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अनाथ नाबालिग को भेजा जेल

Fri, 06 Nov 2020 12:32 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 06 Nov 2020 12:32 AM IST
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Questions arising over the arrest of a minor in a murder case
हत्या के मामले में नाबालिग की गिरफ्तारी पर उठ रहे सवाल
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मुजफ्फरनगर। पुरकाजी पुलिस के हत्या के आरोप में एक नाबालिग को गिरफ्तार कर जेल भेजने के मामले पर परिजन सवाल खड़े कर रहे हैं। परिजनों ने किशोर न्याय बोर्ड में गुहार लगाई गई तो पुलिस रिकॉर्ड में किशोर से उससे किसी तरह के सामान की बरामदगी नहीं होने की बात सामने आई, जिसके बाद पुलिस ने माल बरामदगी धारा 411 हटा ली। नाबालिग की दादी का कहना है कि उसकी उम्र मात्र 12 साल है और पूर्व में गिरफ्तार दो आरोपियों ने भी बालक के हत्या में शामिल नहीं होने से इंकार किया था। उन्होंने आरोप है कि उसे 12 दिन तक अवैध हिरासत में भी रखा गया। वह लगातार अधिकारियों के यहां चक्कर काट रही है।

गिरफ्तार नाबालिग के पिता का एक हादसे में निधन हो गया है और उसके बाद उसकी मां भी उसे छोड़कर मायके चली गई थी। वह अपनी दादी के पास रहता है। पुरकाजी निवासी मयंक का शव 23 अगस्त को लक्सर रोड से बरामद हुआ था और इस मामले में पुलिस ने पांच सितंबर को नाबालिग को हिरासत में लिया था और 13 सितंबर को थाना पुलिस ने वाजिद व शमीम को गिरफ्तार कर मयंक हत्या का खुलासा कर उन्हें जेल भेज दिया, लेकिन नाबालिग को नहीं छोड़ा। उसकी 80 वर्षीय दादी व जिला पंचायत सदस्य बुआ ने 16 सितंबर को पुरकाजी इंस्पेक्टर जितेंद्र यादव व एसआई लेखराज सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए अफसरों को पत्र भेजा, जिसकी जांच अफसरों ने एसआई लेखराज सिंह को ही सौंप दी। पुलिस ने 19 सितंबर को नाबालिग को भी मयंक की हत्या में शामिल बताते हुए राजकीय संप्रेक्षण गृह नोएडा भेज दिया। एसएसपी अभिषेक यादव का कहना है कि पुलिस जांच में उसे मयंक की हत्या में शामिल पाया था। जांच के बाद ही जुवेनाइल होने के कारण उसे राजकीय संप्रेक्षण गृह नोएडा भेजा गया था। उससे किसी तरह की बरामदगी नहीं हुई थी, लेकिन हत्या में उसकी संलिप्तता सामने आई थी।
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खुलासे पर उठ रहे सवाल
- किशोर को करीब एक पखवाड़े तक अवैध हिरासत में क्यों रखा गया?
- यदि किशोर हत्या में शामिल था तो उसे दोनों आरोपियों के साथ जेल क्यों नहीं भेजा गया?
- उस पर धारा-411 लगा दी गई, पुलिस रिकॉर्ड में इस संबंध में कोई बरामदगी ही दर्ज नहीं है?
-केस डायरी में राहुल की घटनास्थल पर मौजूदगी भी पुलिस रिकॉर्ड में अंकित नहीं है।
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