रामपुर तिराहा कांड: फोटोकॉपी पर ही कराई जाएगी गवाही, गायब मूल पत्रावलियों से केस का ट्रायल नहीं होगा प्रभावित
रामपुर तिराहा कांड की गायब मूल पत्रावलियों से केस का ट्रायल प्रभावित नहीं होगा। मामले में फोटोकॉपी के आधार पर रही सुनवाई और साक्ष्य की प्रक्रिया चलेगी।
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शासकीय अधिवक्ता फौजदारी राजीव शर्मा, सहायक शासकीय अधिवक्ता फौजदारी परवेंद्र सिंह, उत्तराखंड़ संघर्ष समिति के अधिवक्ता अनुराग वर्मा और रजनीश चौहान ने बताया कि सरकार बनाम मिलाप सिंह और राधा मोहन की पत्रावली में शुक्रवार को सुनवाई हुई। बचाव पक्ष का कहना था कि फोटोकॉपी के आधार पर सुनवाई नहीं होनी चाहिए। अदालत ने कहा कि फोटोकॉपी पर साक्ष्य कराए जाएंगे।
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यह था मामला
एक अक्तूबर, 1994 को अलग राज्य की मांग के लिए देहरादून से बसों में सवार होकर आंदोलनकारी दिल्ली के लिए निकले थे। देर रात रामपुर तिराहा पर पुलिस ने आंदोलनकारियों को रोकने का प्रयास किया। आंदोलनकारी नहीं माने तो पुलिसकर्मियों ने फायरिंग कर दी, जिसमें सात आंदोलनकारियों की मौत हो गई थी।
सीबीआई ने मामले की जांच की और पुलिस पार्टी और अधिकारियों पर मुकदमे दर्ज कराए थे। गंभीर धाराओं के सेशल ट्रायल मुकदमों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट ने जिले के अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर सात के पीठासीन अधिकारी शक्ति सिंह को अधिकृत किया है।