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सवालों के घेरे में भाजपा का लोकतंत्र, लग रहे गंभीर आरोप
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Tue, 07 Nov 2017 12:41 AM IST
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प्रत्याशियों के समर्थकों को अंदर जाने से रोकती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला
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भाजपा में टिकट को लेकर मचा हंगामा अप्रत्याशित है। पार्टी में अभी तक जिले में किसी चुनाव में ऐसा खुलकर विरोध नहीं देखा गया। प्रत्याशी चयन की प्रक्रिया जितनी लोकतांत्रिक दिख रही थी, भाजपा उसे साबित नहीं कर पाई। गुस्सा फूटने की एक वजह यह भी है कि पार्टी के बड़े नेताओं ने निकाय चुनाव में सक्रिय महिला पदाधिकारी को मैदान में उतारने का वादा किया था।
सियासी पार्टियों में दल बदलना कोई आश्चर्यजनक नहीं है। चुनाव से ठीक पहले पार्टियों में दूसरे दलों से नेताओं की आवाजाही होती ही है। वर्ष 2012 में शहर विधानसभा सीट पर बतौर बसपा प्रत्याशी अरविंद राज शर्मा ने चुनाव लड़ा था। लंबे अरसे तक बसपा में रहे शर्मा ने विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा का दामन थाम लिया था। निकाय चुनाव की घोषणा के बाद मुजफ्फरनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद पर दावेदारी के लिए पार्टी में लामबंदी शुरू हो गई।
टिकट पर ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी समाज का दावा मजबूत माना जा रहा था। अनुशासित कही जाने वाली भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाई थी, जिसमें सहारनपुर के पूर्व विधायक राजीव गुंबर को निकाय चुनाव का जिला प्रभारी नियुक्त किया गया था। इसके अलावा टिकट के लिए प्रत्याशियों के नाम का पैनल हाईकमान को भेजने की कमेटी बनाई गई।
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कमेटी में जिला प्रभारी एवं कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, सांसद डॉ संजीव बालियान, शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल, जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सैनी आदि को रखा गया था। चेयरमैन पद के लिए महिला सीट आरक्षित होने से उत्साही पार्टी की सक्रिय पदाधिकारियों ने अपने आवेदन प्रस्तुत किए थे। दो बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने महिला दावेदारों से सीधा संवाद किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र पांडेय और जिला प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने सार्वजनिक रूप से महिला कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाया था कि पार्टी में वर्षों से सक्रिय निष्ठावान, संघर्षशील पदाधिकारी को मौका दिया जाएगा। कमेटी की संस्तुति के बाद जिलाध्यक्ष ने हाईकमान को 12 प्रत्याशियों की सूची भेजी थी। अंतिम समय में प्रत्याशी की घोषणा हुई तो पूरी महिला मोर्चा बिफर पड़ी।
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सियासी पार्टियों में दल बदलना कोई आश्चर्यजनक नहीं है। चुनाव से ठीक पहले पार्टियों में दूसरे दलों से नेताओं की आवाजाही होती ही है। वर्ष 2012 में शहर विधानसभा सीट पर बतौर बसपा प्रत्याशी अरविंद राज शर्मा ने चुनाव लड़ा था। लंबे अरसे तक बसपा में रहे शर्मा ने विधानसभा चुनाव से पहले ही भाजपा का दामन थाम लिया था। निकाय चुनाव की घोषणा के बाद मुजफ्फरनगर नगर पालिका अध्यक्ष पद पर दावेदारी के लिए पार्टी में लामबंदी शुरू हो गई।
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टिकट पर ब्राह्मण, वैश्य और पंजाबी समाज का दावा मजबूत माना जा रहा था। अनुशासित कही जाने वाली भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन को लेकर पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था बनाई थी, जिसमें सहारनपुर के पूर्व विधायक राजीव गुंबर को निकाय चुनाव का जिला प्रभारी नियुक्त किया गया था। इसके अलावा टिकट के लिए प्रत्याशियों के नाम का पैनल हाईकमान को भेजने की कमेटी बनाई गई।
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कमेटी में जिला प्रभारी एवं कैबिनेट मंत्री सतीश महाना, सांसद डॉ संजीव बालियान, शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल, जिलाध्यक्ष रूपेंद्र सैनी आदि को रखा गया था। चेयरमैन पद के लिए महिला सीट आरक्षित होने से उत्साही पार्टी की सक्रिय पदाधिकारियों ने अपने आवेदन प्रस्तुत किए थे। दो बार पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने महिला दावेदारों से सीधा संवाद किया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ महेंद्र पांडेय और जिला प्रभारी मंत्री सतीश महाना ने सार्वजनिक रूप से महिला कार्यकर्ताओं को यह भरोसा दिलाया था कि पार्टी में वर्षों से सक्रिय निष्ठावान, संघर्षशील पदाधिकारी को मौका दिया जाएगा। कमेटी की संस्तुति के बाद जिलाध्यक्ष ने हाईकमान को 12 प्रत्याशियों की सूची भेजी थी। अंतिम समय में प्रत्याशी की घोषणा हुई तो पूरी महिला मोर्चा बिफर पड़ी।