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294 लोगों को ही मिला सौ दिन का रोजगार
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मनरेगा में केवल 294 श्रमिकों को ही मिला सौ दिन का रोजगार
मुजफ्फरनगर। जिले में मनरेगा की स्थिति बेहद निराशाजनक है। पूरा वित्तीय वर्ष व्यतीत होने को है, लेकिन पंजीकृत श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने में सिस्टम फेल रहा है। अब तक मात्र 15257 लोगों को ही काम दिया गया है। स्थिति यह है कि पूरे सौ दिन का रोजगार पाने वालों की संख्या मात्र 294 ही है।
मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत मजदूरों को साल में सौ दिन का रोजगार मुहैया कराने का प्राविधान है। श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने में जिले की स्थिति बेहद खराब है। जनपद में 10640 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं। वित्तीय वर्ष खत्म होने को है, लेकिन अभी तक मात्र 15257 मजदूरों को ही रोजगार दिया जा सका है। ऐसा भी नहीं है कि लोग रोजगार की मांग नहीं करते। अब तक 17640 पंजीकृत श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी, लेकिन इसके विपरीत 17526 को ही रोजगार का ऑफर दिया गया।
कच्चे काम की उपलब्धता बेहद कम
मनरेगा के तहत मिट्टी के काम कराए जाते हैं। कच्ची मिट्टी के कार्यों की जिले में उपलब्धता कम है। इसके साथ ही मजदूरी भी काफी कम है। सामान्य तौर पर जिले में दिहाड़ी 300 से 350 रुपये प्रतिदिन चल रही है, लेकिन मनरेगा में 182 रुपये ही मिलते हैं। विभाग भी मनरेगा के कार्यों में ज्यादा रुचि नहीं लेते हैं। एमआईएस फीडिंग व अन्य झंझटों से बचने के लिए ग्राम पंचायतों के अलावा अन्य विभाग मनरेगा में काम कराना पसंद नहीं कर रहे हैं।
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100 दिन रोजगार देने में ब्लॉकों की स्थिति
ब्लॉक 100 दिन रोजगार पाने वाले श्रमिक
बघरा 05
बुढ़ाना 68
चरथावल 03
जानसठ 04
खतौली 02
मोरना 101
मुजफ्फरनगर 99
पुरकाजी 10
शाहपुर 02
कुल 294
पंजीकृत मजदूरों की डिमांड के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने के प्रयास किए जा रहे हैं - जय सिंह यादव, परियोजना निदेशक, डीआरडीए।
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मुजफ्फरनगर। जिले में मनरेगा की स्थिति बेहद निराशाजनक है। पूरा वित्तीय वर्ष व्यतीत होने को है, लेकिन पंजीकृत श्रमिकों को रोजगार मुहैया कराने में सिस्टम फेल रहा है। अब तक मात्र 15257 लोगों को ही काम दिया गया है। स्थिति यह है कि पूरे सौ दिन का रोजगार पाने वालों की संख्या मात्र 294 ही है।
मनरेगा के अंतर्गत पंजीकृत मजदूरों को साल में सौ दिन का रोजगार मुहैया कराने का प्राविधान है। श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने में जिले की स्थिति बेहद खराब है। जनपद में 10640 मनरेगा मजदूर पंजीकृत हैं। वित्तीय वर्ष खत्म होने को है, लेकिन अभी तक मात्र 15257 मजदूरों को ही रोजगार दिया जा सका है। ऐसा भी नहीं है कि लोग रोजगार की मांग नहीं करते। अब तक 17640 पंजीकृत श्रमिकों ने रोजगार की मांग की थी, लेकिन इसके विपरीत 17526 को ही रोजगार का ऑफर दिया गया।
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कच्चे काम की उपलब्धता बेहद कम
मनरेगा के तहत मिट्टी के काम कराए जाते हैं। कच्ची मिट्टी के कार्यों की जिले में उपलब्धता कम है। इसके साथ ही मजदूरी भी काफी कम है। सामान्य तौर पर जिले में दिहाड़ी 300 से 350 रुपये प्रतिदिन चल रही है, लेकिन मनरेगा में 182 रुपये ही मिलते हैं। विभाग भी मनरेगा के कार्यों में ज्यादा रुचि नहीं लेते हैं। एमआईएस फीडिंग व अन्य झंझटों से बचने के लिए ग्राम पंचायतों के अलावा अन्य विभाग मनरेगा में काम कराना पसंद नहीं कर रहे हैं।
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100 दिन रोजगार देने में ब्लॉकों की स्थिति
ब्लॉक 100 दिन रोजगार पाने वाले श्रमिक
बघरा 05
बुढ़ाना 68
चरथावल 03
जानसठ 04
खतौली 02
मोरना 101
मुजफ्फरनगर 99
पुरकाजी 10
शाहपुर 02
कुल 294
पंजीकृत मजदूरों की डिमांड के अनुसार रोजगार उपलब्ध कराया जाता है। ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने के प्रयास किए जा रहे हैं - जय सिंह यादव, परियोजना निदेशक, डीआरडीए।