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Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर - आधे जिले को एनसीआर से बाहर करने की तैयारी
Tue, 20 Feb 2024 02:46 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
संवाद न्यूज एजेंसी, मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 20 Feb 2024 02:46 AM IST
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- एक सौ किमी से दूर के ब्लॉक किए जाएंगे शामिल, लोगों को मिलेगी राहत
- सदर ब्लॉक, जानसठ, मोरना, पुरकाजी और चरथावल विकास खंड का हिस्सा शामिल हो सकता
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल होने के बाद मुश्किलों में फंसे लोगों को अब राहत की उम्मीद बंध गई है। जिले के एक सौ किमी के बाहर के हिस्से को एनसीआर से अलग करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इससे उद्यमियों और किसानों को राहत मिलेगी। जिले के एक लाख से अधिक वाहन मालिक एनसीआर में आने के बाद परेशान हैं।
करीब आठ साल पहले मुजफ्फरनगर को एनसीआर में शामिल किया गया था, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं। वाहन चालकों, किसानों और उद्यमियों के सामने नए कानून के झंझट खड़े होने शुरू हो गए। एनसीआर का दायरा एक सौ किमी किया गया। जिले को एनसीआर में शामिल किए जाने के बाद असंतोष की स्थिति भी देखी गई।
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि इस मामले का समाधान निकालने के लिए नया फार्मूला निकाला गया है। एक सौ किमी के बाहर के विकास खंड क्षेत्रों को एनसीआर से बाहर किया जाएगा। इनमें मुजफ्फरनगर सदर ब्लॉक, जानसठ, मोरना, पुरकाजी और चरथावल विकास खंड का हिस्सा शामिल हो सकता है। इसके लिए सर्वे का कार्य कराया जा चुका है। जल्द ही इसका नियम बनवाकर लागू कराया जाएगा।
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इस तरह मुश्किल उठा रहे वाहन मालिक
एनसीआर में शामिल हो जाने के बाद वाहन के प्रयोग का समय भी निर्धारित कर दिया गया है। पेट्रोल वाहन के लिए 15 साल और डीजल वाहन के लिए 10 साल का समय तय है। प्रदूषण रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था। इससे जिले के वाहन मालिकों के सामने मुश्किल हालात बन रहे थे।
एनजीटी के दायरे में आ गए थे उद्योग
जिले उद्योग का नया केंद्र है। यहां के कई उद्योग एनजीटी के दायरे में आ गए थे। यही नहीं सर्दी के चलते पेपर मिलों को भी बंद करना पड़ता था। सदर ब्लॉक के 100 किमी के दायरे से बाहर हो जाने से उद्यमियों को राहत मिलेगी।
इस तरह किए जा रहे प्रयास
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसमें जिले को यूनिट ने मानकर ब्लॉक को यूनिट माना जाएगा। इसके बाद अलग-अलग बोर्ड में यह प्रस्ताव पास कराने का प्रयास है, जिससे लोगों को राहत मिलेगी।
किसान लंबे समय से कर रहे मांग
किसान मंचों पर बार-बार ट्रैक्टर को एनसीआर के नियमों से बाहर करने की मांग उठती रही है। जिले में 50 साल पुराने ट्रैक्टर भी खेती में प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे में किसानों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।
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- सदर ब्लॉक, जानसठ, मोरना, पुरकाजी और चरथावल विकास खंड का हिस्सा शामिल हो सकता
फोटो
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल होने के बाद मुश्किलों में फंसे लोगों को अब राहत की उम्मीद बंध गई है। जिले के एक सौ किमी के बाहर के हिस्से को एनसीआर से अलग करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इससे उद्यमियों और किसानों को राहत मिलेगी। जिले के एक लाख से अधिक वाहन मालिक एनसीआर में आने के बाद परेशान हैं।
करीब आठ साल पहले मुजफ्फरनगर को एनसीआर में शामिल किया गया था, लेकिन नए नियमों के लागू होने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़नी शुरू हो गईं। वाहन चालकों, किसानों और उद्यमियों के सामने नए कानून के झंझट खड़े होने शुरू हो गए। एनसीआर का दायरा एक सौ किमी किया गया। जिले को एनसीआर में शामिल किए जाने के बाद असंतोष की स्थिति भी देखी गई।
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केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि इस मामले का समाधान निकालने के लिए नया फार्मूला निकाला गया है। एक सौ किमी के बाहर के विकास खंड क्षेत्रों को एनसीआर से बाहर किया जाएगा। इनमें मुजफ्फरनगर सदर ब्लॉक, जानसठ, मोरना, पुरकाजी और चरथावल विकास खंड का हिस्सा शामिल हो सकता है। इसके लिए सर्वे का कार्य कराया जा चुका है। जल्द ही इसका नियम बनवाकर लागू कराया जाएगा।
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इस तरह मुश्किल उठा रहे वाहन मालिक
एनसीआर में शामिल हो जाने के बाद वाहन के प्रयोग का समय भी निर्धारित कर दिया गया है। पेट्रोल वाहन के लिए 15 साल और डीजल वाहन के लिए 10 साल का समय तय है। प्रदूषण रोकने के लिए यह कदम उठाया गया था। इससे जिले के वाहन मालिकों के सामने मुश्किल हालात बन रहे थे।
एनजीटी के दायरे में आ गए थे उद्योग
जिले उद्योग का नया केंद्र है। यहां के कई उद्योग एनजीटी के दायरे में आ गए थे। यही नहीं सर्दी के चलते पेपर मिलों को भी बंद करना पड़ता था। सदर ब्लॉक के 100 किमी के दायरे से बाहर हो जाने से उद्यमियों को राहत मिलेगी।
इस तरह किए जा रहे प्रयास
केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान ने बताया कि शहरी विकास मंत्रालय में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसमें जिले को यूनिट ने मानकर ब्लॉक को यूनिट माना जाएगा। इसके बाद अलग-अलग बोर्ड में यह प्रस्ताव पास कराने का प्रयास है, जिससे लोगों को राहत मिलेगी।
किसान लंबे समय से कर रहे मांग
किसान मंचों पर बार-बार ट्रैक्टर को एनसीआर के नियमों से बाहर करने की मांग उठती रही है। जिले में 50 साल पुराने ट्रैक्टर भी खेती में प्रयोग हो रहे हैं। ऐसे में किसानों को भी बड़ी राहत मिल सकती है।