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उत्तर भारत की पेपर मिलों में लटके ताले

Fri, 22 Jan 2016 12:43 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
ब्यूरो/ अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Updated Fri, 22 Jan 2016 12:43 AM IST
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North India's paper mill hanging locks
मुजफ्फरनगर। कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने और तैयार माल की बिक्री में गिरावट से चिंतित पेपर मिल उद्योग पर गुरुवार से ताले लटक गए हैं। वेस्ट यूपी की पेपर मिलें अगले पांच दिनों तक बंद रहेंगी। मिल मालिकों ने बैठक कर सरकार से पेपर उद्योग पर छाए संकट से बचाने के लिए पहल करने की मांग की है। प्रदेश में मुजफ्फरनगर में सबसे ज्यादा पेपर इकाइयां हैं, जहां से कागज की आपूर्ति देशभर में होती है।
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लोहा इंडस्ट्री के बाद पेपर उद्योग पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। पेपर निर्माण में प्रयुक्त होने वाली समग्री की आपूर्ति कम हो गई है। तैयार माल मिलों के गोदामों में भरा है। बिक्री में आई कमी से मिल मालिक चिंतित हैं। पेपर इकाइयों पर छाए संकट को लेकर बीते एक सप्ताह से उत्तर भारत के पेपर मिल मालिकों की रणनीति बन रही थी। गुरुवार को पेपर मिलों में ताले लटकाने का फैसला ले लिया गया।
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उत्पादन रोक दिया गया है। 26 जनवरी तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हरियाणा आदि राज्यों की पेपर इंडस्ट्री में प्रोडक्शन बंद रहेगा। विरोध स्वरूप मिल मालिकों ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया है। भोपा रोड स्थित सिद्घबली पेपर मिल परिसर में मिल मालिकों की बैठक आहूत की गई। पेपर इंडस्ट्री के प्रमुख उद्ममी भीमसेन कंसल ने कहा कि मंदी के दौर में पेपर उद्योग को बचाना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में उद्योग से जुड़े सरकारी विभाग मिलों की वास्तविक परेशानियों को दरकिनार कर अपने राजस्व वसूली में लगे हैं। कच्चा माल नहीं मिलने से उत्पादन घट रहा है, जिस कारण मिल मालिकों का खर्च बढ़ रहा है।
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पेपर इंडस्ट्री बंद होने के कगार पर हैं। यदि ऐसा हुआ तो लाखों कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उत्तर भारत की ज्यादातर इकाइयों में क्राफ्ट पेपर का उत्पादन होता है। कंसल ने कहा कि 21 से 26 जनवरी तक मिलें बंद की गई हैं। बैठक में मिल मालिकों ने सरकार से उद्योगों को बचाने की अपील की। साथ ही कहा गया कि पेपर उत्पादन पर छूट दी जाए, ताकि बुरे दौर में इंडस्ट्री को डूबने से बचाया जा सके।

गाजियाबाद से अरुण गुप्ता, पुनीत अग्रवाल, मेरठ से अशोक गुप्ता, नीरज, अमित गर्ग, शामली से अशोक बंसल, अतुल बंसल, मुरादाबाद से रवि सिंघल, रुड़की से विनोद मित्तल, राजेश जैन, हरियाणा से प्रदीप सैनी, हिमाचल से उमेश, काशीपुर से सुशील बंसल, मुजफ्फरनगर से पालिका चेयरमैन पंकज अग्रवाल, संजीव जैन, अक्षय जैन, सचिन, अमित गर्ग, अंबरीश सिंघल, अजय गर्ग, भगतराम, अमित, अजय कपूर, देवेश, शिशिर, प्रवीण आदि मौजूद रहे।


देश की मंडियों में अच्छी है साख 
मुजफ्फरनगर। सूबे में लोहा इंडस्ट्री के बाद पेपर में मुजफ्फरनगर की साख देश की पेपर मंडी में अच्छी है। अस्सी के दशक में जिले में पेपर उद्योग की शुरुआत हुई थी। भोपा रोड, जानसठ रोड और शामली में 30 से ज्यादा पेपर मिलें हैं। मिलों को बैगास और रद्दी पेपर आदि कच्चे माल की आपूर्ति दिल्ली, पंजाब और हरियाणा से होती है। पेपर उत्पादन के बाद जिले से तैयार माल मुंबई, बंगलुरु, कोलकाता, अहमदाबाद आदि डिस्ट्रीब्यूटरों को सप्लाई किया जाता है। क्राफ्ट के साथ दवाइयों की पैकिंग के लिए भी यहां से कागज की आपूर्ति होती है। पेपर इंडस्ट्री से जिले के हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है। मौजूदा हालातों से मिलकर्मियों और मजदूरों में बेचैनी है।
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