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नहीं हुई सस्पेंड लेखपालों की बहाली
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नहीं हुई सस्पेंड लेखपालों की बहाली
मुजफ्फरनगर। लेखपाल संघ की 21 दिन चली हड़ताल के बाद 31 दिसंबर को प्रदेश स्तर पर आंदोलन वापस लेने की घोषणा की गई थी। हड़ताल के समय जिन दस लेखपालों को सस्पेंड किया गया था उनकी अभी तक भी बहाली नहीं हो पाई है। शासन का जो पत्र आया है अफसर उसी का लाभ उठाकर मामले को खींच रहे हैं। शासन ने पत्र में कहा है कि हड़ताल वापस लेने वाले लेखपालों की बहाली पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए।
लेखपाल संघ ने अपनी मांगों को लेकर 10 दिसंबर से प्रदेश व्यापी हड़ताल प्रारंभ की थी। लेखपालों के आगे सरकार ने झुकने के बजाय सीधे कार्रवाई शुरू कर दी। जिले में 189 लेखपालों को नोटिस जारी किया गया और बाद में जिला और तहसील स्तर के पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसमें जिलाध्यक्ष खचेडू खान, जिला मंत्री अनिल वर्मा के साथ सदर तहसील अध्यक्ष संजीव मलिक, मंत्री अनिल गौतम, खतौली तहसील अध्यक्ष श्रवण कुमार, मंत्री चंद्रर पाल सिंह, बुढ़ाना तहसील अध्यक्ष ओमप्रकाश, मंत्री ललित मोहन शर्मा व जानसठ तहसील अध्यक्ष मोतीराम और मंत्री विनोद शर्मा को भी निलंबित कर दिया गया। लेखपाल संघ ने 31 दिसंबर को आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। शासन में लेखपाल संघ के साथ समझौता हुआ कि सभी लेखपालों की बहाली होगी। हड़ताल के दौरान समस्त कार्रवाई वापस होगी। एक सप्ताह बीतने के बाद भी अभी तक किसी भी निलंबित लेखपाल की बहाली नहीं हुई है। लेखपाल अब प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। लेखपाल संघ के जिला मंत्री अनिल वर्मा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि प्रक्रिया चल रही है, हमें उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही बहाली करेगा।
प्रक्रिया के तहत होगी बहाली
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि निलंबन और बहाली की एक प्रक्रिया होती है। सस्पेंड करने की कार्रवाई भी एसडीएम के द्वारा ही होती है और बहाली भी वही करेंगे। लेखपालों का नियुक्ति प्राधिकारी उपजिलाधिकारी ही होता है। शासन यदि कोई ऐसा निर्णय लेता कि प्रदेश के सभी सस्पेंड लेखपालों को सीधे बहाल किया जाता है, तो एक अलग प्रक्रिया थी। शासन ने यह कहा है कि इनकी बहाली पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर लें। प्रशासन इस पर काम कर रहा है।
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मुजफ्फरनगर। लेखपाल संघ की 21 दिन चली हड़ताल के बाद 31 दिसंबर को प्रदेश स्तर पर आंदोलन वापस लेने की घोषणा की गई थी। हड़ताल के समय जिन दस लेखपालों को सस्पेंड किया गया था उनकी अभी तक भी बहाली नहीं हो पाई है। शासन का जो पत्र आया है अफसर उसी का लाभ उठाकर मामले को खींच रहे हैं। शासन ने पत्र में कहा है कि हड़ताल वापस लेने वाले लेखपालों की बहाली पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए।
लेखपाल संघ ने अपनी मांगों को लेकर 10 दिसंबर से प्रदेश व्यापी हड़ताल प्रारंभ की थी। लेखपालों के आगे सरकार ने झुकने के बजाय सीधे कार्रवाई शुरू कर दी। जिले में 189 लेखपालों को नोटिस जारी किया गया और बाद में जिला और तहसील स्तर के पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया। इसमें जिलाध्यक्ष खचेडू खान, जिला मंत्री अनिल वर्मा के साथ सदर तहसील अध्यक्ष संजीव मलिक, मंत्री अनिल गौतम, खतौली तहसील अध्यक्ष श्रवण कुमार, मंत्री चंद्रर पाल सिंह, बुढ़ाना तहसील अध्यक्ष ओमप्रकाश, मंत्री ललित मोहन शर्मा व जानसठ तहसील अध्यक्ष मोतीराम और मंत्री विनोद शर्मा को भी निलंबित कर दिया गया। लेखपाल संघ ने 31 दिसंबर को आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की। शासन में लेखपाल संघ के साथ समझौता हुआ कि सभी लेखपालों की बहाली होगी। हड़ताल के दौरान समस्त कार्रवाई वापस होगी। एक सप्ताह बीतने के बाद भी अभी तक किसी भी निलंबित लेखपाल की बहाली नहीं हुई है। लेखपाल अब प्रशासन के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। लेखपाल संघ के जिला मंत्री अनिल वर्मा से बात हुई तो उन्होंने बताया कि प्रक्रिया चल रही है, हमें उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही बहाली करेगा।
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प्रक्रिया के तहत होगी बहाली
मुजफ्फरनगर। एडीएम प्रशासन अमित सिंह ने बताया कि निलंबन और बहाली की एक प्रक्रिया होती है। सस्पेंड करने की कार्रवाई भी एसडीएम के द्वारा ही होती है और बहाली भी वही करेंगे। लेखपालों का नियुक्ति प्राधिकारी उपजिलाधिकारी ही होता है। शासन यदि कोई ऐसा निर्णय लेता कि प्रदेश के सभी सस्पेंड लेखपालों को सीधे बहाल किया जाता है, तो एक अलग प्रक्रिया थी। शासन ने यह कहा है कि इनकी बहाली पर सहानुभूति पूर्वक विचार कर लें। प्रशासन इस पर काम कर रहा है।
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