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गन्ना भुगतान नहीं हुआ तो 14 फरवरी को कलक्ट्रेट में होगी पंचायत
Wed, 30 Jan 2019 12:09 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Wed, 30 Jan 2019 12:09 AM IST
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किसानों से वार्ता करते डीएम और एसएसपी।
- फोटो : अमर उजाला
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भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत रेलवे ट्रैक जाम के दौरान जिला प्रशासन पर जमकर भड़के। उन्होंने कहा कि जिले में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं है। धरना खत्म होने के बाद उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चीनी मिलों ने दस फरवरी तक समस्त भुगतान नहीं किया तो 14 फरवरी को कलक्ट्रेट में पंचायत होगी। साथ ही उन्होंने 14 फरवरी को प्रदेश व्यापारी आंदोलन करने भी चेतावनी दी, जिसमें पूरे प्रदेश में भाकियू कार्यकर्ता सरकारी दफ्तरों में तालाबंदी करेंगे।
भाकियू नेता राकेश टिकैत ने पत्रकारों से कहा कि जिस जिले के डीएम के कहने के बाद भी चीनी मिलों के प्रबंधक बैठक में नहीं आते, ऐसे डीएम का क्या लाभ। मंगलवार की घटना से ऐसा लगता है कि जिले में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। हमने ट्रैक जाम किया, लेकिन डीएम और एसएसपी छह घंटे बाद पहुंचे। जिले में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। रेलवे ट्रैक जाम होने से जो यात्री परेशान हुए हैं, उसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार हैं।
हम लोग तो सीधे कहते हैं कि यदि हमारी गलती है तो हमें गिरफ्तार करें। जिले के किसान प्रतिदिन 18 करोड़ का गन्ना मिलों में डालते हैं, भुगतान भी इसी गति से होना चाहिए। डीएम राजीव शर्मा, डीसीओ डॉ आरडी द्विवेदी और चीनी मिलों के जीएम ने किसानों को गन्ना भुगतान का आश्वासन दिया है। यदि 10 फरवरी तक भुगतान नहीं होता है भाकियू 14 फरवरी को कलक्ट्रेट में किसान पंचायत का आयोजन करेगी। उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष कहा कि ये सरकार की नाकामी है कि शुगर मिल अधिकारियों ने डीएम की बैठक का बहिष्कार करते हुए गन्ना भुगतान करने को साफ इंकार कर दिया।
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भुगतान का चार्ट बनाएंगी मिले : डीएम
मुजफ्फरनगर। डीएम राजीव शर्मा ने किसानों का धरना समाप्त होने के बाद कहा कि चीनी मिलों पर भुगतान में तेजी लाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। चीनी मिलों के प्रबंधकों से कहा गया है कि वह चार्ट तैयार कर लें। किसानों भुगतान किस तरह करेंगे इसके लिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी करें।
शाम को छावनी बन गया रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म
मुजफ्फरनगर। रेलवे स्टेशन पर किसानों ने जिस समय धरना शुरू किया, उस समय उनकी संख्या मात्र 50 ही रही होगी। धरना जिस तरह बढ़ता गया ग्रामीण क्षेत्र से किसानों की भीड़ बढ़ती गई, उसी तरह लगातार पुलिस बल भी बढ़ता रहा। शाम तक रेलवे स्टेशन का प्लेट फार्म छावनी में तब्दील हो गया। जिला प्रशासन को यह अंदाजा नहीं था कि 50-60 की संख्या में मौजूद किसान रेलवे स्टेशन पर ट्रैक जाम शुरू कर सकते हैं।
रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही भाकियू नेताओं ने अपने पदाधिकारियों को फोन खड़खड़ा दिए और शाम तक किसान बड़ी संख्या में एकत्र हो गए। इसी तरह किसानों को ट्रैक जाम करने की सूचना पर सबसे पहले सिविल लाईन और नई मंडी पुलिस पहुंची, इसके बाद कोतवाली पुलिस को भी बुलाया गया। समस्या को गंभीर देख बाद में महिला पुलिस, आरएएफ की टुकड़ी और आसपास के थानों की पुलिस को भी रेलवे स्टेशन पर बुलाया गया।
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भाकियू नेता राकेश टिकैत ने पत्रकारों से कहा कि जिस जिले के डीएम के कहने के बाद भी चीनी मिलों के प्रबंधक बैठक में नहीं आते, ऐसे डीएम का क्या लाभ। मंगलवार की घटना से ऐसा लगता है कि जिले में प्रशासन नाम की कोई चीज नहीं रह गई है। हमने ट्रैक जाम किया, लेकिन डीएम और एसएसपी छह घंटे बाद पहुंचे। जिले में कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज नहीं है। रेलवे ट्रैक जाम होने से जो यात्री परेशान हुए हैं, उसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार हैं।
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हम लोग तो सीधे कहते हैं कि यदि हमारी गलती है तो हमें गिरफ्तार करें। जिले के किसान प्रतिदिन 18 करोड़ का गन्ना मिलों में डालते हैं, भुगतान भी इसी गति से होना चाहिए। डीएम राजीव शर्मा, डीसीओ डॉ आरडी द्विवेदी और चीनी मिलों के जीएम ने किसानों को गन्ना भुगतान का आश्वासन दिया है। यदि 10 फरवरी तक भुगतान नहीं होता है भाकियू 14 फरवरी को कलक्ट्रेट में किसान पंचायत का आयोजन करेगी। उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष कहा कि ये सरकार की नाकामी है कि शुगर मिल अधिकारियों ने डीएम की बैठक का बहिष्कार करते हुए गन्ना भुगतान करने को साफ इंकार कर दिया।
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भुगतान का चार्ट बनाएंगी मिले : डीएम
मुजफ्फरनगर। डीएम राजीव शर्मा ने किसानों का धरना समाप्त होने के बाद कहा कि चीनी मिलों पर भुगतान में तेजी लाने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। चीनी मिलों के प्रबंधकों से कहा गया है कि वह चार्ट तैयार कर लें। किसानों भुगतान किस तरह करेंगे इसके लिए अपनी तरफ से पूरी तैयारी करें।
शाम को छावनी बन गया रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म
मुजफ्फरनगर। रेलवे स्टेशन पर किसानों ने जिस समय धरना शुरू किया, उस समय उनकी संख्या मात्र 50 ही रही होगी। धरना जिस तरह बढ़ता गया ग्रामीण क्षेत्र से किसानों की भीड़ बढ़ती गई, उसी तरह लगातार पुलिस बल भी बढ़ता रहा। शाम तक रेलवे स्टेशन का प्लेट फार्म छावनी में तब्दील हो गया। जिला प्रशासन को यह अंदाजा नहीं था कि 50-60 की संख्या में मौजूद किसान रेलवे स्टेशन पर ट्रैक जाम शुरू कर सकते हैं।
रेलवे स्टेशन पर पहुंचते ही भाकियू नेताओं ने अपने पदाधिकारियों को फोन खड़खड़ा दिए और शाम तक किसान बड़ी संख्या में एकत्र हो गए। इसी तरह किसानों को ट्रैक जाम करने की सूचना पर सबसे पहले सिविल लाईन और नई मंडी पुलिस पहुंची, इसके बाद कोतवाली पुलिस को भी बुलाया गया। समस्या को गंभीर देख बाद में महिला पुलिस, आरएएफ की टुकड़ी और आसपास के थानों की पुलिस को भी रेलवे स्टेशन पर बुलाया गया।