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अमेरिकी राष्ट्रपति के विरोध में उतरा मुस्लिम समाज, जुलूस निकाले
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 22 Dec 2017 11:56 PM IST
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मुजफ्फरनगर में अमेरिका के खिलाफ प्रदर्शन करते मुस्लिम समाज के लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के येरुशलम को इजराइल की राजधानी बनाने के बयान पर मुस्लिम समाज मुखर हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के विरोध में शुक्रवार को मुस्लिम समाज ने सड़कों पर उतरकर आक्रोश जताया। उलमा ने कहा कि अमेरिका और ट्रंप मुस्लिमों के दुश्मन हैं। इसके विरोध में मुस्लिम समाज ने जगह-जगह रैलियां निकालकर रोष प्रकट किया। अफसरों को संयुक्त राष्ट्र संघ के नाम ज्ञापन दिया गया।
जुमे की नमाज के बाद जमियत-ए-उलमा के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने फक्खरशाह चौक पर प्रदर्शन किया। संगठन के महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने कहा कि अमेरिका हमेशा ही फिलिस्तीन पर इजराइल के नाजायज कब्जे को मान्यता देता रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किबला-ए-अव्वल मस्जिद अक्शा के शहर येरुशलम इजराइल की राजधानी बनाने पर तुला है। कहा कि अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा दहशतगर्द है।
ट्रंप के मंसूबों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। नमाज के बाद बड़ी तादात में मुस्लिम समाज सड़कों पर उतर आया और जमकर नारेबाजी। कार्यकर्ताओं ने भारत सरकार से मामले में दखल देकर अमेरिका की इस साजिश को नाकाम करने का आग्रह किया है। जमियत ने फिलिस्तीन की आजादी के साथ ही येरुशलम को उसकी राजधानी बनाने की मांग की।
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मामले को लेकर मुस्लिम समाज ने सरवट, खालापार, लद्दावाला, कंबलवाला बाग, बकरा मार्केट, रुड़की रोड के साथ मीनाक्षी चौक, महावीर चौक, सुजडू चुंगी आदि स्थानों पर एकत्र होकर जुलूस निकाला।
जुलूस के रुप में सैकड़ों कार्यकर्ता मीनाक्षी चौक पर एकत्र हुए। हालात बेकाबू होते देख अफसरों ने जमियत उलमा से कलक्ट्रेट न पहुंचने की अपील की। बाद में अधिकारी काफिले के साथ फक्खरशाह चौक पहुंचे। यहां जमियत-ए-उलमा के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मौलाना ताहिर कासमी, मुफ्ती अयाज, मुफ्ती जाहिद, मौलाना शाहिद, मोहम्मद अजहर, मोहम्मद आसिफ मोहम्मद हाजी अंजुम,
कारी अब्दुल माजिद, कारी आदिल, मौलाना अब्दुल खालिक, मौलाना अब्दुल कय्यूम, हाफिज इकराम, मोहम्मद सुलेमान, मोहम्मद शिबली, मुफ्ती शुएब, नौशाद कुरैशी, मोहम्मद आदिल, कारी अमीर आलम, इंतजार राणा, मौलाना सालिम, हाफिज यूसुफ व शमशाद कुरैशी आदि मौजूद रहे।
खुफिया विभाग, पुलिस अलर्ट रहे
मुस्लिम समाज के विरोध प्रदर्शन पर खुफिया विभाग और पुलिस प्रशासन भी अलर्ट रही। शिवचौक के साथ मीनाक्षी चौक पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि भीड़ के कारण कई बार जाम के हालात बने। जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को पसीने छूट गए।
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जुमे की नमाज के बाद जमियत-ए-उलमा के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने फक्खरशाह चौक पर प्रदर्शन किया। संगठन के महासचिव कारी जाकिर हुसैन ने कहा कि अमेरिका हमेशा ही फिलिस्तीन पर इजराइल के नाजायज कब्जे को मान्यता देता रहा है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किबला-ए-अव्वल मस्जिद अक्शा के शहर येरुशलम इजराइल की राजधानी बनाने पर तुला है। कहा कि अमेरिका विश्व का सबसे बड़ा दहशतगर्द है।
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ट्रंप के मंसूबों को सफल नहीं होने दिया जाएगा। नमाज के बाद बड़ी तादात में मुस्लिम समाज सड़कों पर उतर आया और जमकर नारेबाजी। कार्यकर्ताओं ने भारत सरकार से मामले में दखल देकर अमेरिका की इस साजिश को नाकाम करने का आग्रह किया है। जमियत ने फिलिस्तीन की आजादी के साथ ही येरुशलम को उसकी राजधानी बनाने की मांग की।
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मामले को लेकर मुस्लिम समाज ने सरवट, खालापार, लद्दावाला, कंबलवाला बाग, बकरा मार्केट, रुड़की रोड के साथ मीनाक्षी चौक, महावीर चौक, सुजडू चुंगी आदि स्थानों पर एकत्र होकर जुलूस निकाला।
जुलूस के रुप में सैकड़ों कार्यकर्ता मीनाक्षी चौक पर एकत्र हुए। हालात बेकाबू होते देख अफसरों ने जमियत उलमा से कलक्ट्रेट न पहुंचने की अपील की। बाद में अधिकारी काफिले के साथ फक्खरशाह चौक पहुंचे। यहां जमियत-ए-उलमा के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस दौरान मौलाना ताहिर कासमी, मुफ्ती अयाज, मुफ्ती जाहिद, मौलाना शाहिद, मोहम्मद अजहर, मोहम्मद आसिफ मोहम्मद हाजी अंजुम,
कारी अब्दुल माजिद, कारी आदिल, मौलाना अब्दुल खालिक, मौलाना अब्दुल कय्यूम, हाफिज इकराम, मोहम्मद सुलेमान, मोहम्मद शिबली, मुफ्ती शुएब, नौशाद कुरैशी, मोहम्मद आदिल, कारी अमीर आलम, इंतजार राणा, मौलाना सालिम, हाफिज यूसुफ व शमशाद कुरैशी आदि मौजूद रहे।
खुफिया विभाग, पुलिस अलर्ट रहे
मुस्लिम समाज के विरोध प्रदर्शन पर खुफिया विभाग और पुलिस प्रशासन भी अलर्ट रही। शिवचौक के साथ मीनाक्षी चौक पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। हालांकि भीड़ के कारण कई बार जाम के हालात बने। जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को पसीने छूट गए।