{"_id":"6352ed177752792051149b70","slug":"remedial-class-will-be-given-to-weak-children-muzaffarnagar-news-mrt6106234131","type":"story","status":"publish","title_hn":"कमजोर बच्चों को दी जाएगी उपचारात्मक कक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कमजोर बच्चों को दी जाएगी उपचारात्मक कक्षा
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। शहर के राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्यों और नोडल शिक्षक शिक्षिकाओं की कार्यशाला आयोजित हुई। जिला विद्यालय निरीक्षक गजेंद्र कुमार ने प्रशिक्षण दिया। बताया कि कमजोर बच्चों की उपचारात्मक कक्षा दी जाएगी।
डीआईओएस ने कहा कि उपचारात्मक शिक्षण शिक्षा के क्षेत्र में कोई नवीन शब्द नहीं है, क्योंकि पहले से ही अनुभवी शिक्षक छात्रों की सीखने संबंधी कमियों के ज्ञात होने पर उनको दूर करने का प्रयास करते रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उपचार शब्द चिकित्सा क्षेत्र से लिया है, जहां शिक्षक छात्रों के अधिगम संबंधी दोषों को दूर कर उनके कक्षा में पिछड़ेपन को दूर करने का प्रयास करता है।
उपचारात्मक शिक्षण में शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें अपनी कक्षा के प्रत्येक बालक की आयु, योग्यता आदि को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षण कराना होगा। जिला कार्यक्रम प्रभारी और मास्टर ट्रेनर प्रधानाचार्य डॉ. विकास कुमार ने बताया कि प्रथम चरण में राजकीय विद्यालयों के सभी छात्र छात्राओं का प्री टेस्ट लेकर पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित किया। दूसरे चरण में चयनित सभी 4650 छात्र-छात्राओं को उपचारात्मक कक्षाओं में सम्मलित किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रधानाचार्य शैलेंद्र त्यागी ने कहा कि निश्चित रूप से चार माह के उपचारात्मक शिक्षण के बाद पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा। मौके पर अनीता चौधरी, मीनाक्षी आर्य, उमा रानी, अंजू वर्मा, प्रमोद कुमार, आशीष द्विवेदी, सुभाष चंद्र, लेखा लिपिक, अमित कुमार मौजूद रहे।
विज्ञापन
डीआईओएस ने कहा कि उपचारात्मक शिक्षण शिक्षा के क्षेत्र में कोई नवीन शब्द नहीं है, क्योंकि पहले से ही अनुभवी शिक्षक छात्रों की सीखने संबंधी कमियों के ज्ञात होने पर उनको दूर करने का प्रयास करते रहे हैं। शिक्षा के क्षेत्र में उपचार शब्द चिकित्सा क्षेत्र से लिया है, जहां शिक्षक छात्रों के अधिगम संबंधी दोषों को दूर कर उनके कक्षा में पिछड़ेपन को दूर करने का प्रयास करता है।
विज्ञापन
उपचारात्मक शिक्षण में शिक्षकों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें अपनी कक्षा के प्रत्येक बालक की आयु, योग्यता आदि को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षण कराना होगा। जिला कार्यक्रम प्रभारी और मास्टर ट्रेनर प्रधानाचार्य डॉ. विकास कुमार ने बताया कि प्रथम चरण में राजकीय विद्यालयों के सभी छात्र छात्राओं का प्री टेस्ट लेकर पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों को चिह्नित किया। दूसरे चरण में चयनित सभी 4650 छात्र-छात्राओं को उपचारात्मक कक्षाओं में सम्मलित किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्रधानाचार्य शैलेंद्र त्यागी ने कहा कि निश्चित रूप से चार माह के उपचारात्मक शिक्षण के बाद पढ़ाई में कमजोर विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया में सुधार होगा। मौके पर अनीता चौधरी, मीनाक्षी आर्य, उमा रानी, अंजू वर्मा, प्रमोद कुमार, आशीष द्विवेदी, सुभाष चंद्र, लेखा लिपिक, अमित कुमार मौजूद रहे।