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Muzaffarnagar News: ईंट भट्ठों में चीड़ की पत्तियों का होगा प्रयोग
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मुजफ्फरनगर। वैकल्पिक ईंधन और भट्ठों की ऊष्मा दक्षता बढ़ाने को अनुसंधान में जुटी भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून की टीम जनपद में पहुंची।
ईंट निर्माता कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रमोद बालियान ने बताया कि ईंट भट्ठों में तकनीकी विकास और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने को भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून की टीम रामराज क्षेत्र के मलिक ब्रिक फील्ड पर अनुसंधान करने में लगी हुई है।
समिति अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने उनके साथ रहकर तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज आर्य ने बताया कि उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण चीड़ की पत्तियां है और सरकार उद्योगों में इनको वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के जंगलों में करीब 60 मिलियन मीट्रिक टन पिरूल यानी चीड़ की पत्तियों की उपलब्धता है और जिनका कैलोरी मान 5000 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम है। टीम ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उनका उद्देश्य ईंट भट्ठों की ऊष्मा दक्षता बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर कार्य करना है।
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प्रमोद कुमार ने इस प्रोजेक्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि चीड़ की पत्तियों का वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने से पहाड़ी वन क्षेत्र में स्थानीय इकोसिस्टम नहीं बिगड़ेगा और साथ में क्षेत्रीय मजदूरों के लिए रोजगार सृजित होगा। इस मौके पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ पंकज आर्य, सीनियर टेक्निकल ऑफीसर सतीश कुमार, सीनियर टेक्निकल अधिकारी मनोज कुमार उनकी सपोर्टिंग टीम,सुखेंद्र तोमर, बिट्टू उर्फ ओमपाल सिंह आदि मौजूद रहे।
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ईंट निर्माता कल्याण समिति के अध्यक्ष प्रमोद बालियान ने बताया कि ईंट भट्ठों में तकनीकी विकास और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने को भारतीय पेट्रोलियम संस्थान देहरादून की टीम रामराज क्षेत्र के मलिक ब्रिक फील्ड पर अनुसंधान करने में लगी हुई है।
समिति अध्यक्ष प्रमोद कुमार ने उनके साथ रहकर तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की। प्रधान वैज्ञानिक डॉ. पंकज आर्य ने बताया कि उत्तराखंड के जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण चीड़ की पत्तियां है और सरकार उद्योगों में इनको वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने पर जोर दे रही है।
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उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के जंगलों में करीब 60 मिलियन मीट्रिक टन पिरूल यानी चीड़ की पत्तियों की उपलब्धता है और जिनका कैलोरी मान 5000 किलो कैलोरी प्रति किलोग्राम है। टीम ने बताया कि इस प्रोजेक्ट में उनका उद्देश्य ईंट भट्ठों की ऊष्मा दक्षता बढ़ाना, प्रदूषण कम करना और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर कार्य करना है।
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प्रमोद कुमार ने इस प्रोजेक्ट की प्रशंसा करते हुए कहा कि चीड़ की पत्तियों का वैकल्पिक ईंधन के तौर पर इस्तेमाल होने से पहाड़ी वन क्षेत्र में स्थानीय इकोसिस्टम नहीं बिगड़ेगा और साथ में क्षेत्रीय मजदूरों के लिए रोजगार सृजित होगा। इस मौके पर प्रधान वैज्ञानिक डॉ पंकज आर्य, सीनियर टेक्निकल ऑफीसर सतीश कुमार, सीनियर टेक्निकल अधिकारी मनोज कुमार उनकी सपोर्टिंग टीम,सुखेंद्र तोमर, बिट्टू उर्फ ओमपाल सिंह आदि मौजूद रहे।