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बुढ़ाना में सबसे ज्यादा मतदाताओं ने नकार दिए थे प्रत्याशी
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मुजफ्फरनगर। मतदाता अपनी चाल चलते हैं। पांच साल पहले वोटरों ने दिल खोलकर मतदान किया था। नोटा का बटन भी खूब दबाया गया। बुढ़ाना विधानसभा में मतदाताओं ने सबसे ज्यादा नोटा के बटन का प्रयोग किया था। मुजफ्फरनगर और पुरकाजी विधानसभा में भी नोट खूब दबाया गया। मीरापुर के नतीजे तो नोटा से ही बदले हुए दिखे।
साल 2017 के चुनाव के नतीजे हर विधानसभा सीट पर भाजपा के पक्ष में गए थे। जनता का रिपोर्ट कार्ड देखें तो ऐसे भी मतदाता है, जिन्होंने किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी को पसंद नहीं किया था। राजनीतिक रूप से सबसे अधिक सक्रिय माने जाने वाले बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1286 लोग ऐसे थे, जिन्होंने नोटा का बटन दबाया था। यानी इन्हें किसी भी राजनीतिक दल का प्रत्याशी पसंद नहीं था। शहरी क्षेत्र के वोटरों की बात करें, तो मुजफ्फरनगर विधानसभा में भी 1133 वोटरों ने नोटा का प्रयोग किया।
2017 में नापसंद किए गए प्रत्याशी
विधानसभा नोटा मतदाता
बुढ़ाना 1286
पुरकाजी 1139
मुजफ्फरनगर 1133
मीरापुर 1090
चरथावल 1018
खतौली 694
नोटा वालों ने बदल दिए नतीजे
पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे नजदीकी मुकाबला मीरापुर विधानसभा पर हुआ था। भाजपा के अवतार भड़ाना ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के लियाकत अली को 193 वोटों से हराया था। जबकि यहां पर नोटा के बटन का प्रयोग 1090 लोगों ने किया था। यह भी आंकलन किया जाता है कि अगर 1090 वोटर अपने मत को किसी प्रत्याशी के पक्ष में देते तो जीत-हार का अंतर बढ़ता या नतीजे बदल जाते।
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इसलिए दबाया जाता है नोटा
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के लिए ईवीएम में ऐसे बटन की व्यवस्था की है, जिसमें वह बूथ तक पहुंचता है, लेकिन किसी के पक्ष में मतदान नहीं करता। अगर मतदाता को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं है, तो वह नोटा यानी इनमें से कोई नहीं है के अधिकार का प्रयोग कर सकता है।
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साल 2017 के चुनाव के नतीजे हर विधानसभा सीट पर भाजपा के पक्ष में गए थे। जनता का रिपोर्ट कार्ड देखें तो ऐसे भी मतदाता है, जिन्होंने किसी भी राजनीतिक दल के प्रत्याशी को पसंद नहीं किया था। राजनीतिक रूप से सबसे अधिक सक्रिय माने जाने वाले बुढ़ाना विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा 1286 लोग ऐसे थे, जिन्होंने नोटा का बटन दबाया था। यानी इन्हें किसी भी राजनीतिक दल का प्रत्याशी पसंद नहीं था। शहरी क्षेत्र के वोटरों की बात करें, तो मुजफ्फरनगर विधानसभा में भी 1133 वोटरों ने नोटा का प्रयोग किया।
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2017 में नापसंद किए गए प्रत्याशी
विधानसभा नोटा मतदाता
बुढ़ाना 1286
पुरकाजी 1139
मुजफ्फरनगर 1133
मीरापुर 1090
चरथावल 1018
खतौली 694
नोटा वालों ने बदल दिए नतीजे
पिछले विधानसभा चुनाव में सबसे नजदीकी मुकाबला मीरापुर विधानसभा पर हुआ था। भाजपा के अवतार भड़ाना ने सपा-कांग्रेस गठबंधन के लियाकत अली को 193 वोटों से हराया था। जबकि यहां पर नोटा के बटन का प्रयोग 1090 लोगों ने किया था। यह भी आंकलन किया जाता है कि अगर 1090 वोटर अपने मत को किसी प्रत्याशी के पक्ष में देते तो जीत-हार का अंतर बढ़ता या नतीजे बदल जाते।
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इसलिए दबाया जाता है नोटा
निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं के लिए ईवीएम में ऐसे बटन की व्यवस्था की है, जिसमें वह बूथ तक पहुंचता है, लेकिन किसी के पक्ष में मतदान नहीं करता। अगर मतदाता को कोई भी प्रत्याशी पसंद नहीं है, तो वह नोटा यानी इनमें से कोई नहीं है के अधिकार का प्रयोग कर सकता है।