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राष्ट्रीय बालिका दिवस : उच्च शिक्षा में टॉपर बनी शहर की अनम और मणि
Thu, 24 Jan 2019 12:10 AM IST
Deepak Kausik
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Published by: Deepak Kausik
Updated Thu, 24 Jan 2019 12:10 AM IST
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छात्रा अनम को सम्मानित करते राज्यपाल।
- फोटो : अमर उजाला
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बेटियां उच्च शिक्षित बन कर समाज और राष्ट्र के लिए मिसाल बन रही हैं। कठिन परिस्थितियों में भी उनका मनोबल नहीं डिगता। समर्पण, लगन और मेहनत से उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में खुद की प्रतिभा को नई ऊंचाइयां दी हैं। शहर की अनम सिद्दीकी और मणि त्यागी की कामयाबी युवाओं के लिए प्रेरक है। राज्यपाल राम नाइक ने उन्हें स्वर्ण पदक से अलंकृत किया है।
अंबा विहार निवासी अनम सिद्दीकी ने वल्लभ भाई पटेल कृषि यूनिवर्सिटी मेरठ में अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। बीटेक बॉयो टेक्नोलॉजी में टॉप कर उसने गोल्ड मेडल हासिल किया। खतौली के गांव खेड़ी कुरैश के किसान नौशाद आलम और फरहा के परिवार में पांच बेटियां हैं। उनके भविष्य को संवारने के लिए उन्होंने शहर में आशियाना बनाया। बारहवीं तक पढ़ी मां शिक्षा के मोल को जानती थीं। अनम सिद्दीकी उर्फ निक्की उनकी सबसे बड़ी बेटी है। पहले उसने डॉक्टर बनने का ख्वाब देखा, मगर कम रैंक आने से बीडीएस मिला।
अचानक अनम ने इरादा बदला और यूपी कैट की परीक्षा पास की। बीटेक में प्रवेश के बाद कड़ी मेहनत की और यूनिवर्सिटी को टॉप किया। 13 सितंबर को दीक्षांत समारोह में गवर्नर रामनाइक ने उसे दो गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। अनम बताती हैं कि कृषि एजूकेशन में उसकी रुचि पिता के प्रोत्साहन से बढ़ी। फिलहाल एमटेक की विद्यार्थी हूं। पीएचडी के बाद बॉयोटेक में प्रोफेसर बनने का सपना है। अपनी सफलता के पीछे वह मां फरहा के संकल्प को मुख्य वजह मानती हैं। सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि मेरी छोटी बहनों सना को एमकॉम, एनी एवं इमरा को बीसीए की शिक्षा दिलाई। बेटियां पढ़ना चाहती है। उच्च शिक्षा के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं।
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जीव विज्ञान विषय में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में टॉपर बनी मणि त्यागी ने उच्च शिक्षा पाने का ध्येय बनाया। ब्रहमपुरी निवासी अधिवक्ता मुकुल प्रकाश त्यागी की बेटी मणि ने डीएवी डिग्री कॉलेज से ज्यूलॉजी में एमएससी किया। उनकी मां रीना त्यागी गृहिणी हैं। उन्होंने बेटी का हर कदम पर उत्साह बढ़ाया। 24 सितंबर, 2018 को मेरठ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उन्हें राज्यपाल ने स्वर्ण पदक से अलंकृत किया। मणि बताती है कि अब वह आईएएस परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं। बेटियों को शिक्षा का माहौल मिले, ताकि उन्हें आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिले।
मैराथन दौड़ में अर्पिता के जज्बे की धूम
मुजफ्फरनगर। लंबी दूरी की दौड़ में उदीयमान धाविका अर्पिता सैनी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने जज्बे और प्रतिभा से सफलता के नए मुकाम तय किए हैं। वर्ष 2018 में उसने सात मैराथन दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। हाल ही में गुजरात के वड़ोदरा में हुई पांच किमी मैराथन में भी वह विजेता बनी।
