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Muzaffarnagar News: सजातीय गांवों में विक्रम के वोटों की बराबरी नहीं कर पाई राजकुमारी

Sat, 10 Dec 2022 05:00 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 10 Dec 2022 05:00 AM IST
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Rajkumari could not match Vikram's votes in homogeneous villages
विक्रम सैनी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
सैनी समाज के चार प्रमुख गांवों में मतदान में नहीं दिखा पहले जैसा उत्साह
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अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन जीत-हार पर मंथन और चिंतन का सिलसिला जारी है। सैनी समाज के चार प्रमुख गांवों में भाजपा प्रत्याशी राजकुमारी सैनी अपने पति निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी जितने वोट भी हासिल नहीं कर सकी। सजातीय मतों की उदासीनता भी हार की एक वजह मानी जा रही है।
सहारनपुर मंडल की किसान राजनीति में सैनी समाज का दखल किसी से छिपा नही है। बडसू,
सिकंदरपुर, भलेडी और तालड़ा गांव में बिरादरी के पास अच्छी-खासी जमीन है। मुख्य चुनाव और उप चुनाव की नतीजों की तुलना करें तो इस बार भाजपा प्रत्याशी के सजातीय गांवों में मतदान को लेकर उत्साह कम नजर आया। बडसू गांव के बूथ नंबर 274 पर राजकुमारी सैनी को 334 वोट मिले, जबकि मुख्य चुनाव में यहां विक्रम सैनी को 405 वोट मिले थे।
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दूसरे बूथ पर राजकुमारी सैनी को 330 वोट मिले, जबकि विक्रम सैनी को 403 वोट मिले थे। सिकंदरपुर कलां के प्राथमिक विद्यालय कक्ष नंबर दो में विक्रम सैनी ने 461 वोट हासिल किए थे, जबकि राजकुमारी सैनी सिर्फ 299 मतों पर ही सिमट गई। तालड़ा गांव में हर बूथ पर मुख्य चुनाव के मुकाबले में नुकसान उठाना पड़ा। जिन गांवों से अधिक मत मिलने की उम्मीद थी, पर मतदाताओं में उत्साह नहीं दिखा। मतदाताओं के उत्साह में यही कमी राजकुमारी को नतीजों में भारी पड़ गई।
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धर्म सिंह की वापसी टली तो बढ़ी उदासीनता
मुजफ्फरनगर। सहारनपुर के पूर्व मंत्री धर्म सिंह सैनी विधानसभा चुनाव से पहले सपा में चले गए थे। वह चुनाव हारे तो अलग-थलग पड़ गए। तीस नवंबर को सीएम योगी आदित्यनाथ के सामने खतौली में उनकी वापसी तय हो गई थी, लेकिन एकाएक कार्यक्रम टल गया। माना यह भी जा रहा है कि उनके सजातीय गांवों में इसका नुकसान हुआ। वोटर मतदान के दिन बूथ तक जाने में उत्साहित नहीं दिखे।
अति पिछड़ों के बूथ खंगाल रही भाजपा
हार के बाद भाजपा नेता बूथवार रिपोर्ट पर नजर डाल रहे हैं। भाजपा की ताकत कहे जाने वाले पिछड़ा समाज के बूथों पर मतदाताओं की चाल समझी जा रही है। भाजपा के प्रभाव वाले बूथों पर भी गठबंधन प्रत्याशी को बेहतर वोट मिलना खतरे की घंटी है।

चुनाव से पहले बदले गए थे संयोजक
विधानसभा उप चुनाव से पहले खतौली के संयोजक बदल दिए गए थे। किसान नेता की छवि रखने वाले राजू अहलावत को हटाकर उनकी जगह जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ वीरपाल निर्वाल को जिम्मेदारी दी गई थी। बूथवार पूर्व विधायकों और महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की जिम्मेदारी थी। भाजपा संगठन हार के बाद मंथन में जुटा है।

राजकुमारी सैनी।

राजकुमारी सैनी।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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