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जिलेवासी नहीं सहेज पाए इस गिरमिटिया की विरासत

Mon, 10 Feb 2020 12:21 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 10 Feb 2020 12:21 AM IST
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Muzaffarnagar: Mohalla Moti Mahal
मुजफ्फरनगर के मोती महल स्थित साहित्यकार गिरिराज किशोर का पुश्तैनी मकान उनके छोटे भाई एवं भतीजा? - फोटो : MUZAFFARNAGAR
जिलेवासी नहीं सहेज पाए इस गिरमिटिया की विरासत
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मुजफ्फरनगर। ऊंची-ऊंची अट्टालिकाओं से घिरी नगर के मोहल्ला मोती महल में एक खंडहर सी हवेली है, जिसमें कभी गिरिराज किशोर की किलकारियां गूंजी थी, आज वह वीरान है। यह वीरानगी उस वक्त से ही छाने लगी थी, जब साहित्य के इस पुरोधा ने मुजफ्फरनगर को अलविदा कहा था। इसके बाद भी वे जिले से जुड़े रहे, लेकिन उनके अपने ही उनकी विरासत को संभाल नहीं पाए।
साहित्य क्षेत्र से जुड़े और मित्रमंडली को छोड़ दें तो उनकी हवेली के आसपास के ज्यादातर लोग गिरिराज किशोर से ज्यादा वाफिक नहीं दिखे। हिंदी साहित्य का यह सिद्ध पुरुष अपने ही घर के जोगी बनकर रह गए। उनके सगे भाई अमरीश किशोर भी उनके बारे में ज्यादा कुछ नहीं बता पाए। भतीजे संजीव स्वीकार करते हैं कि ताऊ जी के निधन के बाद कई समाचार पत्रों के प्रतिनिधियों ने जब उनसे संपर्क किया, तब उन्हें ताऊ जी के कद का अहसास हुआ। संजीव बताते हैं कि गिरिराज किशोर छह भाइयों और दो बहनों में सबसे बड़े थे। एसडी कॉलेज से स्नातक करने के बाद वह मुजफ्फरनगर से चले गए थे। वो कम ही शहर में आए। दरअसल, जिले से जाने के बाद उनके संपर्क चुनिंदा लोगों से ही रह गए थे। साहित्य से जुड़े लोग तो उनकी प्रतिभा के मुरीद हैं, लेकिन उनसे जुड़ी अन्य लोगों की यादें धुंधली पड़ चुकी हैं।
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उनके आने से पहले आई निधन की खबर
मोती महल स्थित अपनी जमीन को बेचने के सिलसिले में गिरिराज किशोर ने बीते शुक्रवार को ही संजीव से फोन पर बात की थी। उनकी बेटी शीबा ने अपने फोन से बात कराई थी। संजीव बताते हैं कि ताऊ जी के हिस्से की करीब 76 गज जमीन पड़ी है। वह इस जमीन को बेचना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने किसी खरीदार की तलाश करने को कहा था। ताऊजी कुछ दिन बाद आने को भी कह रहे थे, लेकिन इससे पहले ही रविवार सुबह उनके निधन की खबर आ गई। संजीव बताते हैं करीब आठ दिन पहले ही दिल्ली में एक शादी समारोह में उनकी मुलाकात ताई मीरा से हुई थी। साथ में उनकी बेटी शीबा भी थी, तब भी उन्होंने मुजफ्फरनगर में पड़ी जमीन को बेचने की बात कही थी।
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