चरथावल ब्लॉक के गांव रोहाना खुर्द निवासी अनिल सैनी की बेटी अर्पिता जिले की पहली मैराथन गर्ल बन गई है। संसाधनों का अभाव भी उनकी राह में बाधा नहीं बन सका। खेत- खलिहानों में दौड़ने का अभ्यास किया और राष्ट्रीय मैराथन स्पर्धाओं में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।
वह शहर के एसडी कॉलेज से बीपीएड कर चुकी है। फिलहाल श्रीराम कॉलेज में एमपीएड की छात्रा है। वर्ष 2011 में 3000 मीटर महिला दौड़ में उसे रजत पदक मिला। रुडक़ी में हुई मिनी मैराथन में प्रथम स्थान पाने के बाद उसका हौसला बढ़ता गया। वर्ष 2018 में अर्पिता की उपलब्धियां खास रही। भोपाल रन, एनएसजी मैराथन दिल्ली, सुपर सिख मैराथन दिल्ली, एसबीआई 10 किमी मैराथन दिल्ली, पिकाथान 10 किमी मैराथन दिल्ली, माउंट आबू मैराथन राजस्थान और बनबसा मैराथन उत्तराखंड में उसने स्वर्ण पदक जीते। गुरुग्राम में 21 किमी मैराथन में उसकी श्रेष्ठता यादगार रही। अब उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मैराथन स्पर्धा में अपनी चमक बिखेरना है। अर्पिता गांव की अन्य बेटियों को भी खेलों के लिए प्रेरित कर रही है।
पीएम मोदी ने पढ़ी थी गरिमा की कविता
मुजफ्फरनगर। सीबीएसई दसवीं बोर्ड एग्जाम की तैयारी में जुटी गरिमा गुप्ता की काव्य रचना उनके अंतर्मन की विशिष्टता की गवाह है। आकाशवाणी पर मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अफ्रीका के संबंधों पर लिखी गई उसकी कविता को पढ़ कर गरिमा को राष्ट्रीय सुर्खियां दे दीं। देशभर के 1600 स्कूलों की प्रतिभागियों में से उसकी रचना को पहला पुरस्कार मिला था। पीएम की वाणी से अपनी कविता के बोल सुनकर गरिमा ने अपने काव्य का संवर्धन किया। नई मंडी के जवाहर कालोनी निवासी पिता डॉ आलोक गुप्ता और मां तृप्ति गुप्ता शिक्षक हैं। उसकी उपलब्धि पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उसे पुरस्कृत किया था। बाल कवियत्री गरिमा प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती है।
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अंबा विहार निवासी अनम सिद्दीकी ने वल्लभ भाई पटेल कृषि यूनिवर्सिटी मेरठ में अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। बीटेक बॉयो टेक्नोलॉजी में टॉप कर उसने गोल्ड मेडल हासिल किया। खतौली के गांव खेड़ी कुरैश के किसान नौशाद आलम और फरहा के परिवार में पांच बेटियां हैं। उनके भविष्य को संवारने के लिए उन्होंने शहर में आशियाना बनाया। बारहवीं तक पढ़ी मां शिक्षा के मोल को जानती थीं। अनम सिद्दीकी उर्फ निक्की उनकी सबसे बड़ी बेटी है। पहले उसने डॉक्टर बनने का ख्वाब देखा, मगर कम रैंक आने से बीडीएस मिला।
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अचानक अनम ने इरादा बदला और यूपी कैट की परीक्षा पास की। बीटेक में प्रवेश के बाद कड़ी मेहनत की और यूनिवर्सिटी को टॉप किया। 13 सितंबर को दीक्षांत समारोह में गवर्नर रामनाइक ने उसे दो गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया। अनम बताती हैं कि कृषि एजूकेशन में उसकी रुचि पिता के प्रोत्साहन से बढ़ी। फिलहाल एमटेक की विद्यार्थी हूं। पीएचडी के बाद बॉयोटेक में प्रोफेसर बनने का सपना है। अपनी सफलता के पीछे वह मां फरहा के संकल्प को मुख्य वजह मानती हैं। सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि मेरी छोटी बहनों सना को एमकॉम, एनी एवं इमरा को बीसीए की शिक्षा दिलाई। बेटियां पढ़ना चाहती है। उच्च शिक्षा के दम पर आगे बढ़ना चाहती हैं।
