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मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा 2013: कोर्ट ने छह आरोपियों को किया बरी, ये था मामला
Sat, 27 Mar 2021 08:01 PM IST
कपिल kapil
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर
Published by: कपिल kapil
Updated Sat, 27 Mar 2021 08:01 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जनपद में वर्ष 2013 में हुई सांप्रदायिक हिंसा के दौरान गांव सिंभालका में घर में घुसकर आगजनी व लूट के मामले में छह आरोपी कोर्ट से बरी हुए हैं। एडीजे-6 कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को बरी किया है। दंगा पीड़ित कसीमूद्दीन ने शामली कोतवाली पर यह मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें स्पेशल इंवेस्टीगेशन सेल (एसआईसी) ने छह लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की थी।
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मंत्री सुरेश राणा और विधायक संगीत सोम पर दर्ज दंगे का मुकदमा वापस
प्रदेश के गन्ना मंत्री सुरेश राणा, सरधना के विधायक संगीत सोम, पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह आदि के खिलाफ चल रहे भड़काऊ भाषण देने के मुकदमे को विशेष कोर्ट संख्या पांच (एमपी-एमएलए) ने वापस लेने की सहमति दे दी है।
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गांव कवाल में 27 अगस्त 2013 को मलिकपुरा निवासी के ममेरे भाईयों सचिन और गौरव की हत्या की गई थी। इसके विरोध में सात सितंबर 2013 को नंगला मंदौड़ में महापंचायत हुई थी। इस पंचायत के बाद ही जिले में दंगा भड़क गया था।
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पुलिस ने सिखेड़ा थाने में महापंचायत में शामिल सुरेश राणा (अब गन्ना मंत्री), संगीत सोम विधायक सरधना, बिजनौर के पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह, साध्वी प्राची, श्यामपाल चेयरमैन आदि समेत 11 लोगों के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने का मुकदमा दर्ज कराया था। प्रदेश सरकार ने गत वर्ष इस मुकदमे को वापस लेने की मंजूरी दी थी।
अभियोजन की ओर से कोर्ट में सीआरपीसी की धारा 321 के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। डीजीसी राजीव शर्मा ने बताया कि कोर्ट ने प्रार्थना पत्र को स्वीकार करते हुए इस मुकदमे को वापस लेने की सहमति दे दी है।
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