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खाद का राज खंगालने में लगे अफसर

Fri, 21 Aug 2020 03:12 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2020 03:12 PM IST
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Officers engaged in exploring the rule of manure
खाद का राज खंगालने में जुटे अफसर
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मुजफ्फरनगर। शासन के आदेश के बाद यूरिया की कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासनिक मशीनरियां सक्रिय हो गई है। जिले में एक किसान को साधन सहकारी समिति से 2000 तक खाद के बोरे दिए जाने के राज को खंगालने में प्रशासन की चार टीमें लगी है। ई पॉस मशीनों की डिटेल निकालने के साथ समितियों को वितरण रजिस्टर भी चेक किया जा रहा है। जिन किसानों के नाम 500 से लेकर 2000 खाद के बोरे मशीनों में दर्ज हैं, अफसर उनके बयान ले रहे हैं।

कोरोना काल के दौरान खाद वितरण को लेकर प्रशासनिक अमला सक्रिय नहीं रह पाया। केंद्र सरकार ने किसानों को खाद वितरण की जो व्यवस्था लागू कर रखी है, उसके अनुसार प्रत्येक किसान का आधार कार्ड खाद की दुकानों और साधन सहकारी समिति की ई-पॉस मशीनों से लिंक है। किसानों को खाद का जो भी वितरण हो रहा है उसका सारा रिकॉर्ड केंद्र और प्रदेश सरकार के पास है। अप्रैल से लेकर जुलाई के बीच खाद का जो वितरण हुुआ, उसमें ई पॉस मशीनों का डाटा सरकार के पास पहुंचा तो अफसर हैरान रह गए। एक-एक किसान के नाम 500 से लेकर 2000 खाद के बोरे सामने आए। जनपद के ऐसे 20 किसानों की सूची सरकार ने डीएम को भेजी है। जिले की चारों तहसीलों के एसडीएम को अपनी-अपनी तहसीलों के किसानों और समितियों की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। बृहस्पतिवार को अफसरों ने खाद वितरण की तह तक जाने की कोशिश की। उन समितियों का खाद वितरण का रजिस्टर चेक किया गया, जिनमें एक ही किसान को अधिक बोरे देने का मामला सामने आया है। उन किसानों के भी बयान दर्ज किए गए हैं, जो किसान अधिक खाद देने के मामले में सामने आए हैं। अभी जांच निरंतर चल रही है। अफसरों के मुताबिक कुछ समितियों में वितरण रजिस्टर में किसानों के नाम सही पाए गए हैं। मशीन में वितरण पूरा करने के लिए एक ही किसान के आधार का प्रयोग कर दिया गया है। खाद उक्त किसान को न मिलकर असली किसानों को ही मिला है। कुछ मामलों में तस्वीर इसके उलट है और खाद वितरण रजिस्टर में रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है। जल्द ही जांच का नतीजा सामने आने की संभावना है।
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