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दो परिवारों ने झेला पेरिस अटैक का ‘खौफ’
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 16 Nov 2015 12:22 AM IST
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मुजफ्फरनगर। पेरिस में आतंकी अटैक से दुनिया में फैले खौफ और पीड़ा से शहर के दो परिवारों की सांसें भी अटकी रहीं। पटेल नगर में रह रहे पिता जगदीश जैन ने फ्रांस से आई कॉल में जब तक बेटे की आवाज नहीं सुन ली, उन्हें सुकून नहीं मिला। पेरिस में बसे बहन और बहनोई की कुशलता जानने के लिए राजीव का परिवार बेचैन हो उठा।
पेरिस में दहशतगर्दों के हमले की पीड़ा और भय शहर में भी महसूस किया गया। सर्राफ जगदीश जैन (77) को जब फ्रांस की राजधानी पेरिस में खूनखराबे की खबर मिली तो वे बेचैन हो उठे। बेटे नीरज जैन से बात करने के लिए फोन मिलाया, लेकिन संचार सेवा ठप थी। पांच-छह घंटे डर में बीते। साढ़े तीन बजे खुद ही नीरज का फोन आया-‘पापा, हम सब ठीक हैं’। यह सुनकर उन्हें राहत मिली और उन्होंने नीरज से दिल्ली में छोटे भाई संदीप जैन के साथ गई मां प्रभा जैन से भी बात करने को कहा।
बुुजुर्ग जगदीश बताते हैं कि वर्ष 1992 से बड़ा बेटा नीरज पेरिस के उपनगर लील में रेडीमेड गारमेंट्स का कारोबार करता है। पत्नी रमोला जैन और बच्चों के साथ नीरज को वहीं की नागरिकता मिल चुकी है। परिवार की कुशलक्षेम जानने को जैन के घर रिश्तेदारों की मौजूदगी रही।
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पालिका कांट्रेक्टर राजीव गर्ग को भी पेरिस में हुए आतंकी हमले ने विचलित कर दिया। बहन खुशबू और बहनोई विपिन मित्तल पेरिस में दो साल से रह रहे हैं। मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत विपिन की खैरियत जानने को परिवार में बेचैनी रही। संपर्क नहीं होने पर राजीव ने खुशबू की ससुराल मुरादाबाद फोन मिलाया। जो सूचना मिली, उससे गर्ग ने राहत की सांस ली।
शादी में शामिल होने के लिए खुशबू और विपिन मुरादाबाद के हसनपुर आए हुए मिले।
बहन से बात करने के बाद आईएस के आतंकी हमले का खौफ गर्ग के चेहरे से मिट सका। उन्हें दो दिन बाद फ्रांस लौटना था, पेरिस के हालात जानने के बाद ही वह जाएंगे।
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पेरिस में दहशतगर्दों के हमले की पीड़ा और भय शहर में भी महसूस किया गया। सर्राफ जगदीश जैन (77) को जब फ्रांस की राजधानी पेरिस में खूनखराबे की खबर मिली तो वे बेचैन हो उठे। बेटे नीरज जैन से बात करने के लिए फोन मिलाया, लेकिन संचार सेवा ठप थी। पांच-छह घंटे डर में बीते। साढ़े तीन बजे खुद ही नीरज का फोन आया-‘पापा, हम सब ठीक हैं’। यह सुनकर उन्हें राहत मिली और उन्होंने नीरज से दिल्ली में छोटे भाई संदीप जैन के साथ गई मां प्रभा जैन से भी बात करने को कहा।
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बुुजुर्ग जगदीश बताते हैं कि वर्ष 1992 से बड़ा बेटा नीरज पेरिस के उपनगर लील में रेडीमेड गारमेंट्स का कारोबार करता है। पत्नी रमोला जैन और बच्चों के साथ नीरज को वहीं की नागरिकता मिल चुकी है। परिवार की कुशलक्षेम जानने को जैन के घर रिश्तेदारों की मौजूदगी रही।
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पालिका कांट्रेक्टर राजीव गर्ग को भी पेरिस में हुए आतंकी हमले ने विचलित कर दिया। बहन खुशबू और बहनोई विपिन मित्तल पेरिस में दो साल से रह रहे हैं। मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत विपिन की खैरियत जानने को परिवार में बेचैनी रही। संपर्क नहीं होने पर राजीव ने खुशबू की ससुराल मुरादाबाद फोन मिलाया। जो सूचना मिली, उससे गर्ग ने राहत की सांस ली।
शादी में शामिल होने के लिए खुशबू और विपिन मुरादाबाद के हसनपुर आए हुए मिले।
बहन से बात करने के बाद आईएस के आतंकी हमले का खौफ गर्ग के चेहरे से मिट सका। उन्हें दो दिन बाद फ्रांस लौटना था, पेरिस के हालात जानने के बाद ही वह जाएंगे।