{"_id":"6101a02a8ebc3e39604d586e","slug":"roads-worth-50-crores-built-in-villages-without-proposal-muzaffarnagar-news-mrt549472820","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना प्रस्ताव के गांवों में बना दी 50 करोड़ की सड़कें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना प्रस्ताव के गांवों में बना दी 50 करोड़ की सड़कें
विज्ञापन
बिना प्रस्ताव के गांवों में बना दी 50 करोड़ की सड़कें
मुजफ्फरनगर। जिले की 498 ग्राम पंचायतों में पांच माह के कार्यकाल में प्रशासकों और पंचायत सचिवों ने 100 करोड़ से अधिक के काम दिखाकर भुगतान कर डाला। गांवों में बिना पंचायत के प्रस्ताव के कर्मचारियों और अधिकारियों ने 50 करोड़ से अधिक की सड़कें बना डाली। शासन ने 25 लाख से अधिक का भुगतान वाले 46 गांवों में जांच के आदेश दिए हैं। जिला स्तर पर गठित कमेटी जांच कर रही है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 25 दिसंबर की रात्रि में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए गए थे। चार ब्लाकों में एडीओ पंचायत, तीन ब्लॉकों में एडीओ आईएसबी, एक ब्लाक में एडीओ कृषि रक्षा और एक में एडीओ सहकारिता पर प्रशासक का चार्ज रहा। 12 जून को यह चार्ज फिर प्रधानों के पास चला गया। इस बीच जिले में पंचायत सचिवों और प्रशासकों ने ग्राम पंचायतों के खजाने खाली कर दिए। अधिकतम कार्य और भुगतान एक जनवरी 2021 से 30 जून तक के बीच हुए। अफसरों की शह पर गांवों में 100 करोड़ के कार्य दिखाकर उनका भुगतान भी कर दिया गया। बड़ी बात यह है कि गांवों की सड़कें जो ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के बाद बनती है, प्रशासकों ने अपनी मर्जी से बनवा डाली। यह सभी प्रक्रिया बिना टेंडर और बिना किसी आदेश के पूरी कर दी गई। शासन ने प्रशासकों को केवल जरूरी कार्यों के लिए धन खर्च करने की अनुमति दी थी। इसका सिस्टम ने पूरा लाभ उठाया। प्रधानों पर चार्ज आने के बाद जब गांवों के खजाने खाली मिले, तो शासन में शिकायतें होनी शुरू हुई। शासन ने पूरे प्रदेश के उन गांवों की जांच बैठा दी है, जिनमें 25 लाख से अधिक भुगतान किया गया है। शासन के इस आदेश के बाद जिले की 46 ग्राम पंचायतें जांच के दायरे में आ गई हैं। जो छोटे गांव हैं और जिनमें समस्त खजाना खाली कर दिया गया है। वह जांच के दायरे में नहीं आए हैं। सीडीओ आलोक यादव ने बताया कि जिला स्तर के अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी गई है। सीडीओ का कहना है कि स्कूलों में कायाकल्प योजना में और शौचालय निर्माण के काम की अनुमति थी।
नहीं छूट रहा सचिव के पद का मोह
ग्राम पंचायत सरवट के पंचायत सचिव का दो माह पूर्व एडीओ के पद पर प्रमोशन हो गया था, लेकिन सचिव ने आज तक प्रमोशन के पद पर ज्वाइन नहीं किया। 21 जून में भी उन्होंने भुगतान किया है। सचिव के पद पर मिलने वाला लाभ उन्हें प्रमोशन के पद पर ज्वाइन करने से रोक रहा है।
विज्ञापन
30 से 50 प्रतिशत तक के कमीशन का खेल
मुजफ्फरनगर। ग्राम पंचायतों में समस्त कार्य सीधे कराए जाते हैं। टेंडर आदि की कोई प्रक्रिया नहीं होती है। सूत्रों की माने तो ग्राम पंचायतों में 30 से 50 प्रतिशत तक के कमीशन का खेल है। 100 करोड़ के भुगतान के पीछे यह कमीशन ही अहम था। यही कारण था कि उच्चाधिकारी पूरी तरह चुप रहे। इस खेल में पूरा सिस्टम शामिल था।
ब्लाक- प्रशासक रहे- विभाग
बघरा- प्रदीप कुमार- एडीओ पंचायत
खतौली- योगेश्वर त्यागी- एडीओ पंचायत
जानसठ- मुकुटराज- एडीओ पंचायत
मोरना- चंद्रप्रकाश शर्मा- एडीओ पंचायत
