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डाकबंगला उपेक्षाओं के चलते खंडहर में हुआ तब्दील

Wed, 02 Sep 2020 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Sep 2020 11:48 PM IST
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Postal Department Bungalow of Irrigation Department in Shahpur
शाहपुर में खंडहर में तब्दील डाक बंगला। - फोटो : KHATAULI
डाकबंगला उपेक्षाओं के चलते खंडहर में हुआ तब्दील
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शाहपुर। कस्बे के पश्चिम दिशा में स्थित सिंचाई विभाग का डाकबंगला विभाग व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते खंडहर में तब्दील हो गया है। डाकबंगला असामाजिक तत्वों का सुरक्षित ठिकाना बन गया है।
अंग्रेजी शासनकाल में इस डाकबंगले को विशेष तौर पर बनाया गया था। कस्बे में कोठी के नाम से मशहूर इस डाक बंगले पर अधिकारियों के रुकने के लिए सुविधा युक्त सुसज्जित कमरे, फलदार व छायादार बागान के साथ यह फूलों की खुशबू से महकता रहता था। अंग्रेजी हुकूमत में जब आला अफसर कस्बे में आते थे, तो इसी डाक बंगले पर रुकते थे। देश आजाद होने के बाद भी जनप्रतिनिधि व अधिकारी इस डाक बंगले में रुकते थे। सन 1992 में प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे सुधीर बालियान ने इस डाक बंगले पर पहुंच जनसमस्याओं को सुना था । उसके बाद से किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस डाक बंगले की ओर ध्यान नहीं दिया। जिसके बाद से यह डाक बंगला अपना अस्तित्व खोता चला गया, इतना ही नहीं असामाजिक तत्व इसमें लगे लकड़ी के दरवाजों तक को उखाड़कर ले गए, जिसके चलते वर्तमान में डाकबंगला खंडहर में तब्दील हो गया।
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समाजसेवी बालेश जैन ने बताया कि तीन दशक पूर्व तक यह डाक बंगला कस्बे के लोगों का पिकनिक स्पॉट हुआ करता था। यहां का वातावरण बेहद शुद्ध रहता था। सुबह शाम लोग यहां घूमने आते थे। उन्होंने सिंचाई विभाग के आला अधिकारियों से इस डाक बंगले पर लोगों के लिए घूमने के लिए पार्क बनवाने की मांग की है।
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कस्बा निवासी उमेश गोयल ने केंद्रीय राज्यमंत्री डॉक्टर संजीव बालियान व विधायक उमेश मलिक से सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ इस डाक बंगले का निरीक्षण कर इसका जीर्णोद्धार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधियों के लिए समस्या सुनने के लिए नगर पंचायत के अलावा अन्य कोई सार्वजनिक स्थान नहीं है। इस डाक बंगले का जीर्णोद्धार होने से जनप्रतिनिधि यहां समस्या सुन सकते हैं।
कस्बा निवासी शाहिद कुरैशी का कहना है कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों की देखरेख के अभाव में अंग्रेजी हुकूमत में बना यह डाक बंगला खंडहर में तब्दील हो गया है। युवा पीढ़ी इस डाक बंगले से अनजान है। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग इस डाक बंगले का पुनर्निर्माण कराकर इस डाक बंगले की देखरेख के लिए कर्मचारी नियुक्त करने के साथ इसके इतिहास से लोगों को अवगत कराएं।

समाजसेवी उमेश मित्तल का कहना है कि सिंचाई विभाग का यह डाक बंगला अपना अस्तित्व खो चुका है। विभाग की करोड़ों रुपये की संपत्ति देखरेख के अभाव में लावारिस हालत में है। सुबह के समय लोग टहलने जाते थे, तो वह यहां अवश्य जाते थे। लेकिन वर्तमान में देखरेख नहीं होने के कारण यहां पर घास उग आई है, जिसके चलते लोगों ने यहां आना बंद कर दिया है।
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