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Muzaffarnagar News: कूड़े से कमाई की ओर बढ़ी पालिका, पहला एमआरएफ सेंटर शुरू

Tue, 18 Feb 2025 02:54 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 18 Feb 2025 02:54 AM IST
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Palika moves towards earning from garbage, first MRF center started
फोटो सहित-
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संवाद न्यूज एजेंसी
मुजफ्फरनगर। कूड़े से कमाई की परियोजना अब कागजों से निकलकर धरातल पर आ गई है। कूड़े से कमाई के प्रमुख साधन मल्टी रिकवरी फैसिलिटी (एमआरएफ) सेंटर का शुभारंभ हो गया। पहले दिन मशीनों का ट्रायल लेते हुए कर्मचारियों को वेस्ट सेग्रीकेशन का प्रशिक्षण दिया गया। पालिका ने पहले एमआरएफ सेंटर का संचालन शून्य खर्च आधारित अनुबंध पर एनजीओ को सौंपा है। यहां आने वाले कूड़े का पृथक्करण करते हुए प्लास्टिक और दूसरी उपयोगी चीजों की बिक्री से होने वाली कमाई पालिका की आय बढ़ाएगी।

वार्ड-15 एकता विहार रुड़की रोड पर स्थापित कराए गए पहले एमआरएफ सेंटर की शुरुआत पालिका ईओ डॉ़ प्रज्ञा सिंह ने फीता काटकर की। इसके साथ ही वेस्ट सेग्रीकेशन के लिए लगाई गई विभिन्न मशीनों को मैन पावर में कूड़े के साथ परखने का काम किया गया। कर्मचारियों को मशीनों पर कार्य करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के डीपीएम सुशील कुमार ने प्रशिक्षण भी दिया। मंगलवार से सेंटर पर पांच वार्डों से कूड़ा पहुंचाने के निर्देश नगर स्वास्थ्य अधिकारी को दिए गए।
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ईओ ने बताया कि अभी पालिका ने एनजीओ महाराज श्रीजी एक पहल पर्यावरण और शिक्षा की ओर के साथ अनुबंध किया है। इसके अध्यक्ष राहुल शर्मा और सचिव गौहर वाल्मीकि के साथ तीन माह का अनुबंध हुआ है। पालिका एनजीओ को कोई खर्च नहीं देगी, एमआरएफ सेंटर पर उसके आसपास के पांच से दस वार्डों से निकलने वाला कूड़ा सफाई कर्मियों और एमआईटूसी कंपनी के वाहनों के माध्यम से पहुंचाया जाएगा।
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-पालिका की हो सकती है 10 लाख वार्षिक की आय
एनजीओ की ओर से लगाये गए छह कर्मचारी मशीनों के माध्यम से कूड़े का सेग्रीकेशन करेंगे और प्लास्टिक, लोहा, चमड़ा एवं अन्य उपयोगी वस्तुओं को छांटने के बाद मशीनों के माध्यम से उनका प्रोसेस कर बाजार में बिक्री की जाएगी। इससे होने वाली आय में से ही पालिका एनजीओ को तय रकम रखने का अधिकार देगी। शेष रकम पालिका के कोष में आएगी। अनुमान है कि अनुबंध के बाद पालिका को इस स्रोत से 10 लाख रुपये वार्षिक की तक आय हो सकेगी।



-दो और लगेंगे एमआरएफ सेंटर, रेक्टीकर्स बीनेंगे कूड़ा
अगले एक माह में दो ओर एमआरएफ सेंटर क्रियाशील होने जा रहे हैं। इनमें से एक एकता विहार और दूसरा बीबीपुर में बनाया गया है। यहां मशीनों की खरीद के लिए टैंडर हो चुका है। एक एमआरएफ सेंटर के निर्माण पर करीब 50 लाख रुपये से ज्यादा का खर्च हुआ है। ईओ ने बताया कि एनजीओ के साथ जो छह कर्मचारी लगाए गए हैं, वो रेक्टीकर्स यानी कूड़ा बीनने वाले लोग हैं। शासनादेश में इन लोगों से ही कार्य करने के लिए व्यवस्था दी गई है।
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