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नियमित ध्यान से होता है जटिल रोगों का खात्मा
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मुजफ्फरनगर ग्रीन लैंड जूनियर हाईस्कूल में योग शिविर में प्रतिभाग करते साधक, साधिकाएं
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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नियमित ध्यान से होता है जटिल रोगों का खात्मा
मुजफ्फरनगर। सात दिवसीय योग शिविर के समापन पर योग प्रशिक्षकों ने कहा कि नियमित ध्यान से जटिल रोगों का खात्मा हो जाता है। तन और मन दोनों शांत एवं स्वस्थ बनते हैं।
रविवार को ग्रीन लैंड माडर्न जूनियर हाईस्कूल द्वारा संचालित नि:शुल्क योग साधना केंद्र पर भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में चल रहे ध्यान योग के सात दिवसीय शिविर का समापन हो गया। मुख्य वक्ता योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने कहा कि ध्यान को परिभाषित नहीं किया जा सकता। ध्यान अनुभूति की चीज है। मन की तीन अवस्थाओं चेतन, अवचेतन तथा अचेतन को मिलाकर चित्त बनता है। जब मन के तीनों स्तर पर कार्यकलाप रुक जाते हैं, तभी मन शांत होता है। साधक ध्यान की गहराई में जाने लगता है। उन्होंने बताया कि ध्यान वह अवस्था है जब हम शरीर और मन को पार कर आत्मा के उस स्तर पर पहुंच जाते हैं। जो शुद्ध चेतन है और परम आनंद की अनुभूति करवाता है। योग शिक्षक यज्ञ दत्त आर्य ने कहा कि ध्यान के नियमित अभ्यास से चिंता, भय, तनाव, अवसाद और माईग्रेन जैसे घातक रोगों का निवारण होता है। तन और मन दोनों को शांत एवं स्वस्थ बनते हैं। प्रधान राज सिंह पुंडीर ने कहा कि ध्यान के लिए स्थिरता, निरंतरता व समयबद्धता आवश्यक है। बहिरंग साधना को अंतरंग साधना में बदलना ही ध्यान है। सत्यवीर सिंह पंवार, केंद्र प्रमुख रजनी मलिक, राजीव रघुवंशी, राजपाल, ऋषिपाल, कुलदीप अरोरा, मुनेश मान, अनिता चौधरी, रितु मलिक, अंजलि, पूजा, सुमन, बेबी सैनी, सविता, नीलम राठी आदि ने भाग लिया।
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मुजफ्फरनगर। सात दिवसीय योग शिविर के समापन पर योग प्रशिक्षकों ने कहा कि नियमित ध्यान से जटिल रोगों का खात्मा हो जाता है। तन और मन दोनों शांत एवं स्वस्थ बनते हैं।
रविवार को ग्रीन लैंड माडर्न जूनियर हाईस्कूल द्वारा संचालित नि:शुल्क योग साधना केंद्र पर भारतीय योग संस्थान के तत्वावधान में चल रहे ध्यान योग के सात दिवसीय शिविर का समापन हो गया। मुख्य वक्ता योगाचार्य सुरेंद्र पाल सिंह आर्य ने कहा कि ध्यान को परिभाषित नहीं किया जा सकता। ध्यान अनुभूति की चीज है। मन की तीन अवस्थाओं चेतन, अवचेतन तथा अचेतन को मिलाकर चित्त बनता है। जब मन के तीनों स्तर पर कार्यकलाप रुक जाते हैं, तभी मन शांत होता है। साधक ध्यान की गहराई में जाने लगता है। उन्होंने बताया कि ध्यान वह अवस्था है जब हम शरीर और मन को पार कर आत्मा के उस स्तर पर पहुंच जाते हैं। जो शुद्ध चेतन है और परम आनंद की अनुभूति करवाता है। योग शिक्षक यज्ञ दत्त आर्य ने कहा कि ध्यान के नियमित अभ्यास से चिंता, भय, तनाव, अवसाद और माईग्रेन जैसे घातक रोगों का निवारण होता है। तन और मन दोनों को शांत एवं स्वस्थ बनते हैं। प्रधान राज सिंह पुंडीर ने कहा कि ध्यान के लिए स्थिरता, निरंतरता व समयबद्धता आवश्यक है। बहिरंग साधना को अंतरंग साधना में बदलना ही ध्यान है। सत्यवीर सिंह पंवार, केंद्र प्रमुख रजनी मलिक, राजीव रघुवंशी, राजपाल, ऋषिपाल, कुलदीप अरोरा, मुनेश मान, अनिता चौधरी, रितु मलिक, अंजलि, पूजा, सुमन, बेबी सैनी, सविता, नीलम राठी आदि ने भाग लिया।
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