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जूम एप और वीडियो कॉल सें भविष्य संवारने की तैयारी

Wed, 19 May 2021 12:10 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 19 May 2021 12:10 AM IST
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Online education will start in schools and colleges from May 20
20 मई से स्कूल-कॉलेजों में प्रारंभ होगी ऑनलाइन पढ़ाई
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मुजफ्फरनगर। कोविड की दूसरी लहर में विद्यार्थियों का भविष्य संवारने के लिए स्कूल-कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई की तैयारी हो गई है। एक बार फिर से ग्रुपों से जोड़ कर जूम एप और वीडियो क्लिप से छात्र-छात्राओं को पढ़ाने की कवायद होगी। एंड्रायड़ फोन की कमी और कमजोर नेटवर्क गांव-देहात में पढ़ाई में बाधक बनेगा। शहरों को छोड़ दे तो ऑनलाइन शिक्षा प्रणाली में कम विद्यार्थी कामयाब हो पाते हैं। शासन के फरमान के बाद स्कूल प्रबंधन विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन पढ़ाई का मसौदा तैयार करने में जुट गया है। नए सत्र में प्रवेश नहीं होने से स्कूलों में सुचारु रूप से पढ़ाई होने में व्यावहारिक दिक्कत आएगी।
क्या कहते हैं शिक्षाविद्?
एंड्रायड फोन की किल्लत बनती है बाधा
पहले की तरह इस बार भी कॉलेज के शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई को तैयार हैं। शिक्षकों ने ग्रुप बनाकर छात्र-छात्राओं को जोड़ रखा है। जिनके पास मोबाइल फोन नहीं है, वह दूसरों के घर जाकर पढ़ाई करते थे। इस बार ग्रामीण अंचलों में संक्रमण बढ़ने से यह संभव नहीं हो पाएगा। बेवजह घर से बाहर निकलना खतरा बन सकता है। अभिभावकों के सामने एंड्रायड फोन की कमी से 70 से 75 प्रतिशत बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई हो पाती है।
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शिवकुमार यादव प्रधानाचार्य डीएवी इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर
कमजोर नेटवर्क बनता है परेशानी का सबब
कॉलेज में अभी नए प्रवेश नहीं हुए हैं। कक्षा छह से नौ तक और 11 वीं में नए प्रवेश होने हैं। अभी कोविड़ की दूसरी लहर में कोरोना कर्फ्यू के दौरान शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई का खाका तैयार नहीं किया है। शासन के आदेशों के अनुसार पढ़ाई कराई जाएगी। गांवों में ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों को दिक्कतें आती हैं। हर अभिभावकों की सामर्थ्य मोबाइल फोन रिचार्ज कराने की नहीं है। यही वजह है काफी बच्चे माकूल पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं। कोविड महामारी में घर रहकर बचाव ही बेहतर है।
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विनीत चौहान, प्रधानाचार्य, एमएम इंटर कॉलेज मुजफ्फरनगर
व्हाट्सअप ग्रुपों पर पीडीएफ फाइल से पढ़ाई
शासन के नए आदेश अभी नहीं मिले हैं। ऑनलाइन पढ़ाई पहले भी चल रही थी। शिक्षक ब्लैक बोर्ड पर लिखकर व्हाट्सअप ग्रुपों में विषयवार पाठ्य सामग्री बच्चों को भेजते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में 75-80 फीसदी बच्चे ही जुड़ पाते है। शिक्षकों द्वारा पीरियड के निर्धारित समय पर काफी बच्चें रूबरू नहीं होते। उन्हें पीडीएफ फाइल भेजी जाती है।
रोहित सिंह, प्रबंधक, चौधरी अजब सिंह मेमोरियल पब्लिक स्कूल भौराकलां
गुगल एप और जूम एप से भविष्य संवारने की कवायद
गुगल मीट, जूम एप पर शिक्षकों ने पहले से ही ग्रुप बना रखें है। कक्षा 10 को छोड़ स्कूल में कक्षा एक से 11 तक सभी बच्चों को शासन के निर्देशों पर प्रमोट कर दिया है। ऑनलाइन पढ़ाई के लिए लिंक भेजकर विद्यार्थियों को जोड़ा जाता है। लेकिन अभी नए प्रवेश नहीं हो पाए और बच्चों ने पाठ्य पुस्तकें नहीं ली, जिससे पढ़ाई में दिक्कत आनी स्वाभाविक है।

अनघ सिंघल, डायरेक्टर पीआर पब्लिक स्कूल पचेंडा रोड, गांधी कालोनी
शासन के आदेशों का करेंगे पालन
बच्चों की जूम कक्षाएं पूर्ववत चल रही हैं। स्कूल में 20 मई तक ऑनलाइन पढ़ाई प्रस्तावित थी। शासन के नए आदेश का पालन करने को शिक्षक तैयार है। गांवों में 35-40 प्रतिशत बच्चे ऑनलाइन जुड़ते हैं। उनके अभिभावक संतुष्ट है। शिक्षकों द्वारा घर रहने के बावजूद बच्चों की समस्या का निदान ऑनलाइन कराया जाता है। नेटवर्क की समस्या आने पर वीडियो क्लिप भेजकर ज्ञान तराशने का प्रयास किया जाता है। बच्चों को प्रमोट कर दिया है। उन्हें कक्षावार कोर्स का ज्ञान कराया जाएगा।
आशुतोष शर्मा, प्रधानाचार्य, गुरुकुल पब्लिक स्कूल कुटेसरा
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