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शराब माफियाओं की तह तक नहीं पहुंच पा रही पुलिस
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मुजफ्फरनगर। नकली अंग्रेजी शराब के अवैध कारोबार का पहली बार खुलासा नहीं हुआ है। दो साल पहले मेरठ में तो एक साल पहले मुजफ्फरनगर में ही इसका खुलासा हो चुका है, लेकिन पुलिस कुछ शराब माफिया की गिरफ्तारी पर ही अपनी कार्रवाई पूरी कर इतिश्री कर लेती है। लेकिन आज तक इस सिंडिकेट की तह तक जाने का प्रयास नहीं किया। पुलिस ने यह जानने की कोशिश नहीं की कि ब्रांडेड शराब के होलमार्क, रेपर आदि के साथ ही शराब बनाने में प्रयुक्त होने वाला एक्स्ट्रा नेचुरल अल्कोहल उनके पास कहां से आता है। यदि पुलिस इसकी तह तक पहुंचती तो एक तरफ जहां इस अवैध शराब के कारोबार पर नकेल कसी हुई होती, वहीं इस सिंडिकेट से जुड़े तमाम लोग भी उजागर होते। जिसमें तमाम चौंकाने वाले नाम सामने आने की बात कही जा रही है।
27 दिसंबर 2021 में खतौली पुलिस और एसओजी टीम ने अवैध शराब के साथ 1 लाख 10 हजार ढक्कन, 1 लाख 58 हजार रेपर, 300 लीटर इएनए बरामद किया था। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि नकली होलोग्राम व रेपर के बारे में पता किया जा रहा हैं कि यह कहां पर बनाए व छापे जाते है। ढक्कन कहां बनाए जा रहे है। चार माह बीत चुके है, और यदि सूत्रों की माने तो पुलिस की जांच इस मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई।
इस बार थाना सिविल लाइन पुलिस ने एसओजी टीम के साथ भारी मात्रा में अवैध शराब और नकली होलोग्राम, रेपर व ढक्कन बरामद किए है। फिर से सवाल उठ चला है कि बरामद होलोग्राम व रेपर कहां बनाए व छापे जा रहे है। पुलिस शराब तस्करों को पकड़ लेती है लेकिन यह नहीं लगा पा रही कि इस अवैध कारोबार में कौन कौन लोग संलिप्त है।
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कहां से मिल रहा ईएनए
अवैध शराब बनाने के लिए ईएनए (एक्सट्रा नेचुरल अल्कोहल) की जरूरत होती है। जब कभी भी अवैध शराब बरामद हुई, तभी ईएनए भी बरामद हुआ है। लेकिन ईएनए किस डिस्टलरी या माध्यम से इन शराब माफियाओं तक पहुंचा, पुलिस जांच में आज तक इसका खुलासा नहीं हुआ। बड़ी बात ये है कि आबकारी विभाग भी इस पूरे प्रकरण पर दो कदम पीछे ही रहा है।
खंडहर भवन में बनती है शराब
खतौली हो या फिर थाना सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई। दोनों ही जगह शराब व अन्य सामान खंडहर से बरामद हुआ है। हालांकि सूत्रों की मानें तो शराब का कारोबार खंडहर नहीं बल्कि ऐसी नई कालोनियों के बीच हो रहा है, जहां पर मकान तो बन चुके हैं, लेकिन आबादी बहुत ही कम है। इसी का फायदा उठाकर ये शराब माफिया आराम से अपने कारोबार को अंजाम देते रहते हैं।
देशी हो विदेशी हर ब्रांड करते हैं तैयार
सिविल लाइन पुलिस को देशी अंग्रेजी शराब बरामद हुई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो महंगी विदेशी ब्रांड भी ये शराब माफिया आर्डर पर तैयार करते हैं। जिसकी सप्लाई पार्टियाें या चुनाव के समय मांग के अनुसार होती है। शराब माफियाओं के पास हर ब्रांड की बोतल, ढक्कन और रैपर मौजूद रहते हैं।
कबाड़ियों से करते हैं बोतल का भंडारण
शराब की खाली बोतलों को शराब माफिया कबाड़ियों से खरीदते हैं। हर ब्रांड की बोतल को छंटनी कर उसकी सफाई कर उस पर रैपर लगाकर रख दिया जाता है। इसके बाद जब जहां से जैसी मांग होती है, उसके अनुसार शराब तैयार कर सप्लाई कर दी जाती है।
कोट...