पुरकाजी- ओमवीर सिंह- एडीओ आईएसबी
सदर- अमरीश कुमार- एडीओ आईएसबी
चरथावल- राजेंद्र कुमार- एडीओ आईएसबी
बुढाना- अनंगपाल- एडीओ कृषि रक्षा
शाहपुर- सुधीर गुप्ता- एडीओ सहकारिता
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। जिले की 498 ग्राम पंचायतों में पांच माह के कार्यकाल में प्रशासकों और पंचायत सचिवों ने 100 करोड़ से अधिक के काम दिखाकर भुगतान कर डाला। गांवों में बिना पंचायत के प्रस्ताव के कर्मचारियों और अधिकारियों ने 50 करोड़ से अधिक की सड़कें बना डाली। शासन ने 25 लाख से अधिक का भुगतान वाले 46 गांवों में जांच के आदेश दिए हैं। जिला स्तर पर गठित कमेटी जांच कर रही है।
ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 25 दिसंबर की रात्रि में जिले की सभी ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त कर दिए गए थे। चार ब्लाकों में एडीओ पंचायत, तीन ब्लॉकों में एडीओ आईएसबी, एक ब्लाक में एडीओ कृषि रक्षा और एक में एडीओ सहकारिता पर प्रशासक का चार्ज रहा। 12 जून को यह चार्ज फिर प्रधानों के पास चला गया। इस बीच जिले में पंचायत सचिवों और प्रशासकों ने ग्राम पंचायतों के खजाने खाली कर दिए। अधिकतम कार्य और भुगतान एक जनवरी 2021 से 30 जून तक के बीच हुए। अफसरों की शह पर गांवों में 100 करोड़ के कार्य दिखाकर उनका भुगतान भी कर दिया गया। बड़ी बात यह है कि गांवों की सड़कें जो ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के बाद बनती है, प्रशासकों ने अपनी मर्जी से बनवा डाली। यह सभी प्रक्रिया बिना टेंडर और बिना किसी आदेश के पूरी कर दी गई। शासन ने प्रशासकों को केवल जरूरी कार्यों के लिए धन खर्च करने की अनुमति दी थी। इसका सिस्टम ने पूरा लाभ उठाया। प्रधानों पर चार्ज आने के बाद जब गांवों के खजाने खाली मिले, तो शासन में शिकायतें होनी शुरू हुई। शासन ने पूरे प्रदेश के उन गांवों की जांच बैठा दी है, जिनमें 25 लाख से अधिक भुगतान किया गया है। शासन के इस आदेश के बाद जिले की 46 ग्राम पंचायतें जांच के दायरे में आ गई हैं। जो छोटे गांव हैं और जिनमें समस्त खजाना खाली कर दिया गया है। वह जांच के दायरे में नहीं आए हैं। सीडीओ आलोक यादव ने बताया कि जिला स्तर के अधिकारियों की कमेटी गठित कर जांच शुरू कर दी गई है। सीडीओ का कहना है कि स्कूलों में कायाकल्प योजना में और शौचालय निर्माण के काम की अनुमति थी।
विज्ञापन
नहीं छूट रहा सचिव के पद का मोह
ग्राम पंचायत सरवट के पंचायत सचिव का दो माह पूर्व एडीओ के पद पर प्रमोशन हो गया था, लेकिन सचिव ने आज तक प्रमोशन के पद पर ज्वाइन नहीं किया। 21 जून में भी उन्होंने भुगतान किया है। सचिव के पद पर मिलने वाला लाभ उन्हें प्रमोशन के पद पर ज्वाइन करने से रोक रहा है।
विज्ञापन
30 से 50 प्रतिशत तक के कमीशन का खेल
मुजफ्फरनगर। ग्राम पंचायतों में समस्त कार्य सीधे कराए जाते हैं। टेंडर आदि की कोई प्रक्रिया नहीं होती है। सूत्रों की माने तो ग्राम पंचायतों में 30 से 50 प्रतिशत तक के कमीशन का खेल है। 100 करोड़ के भुगतान के पीछे यह कमीशन ही अहम था। यही कारण था कि उच्चाधिकारी पूरी तरह चुप रहे। इस खेल में पूरा सिस्टम शामिल था।
ब्लाक- प्रशासक रहे- विभाग
बघरा- प्रदीप कुमार- एडीओ पंचायत
खतौली- योगेश्वर त्यागी- एडीओ पंचायत
जानसठ- मुकुटराज- एडीओ पंचायत
मोरना- चंद्रप्रकाश शर्मा- एडीओ पंचायत
पुरकाजी- ओमवीर सिंह- एडीओ आईएसबी
सदर- अमरीश कुमार- एडीओ आईएसबी
चरथावल- राजेंद्र कुमार- एडीओ आईएसबी
बुढाना- अनंगपाल- एडीओ कृषि रक्षा
शाहपुर- सुधीर गुप्ता- एडीओ सहकारिता