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मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल : व्यवस्थाएं बदहाल, कतार में मरीज

Mon, 13 May 2019 11:47 PM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Published by: Deepak Kausik Updated Mon, 13 May 2019 11:47 PM IST
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Muzaffarnagar District Hospital
मुजफ्फरनगर जिला अस्पताल में दवाई लेने के लिए लगी मरीजों की लाइन। - फोटो : अमर उजाला
जिला अस्पताल में जंग लगी व्यवस्था के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को आए दिन किसी न किसी परेशानियों से जूझना पड़ता है। अस्पताल में डॉक्टरों के पास उपचार कराने से लेकर दवा लेने तक मरीजों को हर रोज कतार में लगकर घंटों समय बर्बाद करना पड़ता है। भीषण गर्मी में कई मरीजों की तो हालत खराब हो जाती है। कुछ महिलाएं गश खाकर गिर भी पड़ती हैं, तो बुजुर्ग लाठी टेककर अपने बारी की प्रतीक्षा में बैठने को मजबूर हो जाते हैं। स्वामी कल्याण देव जिला चिकित्सालय के कक्ष नंबर दस से दवा का वितरण होता है। इस कक्ष में तीन खिड़कियां बनी हैं।
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महिला, पुरुषों और दिव्यांगों व वरिष्ठजनों की खिड़कियां अलग हैं, लेकिन अस्पताल शुरू होते ही तीनों खिड़कियों पर भीड़ टूट पड़ती है। हालात इस कदर खराब हो जाते हैं कि एक मरीज को दवा हासिल करने में कम से कम दो घंटे तो लाइन में लगना ही पड़ता है। सोमवार सुबह साढ़े दस बजे भी दवा खिड़की पर यही हालात रहे। गर्मी में बुजुर्ग, बच्चे और महिलाएं दवा के लिए परेशान हो रहे थे। लाइन में लगे अमर सिंह ने बताया कि पेट में दर्द है। दो घंटे से ज्यादा लाइन में लगे हो गए।
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अभी कितनी देर लगेगी पता नहीं। आसिफा और मुंतजिर ने बताया कि जब भी दवा लेने आते हैं यही हालत रहता है। लाइन आगे बढ़ती नजर ही नहीं आती। डॉक्टर को दिखाने में तो एक घंटा लगा, लेकिन दवा की लाइन में पौने दो घंटे से खड़े हैं। मरीजों ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के सुनवाई नहीं करने के कारण लोगों को असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। मरीजों ने कहा कि कभी कभार आने पर समय पर अस्पताल में चिकित्सक भी उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में काफी दूर से आकर लौटने को विवश होना पड़ता है। मरीजों ने कहा कि सरकार को अस्पताल में सुधार करने के लिए कठोर कदम उठाना चाहिए।
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बाहर से दवा लेने को मजबूर होते हैं मरीज
जिला अस्पताल की दवा खिड़की तक पहुंचने की हर किसी की हिम्मत नहीं होती। भारी भीड़ को देखकर लोगों की हिम्मत जवाब दे जाती है और सक्षम लोग प्राइवेट मेडिकल स्टोर से दवा लेने को मजबूर हो जाते हैं।

पैरों में कई दिनों से दर्द है। खड़ा हो पाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन सवा घंटे से लाइन में खड़ा हूं। आगे की भीड़ देखकर लग रहा है कि खिड़की तक पहुंचने में करीब एक घंटा और लग जाएगा। - महेंद्र सिंह, निरमाना।

यहां तो रोज ही यही स्थिति रहती है। मुझे अपनी पत्नी मीना के लिए दवा लेनी है। करीब एक घंटे से लाइन में लगा हूं। अभी तो खिड़की बहुत दूर है। मरीजों की परेशानी को कोई नहीं समझता। - मुमताज अहमद, तावली।

पेट में परेशानी के चलते कई दिनों से दवा ले रही हूं। जिस दिन भी अस्पताल आती हूं, इसी तरह लंबी लाइन लगी मिलती है। अस्पताल से दवा लेना हर किसी के बस की बात नहीं है। - सुनीता, मुुजफ्फरनगर।

जिला अस्पताल में बीमारी की दवा लेने वाला और ज्यादा बीमार हो जाता है। घंटों तक लाइन में लगकर तो डाक्टर को दिखाओ, फिर दवा को लाइन में लगो। अस्पताल के अधिकारियों को मरीजों की समस्या का समाधान करना चाहिए।  - शकीना, खालापार।


इन्होंने कहा...
जिला चिकित्सालय में रोजाना औसतन दो हजार नए पर्चे बनते हैं। इन दिनों रमजान के चलते तकरीबन 1400 मरीज प्रतिदिन आ रहे हैं। महिला-पुरुषों और वरिष्ठजनों की खिड़कियां अलग हैं, लेकिन मरीजों की संख्या अधिक होने के कारण दवा खिड़की पर भीड़ रहती है। - डॉ. पंकज अग्रवाल, सीएमएस।
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