होलोग्राम, रेपर कहां बनते व छपते है, इस बारे में जांच के आदेश दिए है। - अर्पित विजय वर्गीय, एसपी सिटी।
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27 दिसंबर 2021 में खतौली पुलिस और एसओजी टीम ने अवैध शराब के साथ 1 लाख 10 हजार ढक्कन, 1 लाख 58 हजार रेपर, 300 लीटर इएनए बरामद किया था। उस समय अधिकारियों ने दावा किया था कि नकली होलोग्राम व रेपर के बारे में पता किया जा रहा हैं कि यह कहां पर बनाए व छापे जाते है। ढक्कन कहां बनाए जा रहे है। चार माह बीत चुके है, और यदि सूत्रों की माने तो पुलिस की जांच इस मामले में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई।
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इस बार थाना सिविल लाइन पुलिस ने एसओजी टीम के साथ भारी मात्रा में अवैध शराब और नकली होलोग्राम, रेपर व ढक्कन बरामद किए है। फिर से सवाल उठ चला है कि बरामद होलोग्राम व रेपर कहां बनाए व छापे जा रहे है। पुलिस शराब तस्करों को पकड़ लेती है लेकिन यह नहीं लगा पा रही कि इस अवैध कारोबार में कौन कौन लोग संलिप्त है।
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कहां से मिल रहा ईएनए
अवैध शराब बनाने के लिए ईएनए (एक्सट्रा नेचुरल अल्कोहल) की जरूरत होती है। जब कभी भी अवैध शराब बरामद हुई, तभी ईएनए भी बरामद हुआ है। लेकिन ईएनए किस डिस्टलरी या माध्यम से इन शराब माफियाओं तक पहुंचा, पुलिस जांच में आज तक इसका खुलासा नहीं हुआ। बड़ी बात ये है कि आबकारी विभाग भी इस पूरे प्रकरण पर दो कदम पीछे ही रहा है।
खंडहर भवन में बनती है शराब
खतौली हो या फिर थाना सिविल लाइन पुलिस की कार्रवाई। दोनों ही जगह शराब व अन्य सामान खंडहर से बरामद हुआ है। हालांकि सूत्रों की मानें तो शराब का कारोबार खंडहर नहीं बल्कि ऐसी नई कालोनियों के बीच हो रहा है, जहां पर मकान तो बन चुके हैं, लेकिन आबादी बहुत ही कम है। इसी का फायदा उठाकर ये शराब माफिया आराम से अपने कारोबार को अंजाम देते रहते हैं।
देशी हो विदेशी हर ब्रांड करते हैं तैयार
सिविल लाइन पुलिस को देशी अंग्रेजी शराब बरामद हुई है। लेकिन सूत्रों की मानें तो महंगी विदेशी ब्रांड भी ये शराब माफिया आर्डर पर तैयार करते हैं। जिसकी सप्लाई पार्टियाें या चुनाव के समय मांग के अनुसार होती है। शराब माफियाओं के पास हर ब्रांड की बोतल, ढक्कन और रैपर मौजूद रहते हैं।
कबाड़ियों से करते हैं बोतल का भंडारण
शराब की खाली बोतलों को शराब माफिया कबाड़ियों से खरीदते हैं। हर ब्रांड की बोतल को छंटनी कर उसकी सफाई कर उस पर रैपर लगाकर रख दिया जाता है। इसके बाद जब जहां से जैसी मांग होती है, उसके अनुसार शराब तैयार कर सप्लाई कर दी जाती है।
कोट...
होलोग्राम, रेपर कहां बनते व छपते है, इस बारे में जांच के आदेश दिए है। - अर्पित विजय वर्गीय, एसपी सिटी।