता है। इसलिए इस माह की इस्लाम धर्म में बहुत ज्यादा अहमियत है।
रमजान के रोजे रखने को लेकर फतवा आनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि रमजान महीने का रोजा मजहब-ए- इस्लाम का अहम रुक्न (भाग) है। नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद साहब की हदीस है कि जिसने रमजान के रोजे सिर्फ अल्लाह के लिए समझ कर रखे तो उसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे। उन्होेंने यह भी फरमाया कि रोजेदार के मुंह की बू अल्लाह के नजदीक मुश्क खुश्बू से भी ज्यादा प्यारी है। मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि रोजा रमजान की सबसे अहम इबादत है। रोजे का अरबी मायने सौम, और सौम के मायने होते हैं रुकना। सुबह से लेकर सूरज डूबने तक खाने पीने से रुकने को सौम कहते हैं। यदि किसी ने सुबह के बाद भी कुछ खा पी लिया या फिर सूरज डूबने से एक मिनट पहले कुछ खा या पी लिया तो उसका रोजा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि रमजान के सारे रोजा रखना मुसलमान मर्द, औरत, अकलमंद और बालिग पर फर्ज है। जो शख्स किसी शरई वजह के बिना रोजे नहीं रखेगा तो वह सख्त गुनाहगार होगा।
चांद देखने के साथ ही मस्जिदों और घरों में शुरू हुई तरावीह
देवबंद। रमजान माह का चांद दिखाई देने के साथ ही मस्जिदों और घरों में तरावीह पढ़ने का सिलसिला भी शुरू हो गया। कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन को लेकर लोग मास्क और दो गज की दूरी का विशेष ध्यान रख रहे हैं। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी सहित अन्य उलमा गाइडलाइन का पालन करने को लेकर अपील भी जारी कर चुके हैं।
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रमजान के रोजे रखने को लेकर फतवा आनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि रमजान महीने का रोजा मजहब-ए- इस्लाम का अहम रुक्न (भाग) है। नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद साहब की हदीस है कि जिसने रमजान के रोजे सिर्फ अल्लाह के लिए समझ कर रखे तो उसके गुनाह बख्श दिए जाएंगे। उन्होेंने यह भी फरमाया कि रोजेदार के मुंह की बू अल्लाह के नजदीक मुश्क खुश्बू से भी ज्यादा प्यारी है। मुफ्ती अरशद फारुकी ने कहा कि रोजा रमजान की सबसे अहम इबादत है। रोजे का अरबी मायने सौम, और सौम के मायने होते हैं रुकना। सुबह से लेकर सूरज डूबने तक खाने पीने से रुकने को सौम कहते हैं। यदि किसी ने सुबह के बाद भी कुछ खा पी लिया या फिर सूरज डूबने से एक मिनट पहले कुछ खा या पी लिया तो उसका रोजा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि रमजान के सारे रोजा रखना मुसलमान मर्द, औरत, अकलमंद और बालिग पर फर्ज है। जो शख्स किसी शरई वजह के बिना रोजे नहीं रखेगा तो वह सख्त गुनाहगार होगा।
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चांद देखने के साथ ही मस्जिदों और घरों में शुरू हुई तरावीह
देवबंद। रमजान माह का चांद दिखाई देने के साथ ही मस्जिदों और घरों में तरावीह पढ़ने का सिलसिला भी शुरू हो गया। कोरोना वायरस को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइन को लेकर लोग मास्क और दो गज की दूरी का विशेष ध्यान रख रहे हैं। दारुल उलूम के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी सहित अन्य उलमा गाइडलाइन का पालन करने को लेकर अपील भी जारी कर चुके हैं।
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