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बजट नहीं मिलने पर सेतु निगम की सड़क अधूरी
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चरथावल/मुजफ्फरनगर। सेतु निगम मेरठ इकाई द्वारा न्याजूपुरा-रामलीला टिल्ला मार्ग पर पुल का निर्माण किए अरसा बीत गया है लेकिन बजट के अभाव में दोनों तरफ सड़क निर्माण नहीं होने से नियमित आवागमन नहीं शुरू हो पा रहा है। शहर में जाम से बचने से लिए जिला चिकित्सालय आदि पहुंचने के लिए शासन ने पुल निर्माण बनाने की मंजूरी दी थी लेकिन पुल के दोनों तरफ कच्ची सड़क से गुजरना मुश्किल हो रहा है। सेतु निगम द्वारा दो करोड़ रुपये अतिरिक्त बजट की मांग किए छह महीने से ज्यादा बीत गए लेकिन शासन से बजट नहीं मिलने से सैकड़ों गांव के लोगों को दिक्कतों का सामना कर पड़ रहा है।
क्या कहते है लोग
चरथावल के फर्नीचर कारोबारी रविकांत गर्ग का कहना है मुजफ्फरनगर-चरथावल मुख्य मार्ग पर अरसे से टूटी सड़क बारिश में खस्ताहाल बन जाती है। जिससे दुपहिया वाहनों के साथ कार निकलने में परेशानी होती है। शासन को जल्द अवशेष बजट रिलीज कराकर सड़क निर्माण करानी चाहिए।
मुबारिकपुर निवासी योगेश त्यागी दुपहिया वाहन से रोजाना चरथावल एलडीबी बैंक में आते है। उन्हें अरसे से टूटी सड़क पर धूल के गुबार में गुजरना पड़ता है। इस मार्ग के कुछ गड्ढे दधेडू तक लोनिवि ने भरवाए हैं। उसके बाद सड़क खस्ताहाल बनी है। सेतु निगम के पुल के बराबर में धूल से लोग बीमार हो रहे हैं। शनि धाम-मदरसे के बीच इस मार्ग काली नदी शहर के लिए बाइपास पुल बने अरसा बीत गया, लेकिन टूटी सड़क जस की तस है।
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मिमलाना रोड़ निवासी किराना व्यापारी सिद्धार्थ कहते हैं कि गांवों में में माल भेजने में टूटी सड़क आए दिन लोगों की समस्या बढ़ाती है। न्याजूपुरा पुल का निर्माण होने के बावजूद लोगों को लंबा रास्ता तय कर शहर में आना पड़ रहा है।
काली नदी पर न्याजूपुरा-रामलीला टिल्ला पुल का निर्माण हुए छह महीने से अधिक हो चुके हैं। इस निर्माण का चार्ज उन्हें हाल में ही मिला है। कई साल पहले शासन से पुल और सड़कों के निर्माण के लिए 13 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था। लेकिन कोरोना के बाद निर्माण लागत दो से तीन करोड़ रुपये बढ़ गई है, जिसका संशोधित बजट शासन को भेजा है। पैसा स्वीकृत होते ही काम शुरू हो जाएगा। -गजराज सिंह सहायक अभियंता सेतु निगम इकाई मेरठ
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क्या कहते है लोग
चरथावल के फर्नीचर कारोबारी रविकांत गर्ग का कहना है मुजफ्फरनगर-चरथावल मुख्य मार्ग पर अरसे से टूटी सड़क बारिश में खस्ताहाल बन जाती है। जिससे दुपहिया वाहनों के साथ कार निकलने में परेशानी होती है। शासन को जल्द अवशेष बजट रिलीज कराकर सड़क निर्माण करानी चाहिए।
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मुबारिकपुर निवासी योगेश त्यागी दुपहिया वाहन से रोजाना चरथावल एलडीबी बैंक में आते है। उन्हें अरसे से टूटी सड़क पर धूल के गुबार में गुजरना पड़ता है। इस मार्ग के कुछ गड्ढे दधेडू तक लोनिवि ने भरवाए हैं। उसके बाद सड़क खस्ताहाल बनी है। सेतु निगम के पुल के बराबर में धूल से लोग बीमार हो रहे हैं। शनि धाम-मदरसे के बीच इस मार्ग काली नदी शहर के लिए बाइपास पुल बने अरसा बीत गया, लेकिन टूटी सड़क जस की तस है।
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मिमलाना रोड़ निवासी किराना व्यापारी सिद्धार्थ कहते हैं कि गांवों में में माल भेजने में टूटी सड़क आए दिन लोगों की समस्या बढ़ाती है। न्याजूपुरा पुल का निर्माण होने के बावजूद लोगों को लंबा रास्ता तय कर शहर में आना पड़ रहा है।
काली नदी पर न्याजूपुरा-रामलीला टिल्ला पुल का निर्माण हुए छह महीने से अधिक हो चुके हैं। इस निर्माण का चार्ज उन्हें हाल में ही मिला है। कई साल पहले शासन से पुल और सड़कों के निर्माण के लिए 13 करोड़ रुपये का बजट मंजूर हुआ था। लेकिन कोरोना के बाद निर्माण लागत दो से तीन करोड़ रुपये बढ़ गई है, जिसका संशोधित बजट शासन को भेजा है। पैसा स्वीकृत होते ही काम शुरू हो जाएगा। -गजराज सिंह सहायक अभियंता सेतु निगम इकाई मेरठ