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जीव विज्ञान विषय में चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी में टॉपर बनी मणि त्यागी ने उच्च शिक्षा पाने का ध्येय बनाया। ब्रहमपुरी निवासी अधिवक्ता मुकुल प्रकाश त्यागी की बेटी मणि ने डीएवी डिग्री कॉलेज से ज्यूलॉजी में एमएससी किया। उनकी मां रीना त्यागी गृहिणी हैं। उन्होंने बेटी का हर कदम पर उत्साह बढ़ाया। 24 सितंबर, 2018 को मेरठ यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में उन्हें राज्यपाल ने स्वर्ण पदक से अलंकृत किया। मणि बताती है कि अब वह आईएएस परीक्षा की तैयारी में जुटी हैं। बेटियों को शिक्षा का माहौल मिले, ताकि उन्हें आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिले।
मैराथन दौड़ में अर्पिता के जज्बे की धूम
मुजफ्फरनगर। लंबी दूरी की दौड़ में उदीयमान धाविका अर्पिता सैनी ने राष्ट्रीय स्तर पर अपने जज्बे और प्रतिभा से सफलता के नए मुकाम तय किए हैं। वर्ष 2018 में उसने सात मैराथन दौड़ में स्वर्ण पदक हासिल किया। हाल ही में गुजरात के वड़ोदरा में हुई पांच किमी मैराथन में भी वह विजेता बनी।
चरथावल ब्लॉक के गांव रोहाना खुर्द निवासी अनिल सैनी की बेटी अर्पिता जिले की पहली मैराथन गर्ल बन गई है। संसाधनों का अभाव भी उनकी राह में बाधा नहीं बन सका। खेत- खलिहानों में दौड़ने का अभ्यास किया और राष्ट्रीय मैराथन स्पर्धाओं में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की।
वह शहर के एसडी कॉलेज से बीपीएड कर चुकी है। फिलहाल श्रीराम कॉलेज में एमपीएड की छात्रा है। वर्ष 2011 में 3000 मीटर महिला दौड़ में उसे रजत पदक मिला। रुडक़ी में हुई मिनी मैराथन में प्रथम स्थान पाने के बाद उसका हौसला बढ़ता गया। वर्ष 2018 में अर्पिता की उपलब्धियां खास रही। भोपाल रन, एनएसजी मैराथन दिल्ली, सुपर सिख मैराथन दिल्ली, एसबीआई 10 किमी मैराथन दिल्ली, पिकाथान 10 किमी मैराथन दिल्ली, माउंट आबू मैराथन राजस्थान और बनबसा मैराथन उत्तराखंड में उसने स्वर्ण पदक जीते। गुरुग्राम में 21 किमी मैराथन में उसकी श्रेष्ठता यादगार रही। अब उसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मैराथन स्पर्धा में अपनी चमक बिखेरना है। अर्पिता गांव की अन्य बेटियों को भी खेलों के लिए प्रेरित कर रही है।
पीएम मोदी ने पढ़ी थी गरिमा की कविता
मुजफ्फरनगर। सीबीएसई दसवीं बोर्ड एग्जाम की तैयारी में जुटी गरिमा गुप्ता की काव्य रचना उनके अंतर्मन की विशिष्टता की गवाह है। आकाशवाणी पर मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और अफ्रीका के संबंधों पर लिखी गई उसकी कविता को पढ़ कर गरिमा को राष्ट्रीय सुर्खियां दे दीं। देशभर के 1600 स्कूलों की प्रतिभागियों में से उसकी रचना को पहला पुरस्कार मिला था। पीएम की वाणी से अपनी कविता के बोल सुनकर गरिमा ने अपने काव्य का संवर्धन किया। नई मंडी के जवाहर कालोनी निवासी पिता डॉ आलोक गुप्ता और मां तृप्ति गुप्ता शिक्षक हैं। उसकी उपलब्धि पर नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने उसे पुरस्कृत किया था। बाल कवियत्री गरिमा प्रशासनिक सेवा में जाना चाहती है।