शुकतीर्थ/मोरना। घर की बगिया को जिन्होंने अपनी मेहनत और ममता से सींच कर परिवार को खुशियां दी थी, वो महिलाएं वृद्धावस्था में अपनों की उपेक्षा का दर्द सह रही हैं। बुढ़ापे में जब उन्हें सहारे और स्नेह की जरूरत थी, तब उनके दिलों में वियोग की पीड़ा है। पौराणिक शुकतीर्थ में संचालित आर्य महिला वृद्धा आश्रम में जीवन बसर कर रही वृद्ध महिलाओं की यही मार्मिक कहानी है।
समाज में बुजुर्गों की उपेक्षा तथा दुर्व्यवहार के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में 2010 में आर्य महिला वृद्धा आश्रम की स्थापना हुई थी, जिसमें बेसहारा वृद्ध महिलाओं को आसरा दिया जाता है। दूरदराज के राज्यों से भी दुखिया बुजुर्ग यहां पहुंचती है। उनमें आत्म विश्वास जगाकर यज्ञ और सत्संग से जोड़ा जाता है। बीते सालों में सार्थक पहल भी की गई। स्वजनों को बुलाकर संवाद के जरिये वैचारिक मतभेद दूर किए गए। वृद्धजनों की सेवा को प्रेरित कर आश्रम से करीब 70 महिलाओं को पुन: उनके परिवारों में वापस भेजा गया। संचालिका साध्वी कांता आर्य ने बताया कि अपनों से उपेक्षित, दुखी वृद्धा तीर्थ में आती हैं, उन्ही की सेवा और सुरक्षा के लिए वृद्धाश्रम संचालित है। फिलहाल गीता, रामकटोरी, राखी, भगवती, सोहनबीरी आदि वृद्धाएं रह रही हैं। सबकी अपनी परिस्थितियां और जीवन की मुश्किल हैं।