{"_id":"613ba1538ebc3e61d82f859b","slug":"program-on-world-suicide-prevention-day-at-dav-degree-college-muzaffarnagar-news-mrt5556547153","type":"story","status":"publish","title_hn":"बोले सीएमओ, सकारात्मक सोचें और रचनात्मक कार्य करें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बोले सीएमओ, सकारात्मक सोचें और रचनात्मक कार्य करें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुजफ्फरनगर। सीएमओ डा. महावीर सिंह फौजदार ने कहा कि आत्महत्या के विषय में सोचना भी गलत है। जब हम स्वयं अपने जीवन का आरंभ नहीं कर सकते तो उसका अंत करने के बारे भी सोचना गलत है।
शुक्रवार को विश्व आत्महत्या निषेध दिवस पर डीएवी डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम में सीएमओ ने कहा कि जीवन में हताशा और निराशा को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। सकारात्मक सोचें और रचनात्मक कार्य करें। इससे जीवन सुखमय रहेगा और अवसाद नहीं होगा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. प्रशांत कुमार ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। उन्होंने चिंता की जगह चिंतन करने व रोग से बचाव के लिए किए जाने वाले उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है। जिंदगी बार-बार नहीं मिलती, जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखिए, जिंदगी से प्यार करिए। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन है। डिप्रेशन दूर करने के लिए नियमित रूप से योगा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि खुद को व्यस्त रखने का प्रयास करें, जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें, उसे प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करें। जीवन को सार्थक बनाएं। दूसरों के लिए मिसाल कायम करें।
मनोचिकित्सक डा. अपर्ण जैन ने कहा कि मानसिक रोग के प्रमुख लक्षणों में नकारात्मक विचार के साथ पर्याप्त नींद का नहीं आना, मिर्गी का दौरा पड़ना, अचानक बेहोश होना, हाथ व पैर में झुरझुरी होना, भीड़ में जाने से घबराना, आत्महत्या का विचार आना या कोशिश करना, बिना किसी कारण अचानक घबराहट होना, किसी के आसपास न होने के बाद भी किसी के होने की आशंका होना, अपने आप से बात करना आदि शामिल है। इसमें से किसी भी लक्षण के महसूस करने पर जिला मुख्यालय स्थित मानसिक रोग निवारण प्रकोष्ठ से संपर्क करें, जहां इलाज के लिए दवा के साथ उचित परामर्श देने की व्यवस्था है।
विज्ञापन
विज्ञापन
शुक्रवार को विश्व आत्महत्या निषेध दिवस पर डीएवी डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम में सीएमओ ने कहा कि जीवन में हताशा और निराशा को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। सकारात्मक सोचें और रचनात्मक कार्य करें। इससे जीवन सुखमय रहेगा और अवसाद नहीं होगा। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डा. प्रशांत कुमार ने कहा कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए मानसिक रूप से स्वस्थ होना आवश्यक है। उन्होंने चिंता की जगह चिंतन करने व रोग से बचाव के लिए किए जाने वाले उपायों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन अनमोल है। जिंदगी बार-बार नहीं मिलती, जीवन के प्रति सकारात्मक नजरिया रखिए, जिंदगी से प्यार करिए। आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता। आत्महत्या का सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन है। डिप्रेशन दूर करने के लिए नियमित रूप से योगा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि खुद को व्यस्त रखने का प्रयास करें, जीवन का लक्ष्य निर्धारित करें, उसे प्राप्त करने के लिए कठिन परिश्रम करें। जीवन को सार्थक बनाएं। दूसरों के लिए मिसाल कायम करें।
विज्ञापन
मनोचिकित्सक डा. अपर्ण जैन ने कहा कि मानसिक रोग के प्रमुख लक्षणों में नकारात्मक विचार के साथ पर्याप्त नींद का नहीं आना, मिर्गी का दौरा पड़ना, अचानक बेहोश होना, हाथ व पैर में झुरझुरी होना, भीड़ में जाने से घबराना, आत्महत्या का विचार आना या कोशिश करना, बिना किसी कारण अचानक घबराहट होना, किसी के आसपास न होने के बाद भी किसी के होने की आशंका होना, अपने आप से बात करना आदि शामिल है। इसमें से किसी भी लक्षण के महसूस करने पर जिला मुख्यालय स्थित मानसिक रोग निवारण प्रकोष्ठ से संपर्क करें, जहां इलाज के लिए दवा के साथ उचित परामर्श देने की व्यवस्था है।
विज्ञापन