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मुजफ्फरनगर: अंकित के हत्यारे दंपती को उम्रकैद, पड़ोसन को करता था पसंद, शरीर पर थे चोट के 18 निशान; पूरा मामला

Wed, 30 Sep 2026 08:03 PM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Wed, 30 Sep 2026 08:03 PM IST
सार

जसौला गांव में अंकित अपने पड़ोस में रहने वाली शादीशुदा मीनाक्षी को पसंद करता था। मीनाक्षी के घर में ही अंकित अधमरी हालत में मिला था। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मीनाक्षी और उसके पति सोनू को गिरफ्तार किया था। 

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Muzaffarnagar: Couple sentenced to life imprisonment for Ankit's murder; he liked a female neighbor; body bore
अंकित की फाइल फोटो। मीनाक्षी और उसका पति सोनू। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खतौली थाना क्षेत्र के जसौला गांव में घर में बंधक बनाकर पड़ोसी अंकित (21) की बेरहमी से पिटाई कर हत्या के मामले में दोषी मीनाक्षी और उसके ट्रक चालक पति सोनू को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। कारागार से दोनों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी हुई। दोषियों पर एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया। विशेष न्यायालय एससी/एसटी एक्ट के पीठासीन अधिकारी डॉ. विजय कुमार ने फैसला सुनाया।
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Muzaffarnagar: Couple sentenced to life imprisonment for Ankit's murder; he liked a female neighbor; body bore
अंकित की मां और भाई। - फोटो : अमर उजाला
मामला सात जनवरी 2024 का है। रात आठ बजे मीनाक्षी ने कॉल कर पड़ोसी अंकित को अपने घर बुलाया था। अंकित घर पहुंचा तो आरोपी ने अपने पति के साथ मिलकर उसे बंधक बना लिया और लाठी-डंडों से पिटाई की। इस दौरान अंकित को तलाशते हुए उसके परिजन भी घर के बाहर पहुंच गए। दरवाजा नहीं खुला तो पुलिस को जानकारी दी गई।
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पुलिस ने किसी तरह दरवाजा खुलवाकर अंकित को बंधनमुक्त कराया और अस्पताल में भर्ती कराया लेकिन उसकी मौत हो गई। मृतक के पिता रणवीर सिंह ने मीनाक्षी और तीन अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस जांच में खुलासा हुआ था कि अंकित पड़ोस की रहने वाली मीनाक्षी को पसंद करता था।
 
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दोनों के बीच मोबाइल पर बातें होती थी। इसकी जानकारी मीनाक्षी के पति चालक सोनू को हो गई थी। सोनू के कहने पर मीनाक्षी ने वारदात की रात कॉल कर अंकित को अपने घर बुलाया और बदला लेने के लिए पिटाई करते हुए हत्या कर दी।
 

तत्कालीन सीओ खतौली यतेंद्र सिंह नागर और सीओ डॉ. रवि शंकर ने जांच की। नौ आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने एक मार्च 2014 को दोनों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सहायक शासकीय अधिवक्ता आशीष त्यागी ने बताया कि सात गवाह पेश किए गए। साक्ष्य के अभाव में 25 सितंबर को अदालत ने बबलू, सुमित उर्फ भूरे, गौरव, श्रीपाल, मंगत, संदीप और अमित को दोषमुक्त करार दिया था।
 

घर से निकला और फिर नहीं लौटा अंकित
जसौला निवासी वादी रणवीर सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि सात जनवरी की रात आठ बजे उसका बेटा अंकित गांव के ही कर्ण पाल के पुत्र के साथ घर से निकला था। काफी देर होने पर भी जब वह नहीं लौटा तो कॉल की लेकिन मोबाइल बंद मिला। इसके बाद रणवीर और दूसरे बेटे लवकुश ने कर्ण पाल के पुत्र से सख्ती से पूछताछ की। तब उसने स्वीकार किया कि वह अंकित को उसके गांव की रहने वाली मीनाक्षी के घर छोड़ कर वापस आ गया था। दोनों पिता-पुत्र मीनाक्षी के घर पर आए लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया। शक होने पर 112 नंबर पर पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने घर का जबरन दरवाजा खुलवाया। यहां अंकित बेसुध अवस्था में बंधा हुआ पड़ा था, गले में मफलर बंधा था और माथे और पैर से खून निकल रहा था।
 

बिखरे पड़े थे सुबूत, अंकित के शरीर पर 18 चोटें
मृतक अंकित के मोबाइल फोन के टूटे हुए टुकड़े। रजाई पर खून, तीन बाल, दो बटन, दो दुपट्टे और एक सूत का नाड़ा पुलिस ने मीनाक्षी के घर से बरामद किया था। मृतक अंकित के शरीर पर 18 चोटें आई थीं। मोबाइल के टूटे टुकड़े देखकर वादी ने कहा था कि यह अंकित का मोबाइल है। पुलिस ने दंपती को 10 जनवरी को गिरफ्तार कर लिया था।

मां बोली, बचना नहीं चाहिए था एक भी आरोपी
अंकित की मां निर्मला की आंखे छलक उठी। उन्होंने कहा कि वारदात में शामिल सभी दोषियों को सजा मिलनी चाहिए था। पुलिस ने नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी लेकिन सजा सिर्फ दो दोषियों को हुई है। सात आरोपी छोड़ दिए गए। इस मामले में न्याय के लिए वह हाईकोर्ट तक जाएंगे। वादी रणवीर सिंह ने कहा कि इंसाफ मिला है। बेटे की घर से बुलाकर हत्या कर दी गई थी। आरोपियों ने अपने घर में बंधक बनाकर हत्या की थी। 

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