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पिता से किए वादे पर 25 साल से गांव आकर कर मरीजों का उपचार रहे डॉ सुधीर
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 27 Feb 2018 12:14 AM IST
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माता-पिता के साथ डॉ.सुधीर त्यागी।
- फोटो : अमर उजाला
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न्यूरो सर्जन बेटा अपने किसान पिता से किया वादा 25 साल से निभा रहा है। दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में डॉ सुधीर त्यागी अपने गांव सोहंजनी तगान में प्रत्येक रविवार को ग्रामीण रोगियों का इलाज करने आते हैं। पार्किन्सन रोग की जटिल बीमारियों की शल्य क्रिया के विशेषज्ञ डॉ त्यागी कहते हैं व्यस्त जीवन की वजह से देश में स्पाइन (रीढ़ की हड्डी) के रोगी बढ़ रहे हैं।
मंसूरपुर क्षेत्र के गांव सोहंजनी तगान के किसान बाबूराम त्यागी ने खेतों में कड़ी मेहनत के दम पर अपने बेटे सुधीर कुमार को उस समय मेडिकल की पढ़ाई कराई, जब गांव में डॉक्टर बनना सपना सरीखा था। गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़े बेटे ने मुजफ्फरनगर के डीएवी इंटर कॉलेज से इंटर तक शिक्षा पाई।
डॉक्टर बनने के लिए सेल्फ स्टडी की और केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस की। पिता बाबूराम ने बेटे से वचन लिया था कि डॉक्टर बनने के बाद महानगरों में भले ही प्रैक्टिस करना, मगर गांव में भी रोगियों का नि:शुल्क इलाज करना।
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न्यूरो सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद डॉ सुधीर त्यागी ने देश में कहीं भी अपनी सेवा दी, लेकिन बीते ढाई दशक से वह पैतृक गांव में ग्रामीणों को चिकित्सा परामर्श देने के लिए आते हैं। प्रत्येक रविवार को उनके आने का जिलेभर के मरीजों को इंतजार रहता है। वर्तमान में वे दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में वरिष्ठ न्यूरो सर्जन हैं। पिता बाबूराम और मां शिक्षा कहते हैं कि उन्हें बेटे पर नाज है, क्योंकि करियर में ऊंचाईयां छूने के बावजूद वो मरीजों के लिए गांव आता है।
पांच हजार से ज्यादा ब्रेन ऑपरेशन कर चुके डॉ त्यागी बताते हैं कि न्यूरो सर्जरी में देश की साख विश्व में बढ़ी है। माईक्रो इलेक्ट्राल इनप्लांटेशन के जरिये जटिल बीमारियों के ऑप्रेशन की शुरुआत उन्होंने की है। हाथ पांव कांपना, शरीर का झुकना, मिर्गी और डिप्रेशन के रोगों में जब दवाईयों कारगर नहीं रहती, तब ऑप्रेशन से मरीज को राहत दिलाते है।
दवा में लापरवाही, ब्रेन पर खतरा
मुजफ्फरनगर। सोहंजनी तगान गांव में एक फरवरी 1966 को जन्मे डॉ सुधीर त्यागी दिल्ली आईएमए के अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2017 में न्यूरो सर्जरी के लिए उन्हें लीजेंड अवार्ड दिल्ली में दिया गया। जांबिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इराक आदि देशों में मेडिकल प्रशिक्षुओं को वह न्यूरो सर्जरी का प्रशिक्षण दे चुके हैं। डॉ त्यागी कहते हैं कि ब्लॅड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएं लेना खुद बंद न करें, नहीं तो ब्रेन हैमरेज, ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है।
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मंसूरपुर क्षेत्र के गांव सोहंजनी तगान के किसान बाबूराम त्यागी ने खेतों में कड़ी मेहनत के दम पर अपने बेटे सुधीर कुमार को उस समय मेडिकल की पढ़ाई कराई, जब गांव में डॉक्टर बनना सपना सरीखा था। गांव के प्राथमिक स्कूल में पढ़े बेटे ने मुजफ्फरनगर के डीएवी इंटर कॉलेज से इंटर तक शिक्षा पाई।
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डॉक्टर बनने के लिए सेल्फ स्टडी की और केजीएमयू लखनऊ से एमबीबीएस की। पिता बाबूराम ने बेटे से वचन लिया था कि डॉक्टर बनने के बाद महानगरों में भले ही प्रैक्टिस करना, मगर गांव में भी रोगियों का नि:शुल्क इलाज करना।
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न्यूरो सर्जरी में विशेषज्ञता हासिल करने के बाद डॉ सुधीर त्यागी ने देश में कहीं भी अपनी सेवा दी, लेकिन बीते ढाई दशक से वह पैतृक गांव में ग्रामीणों को चिकित्सा परामर्श देने के लिए आते हैं। प्रत्येक रविवार को उनके आने का जिलेभर के मरीजों को इंतजार रहता है। वर्तमान में वे दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में वरिष्ठ न्यूरो सर्जन हैं। पिता बाबूराम और मां शिक्षा कहते हैं कि उन्हें बेटे पर नाज है, क्योंकि करियर में ऊंचाईयां छूने के बावजूद वो मरीजों के लिए गांव आता है।
पांच हजार से ज्यादा ब्रेन ऑपरेशन कर चुके डॉ त्यागी बताते हैं कि न्यूरो सर्जरी में देश की साख विश्व में बढ़ी है। माईक्रो इलेक्ट्राल इनप्लांटेशन के जरिये जटिल बीमारियों के ऑप्रेशन की शुरुआत उन्होंने की है। हाथ पांव कांपना, शरीर का झुकना, मिर्गी और डिप्रेशन के रोगों में जब दवाईयों कारगर नहीं रहती, तब ऑप्रेशन से मरीज को राहत दिलाते है।
दवा में लापरवाही, ब्रेन पर खतरा
मुजफ्फरनगर। सोहंजनी तगान गांव में एक फरवरी 1966 को जन्मे डॉ सुधीर त्यागी दिल्ली आईएमए के अध्यक्ष रह चुके हैं। वर्ष 2017 में न्यूरो सर्जरी के लिए उन्हें लीजेंड अवार्ड दिल्ली में दिया गया। जांबिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इराक आदि देशों में मेडिकल प्रशिक्षुओं को वह न्यूरो सर्जरी का प्रशिक्षण दे चुके हैं। डॉ त्यागी कहते हैं कि ब्लॅड प्रेशर और डायबिटीज की दवाएं लेना खुद बंद न करें, नहीं तो ब्रेन हैमरेज, ब्रेन स्ट्रोक और ब्रेन ट्यूमर का खतरा बढ़ जाता है।