सियासत: पश्चिम में 27 की नब्ज पकड़ेगा 42 साल पुराना लक्ष्मीनगर, प्रस्ताव रखने की तैयारी
मुजफ्फरनगर जिले का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर किए जाने की गूंज विधान परिषद में हुई तो 42 साल पुराने मुद्दे को फिर हवा मिल गई।
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मुजफ्फरनगर जिले का नाम बदलकर लक्ष्मीनगर किए जाने की गूंज विधान परिषद में हुई तो 42 साल पुराने मुद्दे को फिर हवा मिल गई। कैराना पलायन के मुद्दे पर विपक्ष की घेराबंदी कर चुकी भाजपा 2027 में मुजफ्फरनगर के नाम पर पश्चिम यूपी की नब्ज पकड़ सकती है। पिछले साल केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने भी जिले का नाम बदले जाने की बात कही थी। जिला पंचायत की बोर्ड बैठक में नाम बदलने का प्रस्ताव लाने की तैयारी है।
राम मंदिर आंदोलन के लिए मार्च 1983 में शहर के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान पर सबसे पहले हिंदू सम्मेलन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की बड़ी कामयाबी थी। इसी साल संघ ने मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मीनगर किए जाने के लिए अभियान शुरू किया। पत्राचार से लेकर अपने मकानों पर लक्ष्मीनगर लिखा गया।
वक्त के साथ नाम की मांग धीमी पड़ गई। एमएलसी मोहित बेनीवाल ने पहले विधान परिषद में जिले का नाम लक्ष्मीनगर रखे जाने की मांग की। बुधवार को वह लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिले और अपनी मांग को दोहराया।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुद्दे को हवा मिलने की संभावना बन रही है। आमजन के बीच बनने वाले माहौल को भांपकर भाजपा भविष्य की रणनीति तय करेगी। पश्चिम यूपी के सियासी समीकरण साधने के लिए नाम का मुद्दा बनाया जा सकता है।
जिला पंचायत में 12 मार्च को प्रस्ताव लाने की तैयारी
मुजफ्फरनगर जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. वीरपाल निर्वाल ने बताया कि मुजफ्फरनगर का नाम लक्ष्मीनगर किए का मुद्दा पुराना है। जिला पंचायत की 12 मार्च को होने वाली बोर्ड बैठक में अब नाम बदले जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। आम सहमति से प्रस्ताव पास हुआ तो यह शासन को भी भेजा जाएगा। जिले का नाम बदला जाना चाहिए।
लक्ष्मीनगर के नाम से भेजते थे चिट्ठी : शर्मा
पूर्व पालिकाध्यक्ष डॉ. सुभाष चंद शर्मा कहते हैं कि नाम बदलने की मांग पुरानी है। एमएलसी ने मुद्दे को उठाकर सही कार्य किया है। वह उम्मीद करते हैं कि सरकार नाम के मुद्दे पर कोई न कोई सार्थक कदम उठाएगी। लंबे समय तक संघ और भाजपा नेताओं ने लक्ष्मीनगर के नाम से ही पोस्टकार्ड भेजे हैं और वह सही पते पर पहुंचते थे।
आमजन की आवाज है लक्ष्मीनगर : सिंघल
आरएसएस नेता श्यामपाल सिंघल कहते हैं कि नाम की लड़ाई लंबे समय से चल रही है। जिले का नाम बदला जाना चाहिए। सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर फैसला करना चाहिए। यह जिले के आमजन की आवाज है।
कपिल देव अग्रवाल बोले थे, शुकतीर्थनगर
कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल ने शुकतीर्थ विकास परिषद के गठन के साथ ही जिले का नाम मुजफ्फरनगर के बजाए शुकतीर्थ नगर रखे जाने का सुझाव दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भी भेजा गया था। तर्क दिया गया कि शुकतीर्थ जिले का सबसे पौराणिक स्थल है। महाभारत काल और इसके बाद का इतिहास शुकतीर्थ में छिपा है, जबकि मुजफ्फरनगर नाम मुगलकाल में दिया गया था।
सरवट से इस तरह बना मुजफ्फरनगर
राजस्व रिकॉर्ड में शहर के सरवट को कभी परगना के रूप में जाना जाता था। सम्राट शाहजहां ने प्रमुख सरदार सैय्यद मुजफ्फर खान को सरवट जागीर के रूप में दिया था। उसने 1633 में सुजडू और आसपास के क्षेत्र को मिलाकर शहर की स्थापना की थी। बाद में उनके बेटे मुन्नवर लश्कर खान ने अपने पिता मुजफ्फर खान की याद में लगभग 391 साल पहले मुजफ्फरनगर नाम दिया था। ब्रिटिश काल में जिला घोषित हुआ।
आर्थिक प्रगति का आधार बनेगा लक्ष्मीनगर
एमएलसी मोहित बेनीवाल ने कहा कि साधु और संत लंबे समय से नाम बदलने की मांग करते आ रहे हैं। सांस्कृतिक गौरव, सभ्यता का प्रश्न है। एमएलसी ने कहा कि लक्ष्मीनगर नाम आर्थिक प्रगति का आधार बनेगा।