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सदमे से किसान की मौत, रेलवे महकमे की ओर से मुआवजा नहीं मिलने से तनाव में था
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sun, 10 Dec 2017 11:53 PM IST
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किसान की मौत पर विलाप करते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
रेलवे की ओर से भूमि अधिग्रहण का किसान को मुआवजा नहीं मिला। नतीजतन किसान बैंक का कर्ज भी चुकता नहीं कर सका। कर्ज से तनाव में आए किसान की सदमे से मौत हो गई। किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। उधर, भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत ने मृतक किसान के आश्रित परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर 15 दिसंबर से तहसील में धरना और प्रदर्शन की चेतावनी दी है। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी समेत क्षेत्र के किसान के शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। परिजनों ने गमगीन माहौल में किसान अंतिम संस्कार कर दिया।
गांव मढ़करीमपुर निवासी किसान मूलचंद (37) पुत्र मानसिंह करीब चार बीघे भूमि का किसान था। उसकी कुछ भूमि रेलवे मंत्रालय ने लाइन का दोहरीकरण करने के लिए अधिग्रहण की थी। परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि किसान पर भूमि विकास बैंक का करीब 50-60 हजार रुपये का कर्ज भी था। किसान मुआवजा का पैसा लेने के लिए पिछले कई दिनों से एसएलओ के दफ्तर का चक्कर काट रहा था। इसके बावजूद उसको अभी तक मुआवजा नहीं मिला सका।
कर्ज जमा करने लगातार दबाव होने तथा मुआवजा भी नहीं मिलने से किसान मूलचंद मानसिक रूप से तनाव में था। परिजनों के मुताबिक तनाव में रहते हुए किसान ने शनिवार को भोजन तक नहीं किया था। उसकी अचानक तबियत खराब हो गई। रविवार सुबह परिजन किसान को एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां ले गए, जहां पर चिकित्सक ने किसान को मृत घोषित कर दिया। परिजनों कर कहना है कि चिकित्सक ने बताया था कि मूलचंद की मौत अचानक हार्टअटैक से हुई है।
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किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। किसान की मौत की जानकारी लगने पर भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत कार्यकर्ताओं के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों को मुआवजा देने के लिए अधिकारियों को सुविधा शुल्क देने के लिए दबाव बनाया जाता है। मृतक किसान से भी मुआवजा का चेक देने के लिए अधिकारियों ने रिश्वत मांगी थी। इसीलिए वह मानसिक रूप से तनाव में था, जिससे उसकी मौत हो गई।
भाकियू जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जांच कर किसान की मौत को लेकर जिम्मेदार रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की तो वे 15 दिसंबर से तहसील में बेमियादी धरना व प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी भी मृतक किसान के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित परिजनों को मुआवजा के अलावा आर्थिक सहायता दिलाए जाने का आश्वासन दिया। किसान की मौत को लेकर कोई भी अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा, जिसको लेकर किसानों में रोष व्याप्त है। उधर, एसडीएम ने कहा कि अभी तक किसान की मौत की घटना के बारे में जानकारी नहीं मिली है।
किसान मूलचंद के मृत्यु की उनको जानकारी नहीं दी गई। सोमवार को लेखपाल को गांव भेजकर जांच पड़ताल कराई जाएगी। अगर मृतक किसान को मुआवजा का चेक नहीं मिला है, तो इसके बारे में जांच पड़ताल कराकर अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा - अमित कुमार, तहसीलदार।
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किसान मूलचंद की हार्टअटैक से मौत होने की सूचना ग्रामीणों से मिली थी। परिजनों ने पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी। परिजनों ने किसान का पोस्टमार्टम कराना उचित नहीं समझा है। इसलिए उन्होंने पोस्टमार्टम नहीं कराया है - पीपी सिंह, सीओ।
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गांव मढ़करीमपुर निवासी किसान मूलचंद (37) पुत्र मानसिंह करीब चार बीघे भूमि का किसान था। उसकी कुछ भूमि रेलवे मंत्रालय ने लाइन का दोहरीकरण करने के लिए अधिग्रहण की थी। परिजनों और ग्रामीणों ने बताया कि किसान पर भूमि विकास बैंक का करीब 50-60 हजार रुपये का कर्ज भी था। किसान मुआवजा का पैसा लेने के लिए पिछले कई दिनों से एसएलओ के दफ्तर का चक्कर काट रहा था। इसके बावजूद उसको अभी तक मुआवजा नहीं मिला सका।
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कर्ज जमा करने लगातार दबाव होने तथा मुआवजा भी नहीं मिलने से किसान मूलचंद मानसिक रूप से तनाव में था। परिजनों के मुताबिक तनाव में रहते हुए किसान ने शनिवार को भोजन तक नहीं किया था। उसकी अचानक तबियत खराब हो गई। रविवार सुबह परिजन किसान को एक प्राइवेट चिकित्सक के यहां ले गए, जहां पर चिकित्सक ने किसान को मृत घोषित कर दिया। परिजनों कर कहना है कि चिकित्सक ने बताया था कि मूलचंद की मौत अचानक हार्टअटैक से हुई है।
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किसान की मौत से परिवार में कोहराम मच गया। किसान की मौत की जानकारी लगने पर भाकियू जिलाध्यक्ष राजू अहलावत कार्यकर्ताओं के साथ गांव में पहुंचे। उन्होंने बताया कि भूमि अधिग्रहण के मामले में किसानों को मुआवजा देने के लिए अधिकारियों को सुविधा शुल्क देने के लिए दबाव बनाया जाता है। मृतक किसान से भी मुआवजा का चेक देने के लिए अधिकारियों ने रिश्वत मांगी थी। इसीलिए वह मानसिक रूप से तनाव में था, जिससे उसकी मौत हो गई।
भाकियू जिलाध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर प्रशासन ने जांच कर किसान की मौत को लेकर जिम्मेदार रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की तो वे 15 दिसंबर से तहसील में बेमियादी धरना व प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। रालोद जिलाध्यक्ष अजीत राठी भी मृतक किसान के परिजनों को सांत्वना देने पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित परिजनों को मुआवजा के अलावा आर्थिक सहायता दिलाए जाने का आश्वासन दिया। किसान की मौत को लेकर कोई भी अधिकारी गांव में नहीं पहुंचा, जिसको लेकर किसानों में रोष व्याप्त है। उधर, एसडीएम ने कहा कि अभी तक किसान की मौत की घटना के बारे में जानकारी नहीं मिली है।
किसान मूलचंद के मृत्यु की उनको जानकारी नहीं दी गई। सोमवार को लेखपाल को गांव भेजकर जांच पड़ताल कराई जाएगी। अगर मृतक किसान को मुआवजा का चेक नहीं मिला है, तो इसके बारे में जांच पड़ताल कराकर अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा - अमित कुमार, तहसीलदार।
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किसान मूलचंद की हार्टअटैक से मौत होने की सूचना ग्रामीणों से मिली थी। परिजनों ने पुलिस को कोई जानकारी नहीं दी। परिजनों ने किसान का पोस्टमार्टम कराना उचित नहीं समझा है। इसलिए उन्होंने पोस्टमार्टम नहीं कराया है - पीपी सिंह, सीओ।