{"_id":"60d37de28ebc3e2cd20480bc","slug":"pond-became-the-source-of-kali-river-in-antwara-muzaffarnagar-news-mrt544161679","type":"story","status":"publish","title_hn":"तालाब बना अंतवाड़ा में काली नदी का उद्गम स्थल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तालाब बना अंतवाड़ा में काली नदी का उद्गम स्थल
विज्ञापन
गांव अंतवाड़ा में काली नदी का उद्गम स्थल।
- फोटो : KHATAULI
तालाब बना अंतवाड़ा में काली नदी का उद्गम स्थल
मुजफ्फरनगर, जानसठ। प्रसिद्ध काली नदी के पुनर्जीवन और जल संरक्षण के लिए मेरठ में मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ने डीएम के बालाजी के साथ श्रमदान कर नदी के पुनर्जीवन का आगाज किया है जबकि काली नदी के उद्गम स्थल की स्थानीय जिला प्रशासन ने दो साल से कोई सुध नहीं ली है। उद्गम स्थल के बीच में बिजली के खंभे लगे हुए हैं, जिन्हें दो साल बाद भी प्रशासन नहीं हटवा पाया है। इतना ही नहीं उद्गम स्थल स्थल पर पौधों का कोई नामोनिशान नहीं बचा है। देखभाल नहीं होने से पौधे सूख चुके हैं।
तहसील खतौली के गांव अंतवाड़ा से काली नदी का उद्गम हुआ था। दो साल पूर्व जल संरक्षण के लिए काली नदी को पुनर्जीवित करने को उद्गम स्थल की खुदाई कराई गई थी। उद्गम स्थल के चारों ओर पौधारोपण भी किया गया था। उस वक्त कई नामचीन हस्तियों ने पौधारोपण और श्रमदान किया था। वर्तमान में गांव अंतवाड़ा में जहां काली नदी के उद्गम स्थल की खुदाई की गई थी, प्रशासन की उदासीनता के चलते वह स्थल अब तालाब की तरह तब्दील हो गया है।
500 साल पहले काली नदी का उद्गम हुआ
जानसठ। गांव अंतवाड़ा के बाबूराम, प्रताप सिंह, सतीश आदि ग्रामीणों ने बताया कि उनके बुजुर्ग बताते हैं कि 500 साल पूर्व गांव से ही काली नदी (तब नागिन नदी) का उद्गम हुआ था। धीरे-धीरे लोगों ने उद्गम स्थल पर कब्जा करके फसलों की बुआई शुरू कर दी थी। कई बार काली नदी की भूमि को खाली कराने को फसलों की जुताई कराई गई। सन 2019 में मेरठ की नीर फाउंडेशन के अध्यक्ष रमन त्यागी ने काली नदी को पुनजीर्वित करने के लिए शासन व प्रशासन के सहयोग से उद्गम स्थल की खुदाई करवाई थी। तब कई नामचीन हस्तियों ने उद्गम स्थल के आसपास पौधारोपण किया था। अब पिछले दो सालों से काली नदी की खुदाई का काम भी बंद चल रहा है। यहां तक कि उद्गम स्थल तालाब बनकर रह गया है।
विज्ञापन
-जल संरक्षण के लिए काली नदी की खुदाई का काम अतिशीघ्र पूरा कराना चाहिए। काली नदी को अगर पुनजीर्वित करना है तो शासन व प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।-मनोज कुमार, ग्रामीण, अंतवाड़ा।
-काली नदी के उद्गम स्थल के बीच में लगे बिजली के खंभों को प्रशासन की ओर से तुरंत हटवाया जाए। इसके अलावा काली नदी के उद्गम स्थल की सफाई कराई जाए।
-राजबीर एडवोकेट, अंतवाड़ा
- काली नदी के उद्गम स्थल की खुदाई होने पर कुछ दिन तक तो प्रशासन की ओर से अधिकारी भी आते जाते रहते थे, लेकिन पिछले एक साल से कोई अधिकारी उद्गम स्थल के हालात को देखने तक नहीं आया है।
-मुन्ना, ग्रामीण।
- क्या बोले एसडीएम खतौली
एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी का कहना है कि शासन की ओर से भी जल संरक्षण को लेकर लगातार आदेश जारी किए जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अंतवाड़ा में काली नदी के उद्गम स्थल की सफाई कराई जाएगी। इसके अलावा पौधारोपण भी कराया जाएगा।
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर, जानसठ। प्रसिद्ध काली नदी के पुनर्जीवन और जल संरक्षण के लिए मेरठ में मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह ने डीएम के बालाजी के साथ श्रमदान कर नदी के पुनर्जीवन का आगाज किया है जबकि काली नदी के उद्गम स्थल की स्थानीय जिला प्रशासन ने दो साल से कोई सुध नहीं ली है। उद्गम स्थल के बीच में बिजली के खंभे लगे हुए हैं, जिन्हें दो साल बाद भी प्रशासन नहीं हटवा पाया है। इतना ही नहीं उद्गम स्थल स्थल पर पौधों का कोई नामोनिशान नहीं बचा है। देखभाल नहीं होने से पौधे सूख चुके हैं।
तहसील खतौली के गांव अंतवाड़ा से काली नदी का उद्गम हुआ था। दो साल पूर्व जल संरक्षण के लिए काली नदी को पुनर्जीवित करने को उद्गम स्थल की खुदाई कराई गई थी। उद्गम स्थल के चारों ओर पौधारोपण भी किया गया था। उस वक्त कई नामचीन हस्तियों ने पौधारोपण और श्रमदान किया था। वर्तमान में गांव अंतवाड़ा में जहां काली नदी के उद्गम स्थल की खुदाई की गई थी, प्रशासन की उदासीनता के चलते वह स्थल अब तालाब की तरह तब्दील हो गया है।
विज्ञापन
500 साल पहले काली नदी का उद्गम हुआ
जानसठ। गांव अंतवाड़ा के बाबूराम, प्रताप सिंह, सतीश आदि ग्रामीणों ने बताया कि उनके बुजुर्ग बताते हैं कि 500 साल पूर्व गांव से ही काली नदी (तब नागिन नदी) का उद्गम हुआ था। धीरे-धीरे लोगों ने उद्गम स्थल पर कब्जा करके फसलों की बुआई शुरू कर दी थी। कई बार काली नदी की भूमि को खाली कराने को फसलों की जुताई कराई गई। सन 2019 में मेरठ की नीर फाउंडेशन के अध्यक्ष रमन त्यागी ने काली नदी को पुनजीर्वित करने के लिए शासन व प्रशासन के सहयोग से उद्गम स्थल की खुदाई करवाई थी। तब कई नामचीन हस्तियों ने उद्गम स्थल के आसपास पौधारोपण किया था। अब पिछले दो सालों से काली नदी की खुदाई का काम भी बंद चल रहा है। यहां तक कि उद्गम स्थल तालाब बनकर रह गया है।
विज्ञापन
-जल संरक्षण के लिए काली नदी की खुदाई का काम अतिशीघ्र पूरा कराना चाहिए। काली नदी को अगर पुनजीर्वित करना है तो शासन व प्रशासन को इस ओर ध्यान देना चाहिए।-मनोज कुमार, ग्रामीण, अंतवाड़ा।
-काली नदी के उद्गम स्थल के बीच में लगे बिजली के खंभों को प्रशासन की ओर से तुरंत हटवाया जाए। इसके अलावा काली नदी के उद्गम स्थल की सफाई कराई जाए।
-राजबीर एडवोकेट, अंतवाड़ा
- काली नदी के उद्गम स्थल की खुदाई होने पर कुछ दिन तक तो प्रशासन की ओर से अधिकारी भी आते जाते रहते थे, लेकिन पिछले एक साल से कोई अधिकारी उद्गम स्थल के हालात को देखने तक नहीं आया है।
-मुन्ना, ग्रामीण।
- क्या बोले एसडीएम खतौली
एसडीएम इंद्रकांत द्विवेदी का कहना है कि शासन की ओर से भी जल संरक्षण को लेकर लगातार आदेश जारी किए जाते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अंतवाड़ा में काली नदी के उद्गम स्थल की सफाई कराई जाएगी। इसके अलावा पौधारोपण भी कराया जाएगा।