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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - साक्ष्य के लिए पेश नहीं हुए सीबीआई के एसपी
Sat, 28 Oct 2023 01:02 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 28 Oct 2023 01:02 AM IST
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रामपुर तिराहा कांड -- - देहरादून के लिए खास
- सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में साक्ष्य के लिए सीबीआई के एसपी शिमला पेश नहीं हो सके। सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट मयंक जायसवाल ने सुनवाई के लिए छह नवंबर की तिथि तय की है।
सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में सुनवाई चल रही है। साक्ष्य मिटाने के मामले में अभी तक अभियोजन कई गवाह पेश कर चुका है। सीबीआई के अधिवक्ता महेश यादव और उत्तराखंड समन्वय समिति के नामित अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को सीबीआई की ओर से साक्ष्य के लिए एसपी शिमला राजेश चहल को पेश किया जाना था, लेकिन वह अदालत नहीं पहुंचे। सीबीआई की ओर से अदालत में अगली तिथि के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया।
यह था मामला
एक अक्तूबर 1994 की रात को उत्तराखंड की मांग के लिए आंदोलनकारी देहरादून से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। रात के समय रामपुर तिराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग की, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। महिलाओं के साथ अभद्रता की गई थी। मुजफ्फरनगर के लोगों ने आंदोलनकारियों की मदद की थी। प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश 1995 में हुए थे। अदालत में प्रकरण की सुनवाई चल रही है।
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- सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट में हुई मामले की सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। रामपुर तिराहा कांड में साक्ष्य के लिए सीबीआई के एसपी शिमला पेश नहीं हो सके। सिविल जज सीनियर डिविजन फास्ट ट्रैक कोर्ट मयंक जायसवाल ने सुनवाई के लिए छह नवंबर की तिथि तय की है।
सीबीआई बनाम एसपी मिश्रा की पत्रावली में सुनवाई चल रही है। साक्ष्य मिटाने के मामले में अभी तक अभियोजन कई गवाह पेश कर चुका है। सीबीआई के अधिवक्ता महेश यादव और उत्तराखंड समन्वय समिति के नामित अधिवक्ता अनुराग वर्मा ने बताया कि शुक्रवार को सीबीआई की ओर से साक्ष्य के लिए एसपी शिमला राजेश चहल को पेश किया जाना था, लेकिन वह अदालत नहीं पहुंचे। सीबीआई की ओर से अदालत में अगली तिथि के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया।
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यह था मामला
एक अक्तूबर 1994 की रात को उत्तराखंड की मांग के लिए आंदोलनकारी देहरादून से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। रात के समय रामपुर तिराहे पर पुलिस ने उन्हें रोक लिया। हंगामा बढ़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और फायरिंग की, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी। महिलाओं के साथ अभद्रता की गई थी। मुजफ्फरनगर के लोगों ने आंदोलनकारियों की मदद की थी। प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश 1995 में हुए थे। अदालत में प्रकरण की सुनवाई चल रही है।
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