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Muzaffarnagar News: चीनी के कटोरे में समाया उत्तर भारत, खेत-खलिहान, पशु और दिखी सांस्कृतिक विरासत
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पशु मेला में प्रतिभाग करती पंजाब की देसी नस्ल की गाय।
- राष्ट्रीय पशु प्रदर्शनी में पंजाब से लेकर राजस्थान तक के पशुपालक हुए शामिल
- पश्चिमी यूपी के जिलों से आए किसानों ने भी खूब दिखाया उत्साह
- बुलंदशहर और पलवल के हुरियारों ने साझा की सांस्कृतिक विरासत
मदन बालियान
मुजफ्फरनगर। चीनी के कटोरे यानी मुजफ्फरनगर में शुरू हुई पशु प्रदर्शनी और कृषि मेले में उत्तर भारत की झलक दिखी। राज्यों की विभिन्न नस्लों के पशु आकर्षण का केंद्र रहे। गेहूं, गन्ने, मोटा अनाज से लेकर खेत-खलिहान की तस्वीर लोगों को भा गई। बुलंदशहर और पलवल के हुरियारों ने सांस्कृतिक विरासत साझा की तो किसान गदगद हो गए।
मेरठ रोड स्थित प्रदर्शनी मैदान पर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की अनूठी झलक बिखरी। हरियाणा नस्ल, मुर्राह, गिर गाय, साहीवाल और थारपरकर नस्ल के पशुओं को देखकर पशुपालक खुश नजर आए। राजस्थान के नागोरी बैलों को देखने के लिए किसान पहुंचे। बुजुर्ग किसान बैलों को देखकर उत्साहित रहे। राजस्थान की गाय अपनी सुंदरता से आकर्षण का केंद्र बनीं, साथ में यहां की बकरे शेरा ने लोगों को खूब लुभाया। हरियाणा के भैंसे और सांड़ खूब पंसद किए गए। प्रदर्शनी में गायों के साथ सेल्फी खिंचवाने की होड़ रही। पंजाब और हरियाणा से आए नुकरे घोड़ों को देखने के लिए देर रात तक युवा प्रदर्शनी में डटे रहे।
गुजरात की कांकरेज नस्ल भी लाई गई
गुजरात में गायों की प्रसिद्ध नस्ल कांकरेज भी लाई गई। अपनी सींगों की बनावट के चलते लोगों के बीच यह खूब आकर्षण का केंद्र रही। यमुनानगर के राजेश कांकरोज गाय को लेकर मेले में पहुंचे।
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ट्र्र्र्र्र्रैक्टर और आधुनिक मशीनें भी सजी
प्रदर्शनी में पशुओं के अलावा ट्रैक्टर और खेती में काम आने वाली आधुनिक मशीनें भी सजी रही। विभिन्न कंपनियों के ट्रैक्टर किसान देखने पहुंचे। ट्रैक्टरों पर सवार होकर युवाओं ने फोटो खिंचवाए। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम से कृषि वैज्ञानिकों ने बहुउद्देशीय कृषि यंत्रों के बारे में बताया। महिलाओं के अनुकूल कृषि यंत्रों के प्रयोग की सलाह दी गई।
खूब महकी उत्तराखंड की खुशबू
उत्तराखंड के काशीपुर से नीरज चौधरी ने स्वदेशी तकनीक से बने देवी देवताओं, धूप बत्ती और सजावट के सामान का स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना रहा। गाय के गोबर से बने उत्पादों को देखने के लिए लोगों की भीड़ रही।
मेले में दिखी पश्चिमी यूपी की तस्वीर
पशु प्रदर्शनी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसान, पशुपालक और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। मुजफ्फरगर के अलावा बागपत, शामली, मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा और मथुरा तक के किसान शामिल हुए।
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- पश्चिमी यूपी के जिलों से आए किसानों ने भी खूब दिखाया उत्साह
- बुलंदशहर और पलवल के हुरियारों ने साझा की सांस्कृतिक विरासत
मदन बालियान
मुजफ्फरनगर। चीनी के कटोरे यानी मुजफ्फरनगर में शुरू हुई पशु प्रदर्शनी और कृषि मेले में उत्तर भारत की झलक दिखी। राज्यों की विभिन्न नस्लों के पशु आकर्षण का केंद्र रहे। गेहूं, गन्ने, मोटा अनाज से लेकर खेत-खलिहान की तस्वीर लोगों को भा गई। बुलंदशहर और पलवल के हुरियारों ने सांस्कृतिक विरासत साझा की तो किसान गदगद हो गए।
मेरठ रोड स्थित प्रदर्शनी मैदान पर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की अनूठी झलक बिखरी। हरियाणा नस्ल, मुर्राह, गिर गाय, साहीवाल और थारपरकर नस्ल के पशुओं को देखकर पशुपालक खुश नजर आए। राजस्थान के नागोरी बैलों को देखने के लिए किसान पहुंचे। बुजुर्ग किसान बैलों को देखकर उत्साहित रहे। राजस्थान की गाय अपनी सुंदरता से आकर्षण का केंद्र बनीं, साथ में यहां की बकरे शेरा ने लोगों को खूब लुभाया। हरियाणा के भैंसे और सांड़ खूब पंसद किए गए। प्रदर्शनी में गायों के साथ सेल्फी खिंचवाने की होड़ रही। पंजाब और हरियाणा से आए नुकरे घोड़ों को देखने के लिए देर रात तक युवा प्रदर्शनी में डटे रहे।
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गुजरात की कांकरेज नस्ल भी लाई गई
गुजरात में गायों की प्रसिद्ध नस्ल कांकरेज भी लाई गई। अपनी सींगों की बनावट के चलते लोगों के बीच यह खूब आकर्षण का केंद्र रही। यमुनानगर के राजेश कांकरोज गाय को लेकर मेले में पहुंचे।
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ट्र्र्र्र्र्रैक्टर और आधुनिक मशीनें भी सजी
प्रदर्शनी में पशुओं के अलावा ट्रैक्टर और खेती में काम आने वाली आधुनिक मशीनें भी सजी रही। विभिन्न कंपनियों के ट्रैक्टर किसान देखने पहुंचे। ट्रैक्टरों पर सवार होकर युवाओं ने फोटो खिंचवाए। भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान मोदीपुरम से कृषि वैज्ञानिकों ने बहुउद्देशीय कृषि यंत्रों के बारे में बताया। महिलाओं के अनुकूल कृषि यंत्रों के प्रयोग की सलाह दी गई।
खूब महकी उत्तराखंड की खुशबू
उत्तराखंड के काशीपुर से नीरज चौधरी ने स्वदेशी तकनीक से बने देवी देवताओं, धूप बत्ती और सजावट के सामान का स्टॉल आकर्षण का केंद्र बना रहा। गाय के गोबर से बने उत्पादों को देखने के लिए लोगों की भीड़ रही।
मेले में दिखी पश्चिमी यूपी की तस्वीर
पशु प्रदर्शनी में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसान, पशुपालक और युवा बड़ी संख्या में शामिल हुए। मुजफ्फरगर के अलावा बागपत, शामली, मेरठ, बिजनौर, गाजियाबाद, बुलंदशहर, हापुड़, अमरोहा और मथुरा तक के किसान शामिल हुए।